06.08.2018 ►Mumbai ►Women's Conference SRIJAN in Presence of Sadhvi Anima Shree

Posted: 08.08.2018
Updated on: 09.08.2018

Mumbai: 06.08.2018

Terapanth Mahila Mandal organised women's conference in presence of Sadhvi Anima Shree. All India Terapanth President Kumud Kachhara and General Secretary Neelam Sethis was present n conference. More than 1000 women from Maharashta attended conference. Sadhvi Anima Shree told participants that attention should be paid to develop good Sanskar. She advised to keep family meet once in week. Sadhvi Mangal Pragya told that women can give new direction to society by their work. Sadhvi Sudha Prabha and Sadhvi Maitri Prabha also guided participants. Kumud Kachhara told to be courageous for getting success. Neelam Sethia was so happy and praised Mumbai Mahila Mandal and told it is not easy task to handle it. She has described Kumud Kachhara as jewel and diamond of Mumbai. Jayshree Badala president of local manila mandala welcomed all. Conference was great success and in every session training was given by eminent speakers.Nitesh Dhakad, Kuldeep Baid, Pankaj Surana gave good support.

मुंबई 6 अगस्त l अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में तेरापंथ महिला मंडल मुंबई द्वारा महाराष्ट्र स्तरीय विराट महिला सम्मेलन "सृजन" का भव्य आयोजन कालबादेवी स्थित महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में साध्वीश्री अणिमाश्रीजी, साध्वीश्री मंगलप्रज्ञा जी के मंगल सान्निध्य में संपन्न हुआ। सम्मेलन में महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से समागत लगभग 1000 से भी ज्यादा महिलाओं की उपस्थिति से इस वृहद् आयोजन की गूँज सम्पूर्ण महाराष्ट्र में सुनाई दी l एक दिवसीय इस सम्मेलन के प्रथम सत्र "उदबोधन" का शुभारंभ साध्वीश्री अणिमाश्रीजी के मंत्रोच्चार द्वारा हुआ। वहीँ विराट महिला सम्मेलन “सृजन” के बैनर का अनावरण अभातेमम की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद जी कच्छारा, राष्ट्रीय महामंत्री नीलम जी सेठिया, मुम्बई तेमम अध्यक्षा श्रीमती जयश्री जी बड़ाला व मंत्री श्रीमती श्वेताजी सुराणा ने किया ।

इस अवसर पर साध्वीश्रीजी अणिमाश्रीजी ने प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि हम सृजन की शुरुआत कहाँ से करे इस पर हमें चिंतन करना है । हम संस्कारो का सृजन करें और साथ ही आत्म विश्लेषण भी करें। तेरापंथ में यह एक परिवर्तन हुआ है कि पदाधिकार बराबर न बैठकर अतिथियों को बराबर बिठाते है यह है संस्कारो का सृजन l हमें अपने अन्दर धार्मिक संस्कारों का बीजारोपण करना होगा l दूसरा सृजन संयम का करे कोई भी व्यक्ति यदि संयम के साथ आगे बढ़े तो वर्तमान और भविष्य दोनों सुरक्षित हो जाएगा । साथ ही यदि समन्वय, सामन्जस्य, सहनशीलता का सृजन किया जाए तो निश्चित रूप से यह आयोजन सफल हो जाएगा । हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि विचारों का सामंजस्य नही है तो सब बेकार हो जाएगा । महीने में एक बार परिवार में सामूहिक संगोष्ठि होनी चाहिए क्योंकि भावो की अभिव्यक्ति का अवसर न मिलने पर परिवार टूट जाता है l हालांकि एक दिन में कभी निर्माण या सृजन नही होता किन्तु चिंतन करते करते कही न कही सृजन की ओर गतिमान हो जाते है । कोई भी प्रतिकूल परिस्थिति लक्ष्य से डिगा नही सकती । साध्वीश्री जी ने कहा कि - “इरादे तो है मंजिल के पर चलना नही आता, कहते तो बहुत है पर करना नही आता” । गुरु की आज्ञा और गुरु से ज्ञान लेकर आगे चलना चाहिए ।

साध्वीश्री मंगलप्रज्ञा जी अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करते ही घंटी बजाता है क्योंकि भगवान को अपनी ओर आकर्षित करता है । वैसे ही आज महिलाएं भी ध्यानाकर्षण के लिए सृजन की बेल बजाने को उपस्थित हुई है । किन्तु यह समझना आवश्यक है कि आप कैसे और क्या सृजन कर रहे । आज मूल सृजन भूलते चले जा रहे हैl हम नित नया सृजन तो कर रहे है पर जरुरी है कि मूल सृजन को न भूलें । हम अपने कार्यों से समाज के विकास और उसे नई दिशा देने में अपना योगदान देवें l साध्वीश्री सुधाप्रभाजी ने अपने पाथेय द्वारा महिलाओं को मार्गदर्शन दिया। साध्वी मैत्रीप्रभा जी ने सृजन की व्याख्या उदाहरण के द्वारा की। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद जी कच्छारा ने विराट महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि साहस और शौर्य का प्रतीक केसरिया रंग में सुसज्जित बहनों को अपने सृजन के लिए पुरुषार्थ करना होगा । साहस के बिना सृजन की कल्पना संभव नहीं साथ ही हमें जागरूक रहना होगा, तभी भाग्य साथ देगा । हमें सकारात्मक सोच के साथ सही दिशा में सृजन करना होगा । जो समय के साथ चलता है वो सफलता को प्राप्त करता है । उन्होंने कहा कि लम्बे समय से चिंतन चल रहा था महाराष्ट्र स्तरीय विराट सम्मेलन का जो आज इस भव्य रूप में साकार हो रहा है । राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती नीलम जी सेठिया ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि दस महीनों बाद राष्ट्रीय अध्यक्षा की कर्म भूमि पर आना हुआ उसे मैं अपना सौभाग्य समझती हूं । उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा को एक हीरे की उपमा देते हुए कहा कि उनमें वो सब खूबियाँ है जो हीरे में होती है । उन्होंने मुम्बई महिला मंडल को अपने 57 उपनगरों समेत अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के माइक्रो मिनी की संज्ञा दी और कहा कि मुम्बई का नेतृत्व करना कोई आसान काम नही है ।

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित नगर सेविका रीटा जी मकवाना ने कहा कि यह एक रंग में सजी धजी एकत्व की प्रतीक महिला शक्ति को एक जगह एकत्र करना यदि मुमकिन है तो वो माध्यम है तेरापंथ महिला मंडल । उन्होंने कहा कि तेरापंथ धर्म संघ देश और समाज के लिए सेवा कार्यो में सदैव आगे रहा है । कन्यासुरक्षा सर्कल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत ही सराहनीय कार्य है साथ ही उन्होंने अपने वार्ड में भी कन्यासुरक्षा सर्कल बनवाने का आश्वासन दिया । मिसेस एशिया यूनिवर्स पिंकी जी राजगिरिया ने कहा कि आये हो जमीन पे अपना किरदार निभाने को तो कुछ ऐसा कर चलो की दुनिया मिसाल दे । मुझे इस महिला मंडल से कुछ सीखना है । सम्मेलन में शायना एन सी जी ने भी अपने विचारों द्वारा महिलाओं का उत्साहवर्धन किया । तेरापंथ महिला मंडल मुंबई की अध्यक्षा श्रीमती जयश्री जी बड़ाला ने सम्पूर्ण महाराष्ट्र से समागत हजारों महिलाओं के समक्ष सम्मेलन की थीम “सृजन” की व्याख्या अपने शब्दों में करते हुए महिलाओं में सकारात्मक ऊर्जा भरने का कार्य किया और तितली का उदाहरण देते हुए बहनों को जीवन में "सृजन" करते रहने की प्रेरणा दी ।

इससे पूर्व प्रारंभ में मंगल संगान डोम्बीवली महिला मंडल ने किया । एल्फिंस्टन महिला मंडल ने नवकार मन्त्र की प्रस्तुति दी । स्वागत गीत की प्रस्तुति दक्षिण मुंबई महिला मंडल ने दी । दक्षिण मुम्बई की संयोजिका श्रीमती वंदना जी बागरेचा ने स्वागत भाषण दिया । तेरापंथ महिला मंडल की मंत्री श्रीमती श्वेता जी सुराणा ने अपने भावों की अभिव्यक्ति देते हुए सभी का आभार ज्ञापित किया । इस अवसर पर सम्मेलन की प्रायोजक श्रीमती अनिता जी कठोतिया सहित अणुव्रत समिति मुम्बई के अध्यक्ष रमेश जी चौधरी, पूर्व अध्यक्ष गणपत जी डागलिया,
आचार्य महाप्रज्ञ विद्या फाउंडेशन से सभी पदाधिकारियों तेयुप दक्षिण मुंबई अध्यक्ष रवि दोषी मंत्री धनपत बैद एवं पूरी टीम की उपस्थिति रही ।

द्वितीय सत्र "संबोधन- अध्यात्म के आईने में देखे सृजन का प्रतिबिंब" के प्रारम्भ में पुणे महिला मंडल ने मंगलाचरण किया । श्रीमति संगीता जी ने सृजन के लिए अपने भावों की अभिव्यक्ति दी । अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की ट्रस्टी श्रीमती शांता जी पुगलिया ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि हम सचमुच अपना सृजन करना चाहते है तो अपने नैसर्गिक गुणों को न भूले । संस्कार को अपनाते हुए सृजन करे, सबसे पहले कुशल गृहिणी बने, बच्चों को अच्छे संस्कार दे, परिवार को अच्छा पोषण दे । समाज से जुड़े, धर्मसंघ को अपना समय दे । मोटिवेटर श्रीमती मंजूजी लोढ़ा ने कहा कि नारी ही सृजनकर्ता है उससे बड़ा कोई कर्ता नहीं । उसने ही इंसान को जन्म दिया, अपने खून से सींचा, अपने संस्कारो से पाला । नारी समस्त मनुष्य जाति का कल्याण करती है । उन्होंने कहा कि मैं तेरापंथी महिलाओं की फैन हूँ । आप सभी एकता का उदाहरण हो । गुरु का जो निर्देश होता है आप सब उसी का पालन करते हो, कोई अलग अलग कार्य नही करते । उन्होंने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा जब लोहा होता है तो वो सिर्फ एक वजन होता है, जब सुई बनती है तो घर मे रखी जाती है और घड़ी की सुइयां बनती है तो समय ही बदल देता है । हम क्या करना चाहते है वह महत्वपूर्ण है । किसी भी कार्य को आसान मत समझिये, श्रम करना जरूरी है । आप एक लक्ष्य रखिये, हर जगह मत दौड़िए । द्वितीय सत्र का कुशल संचालन स्वीटी जी लोढा ने किया । सत्र का समापन साध्वीश्री जी के मंगलपाठ द्ववारा हुआ ।

तृतीय सत्र "आनन्द- नई सोच नए उत्साह का करें सृजन” की शुरुआत जलगाँव महिला मंडल के सुमधुर गीत के द्वारा हुई । सत्र के दौरान ग्रुप डिस्कशन में पोस्टर द्ववारा सारांश निकालने की रोचक प्रतियोगिता आयोजित की । जिसमें सुलसा ग्रुप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया जिसके लीडर निर्मला जी नोलखा रहे, द्वितीय स्थान प्राप्त किया सुभद्रा ग्रुप ने जिसके लीडर रहे अदिति जी सेखानी व तृतीय स्थान पर लीडर तरुणा जी बोहरा का ग्रुप द्रोपदी रहा । सत्र को गति देते हुए साध्वीश्री अणिमाश्री जी ने अपने प्रेरणा पाथेय में फरमाया व्यक्ति को कभी निराश नही होना चाहिए, हताश नही होना चाहिए । उन्होंने धीरूभाई अंबानी, सचिन तेंदुलकर और नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा की जीवन मे उतार चढ़ाव आते रहते है पर सृजन करना नहीं छोड़ना चाहिए । उन्होंने महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आप अपनी सृजनात्मक शक्ति का उपयोग करते रहे और अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते रहे । बहिनों को अपनी जिम्मेदारी और जवाबदारी को अच्छे से समझना चाहिए । अपनी अस्मिता और सुरक्षा की ओर ज्यादा जागरूक बनने की कोशिश करें । पालघर महिला मंडल ने महिलाओं के सभी रूप को दर्शाते हुए सुंदर गीत की प्रस्तुति दी ।

चतुर्थ सत्र “नवसृजन- बेस्ट आउट ऑफ द वेस्ट” में आयोजित प्रतियोगिता में बहनों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया । प्रतियोगिता में प्रथम स्थान विक्रोली महिला मंडल, द्वितीय डोम्बीवली महिला मंडल, तृतीय स्थान खार महिला मंडल ने प्राप्त किया । इस विराट सम्मेलन का एक और आकर्षण आध्यत्मिक गेम्स के स्टाल रहे जिन्हें मुम्बई ज्ञानशाला परिवार से राजीमती ज़ोन के क्षेत्र वाशी, नेरुल, कोपरखेरने, ऐरोली व पनवेल की प्रशिक्षको ने आयोजित किए । रोचक गेम्स के द्ववारा आध्यत्मिक ज्ञान प्राप्त करवाने का यह अनूठा प्रयास को सभी ने सराहा । पालघर महिला मंडल को सबसे अधिक उपस्थिति के लिए सम्मानित किया गया । तृतीय सत्र का कुशल संचालन श्रीमती सरोजजी सिंघवी ने किया ।

पंचम सत्र "संवाद- सृजन का स्वरूप,संघीय गरिमा के अनुरूप” में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की सभी सम्मानित पदाधिकारियों के अनुभवों को सुनने का मौका मिला । साथ ही यह भी जानने का अवसर मिला कि कैसे सभी पदाधिकारी टीम वर्क के साथ हर एक कार्य पर अपना श्रम नियोजित कर उसे सफलतम बनाते है । सत्र के दौरान ही चक्र गुमाओ भाग्य निखारो गेम के माध्यम से सरोजजी सिंघवी व शिखा बाफना ने प्रश्न उत्तर राउंड संपन्न कराया जिसमें बहनों ने उत्साह से भाग लिया । निर्णायक के रूप में निर्मला जी चंडालिया ने भूमिका निभाई ।

इस विराट सम्मेलन में सम्पूर्ण महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों की शाखाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । विशिष्ट अतिथि सारिका जी जैन सहित राष्ट्रीय कार्यकारणी से श्रीमती प्रकाशदेवी जी तांतेड़, राष्ट्रीय पूर्वाध्यक्ष श्रीमती शांता जी पुगलिया, श्रीमती भाग्यश्री जी कच्छारा, श्रीमती तरुणा जी बोहरा, श्रीमती अदिति जी सेखानी, श्रीमती निधि जी सेखानी, श्रीमती जयश्री जी जोगड़, श्रीमती कांता जी तांतेड़, श्रीमती निर्मला जी चंडालिया, श्रीमती प्रेमलता जी सिसोदिया की गरिमामय उपस्थिति रही । कार्यक्रम संयोजक सरोज जी सिंघवी, संगीता जी चपलोत सहित मुम्बई कार्यकारणी से सहमंत्री स्वीटी जी लोढ़ा, गीतांजलि जी बोथरा, कोषाध्यक्ष अंजू जी बापना, प्रचार मंत्री अलका जी मेहता, कल्पना जी परमार, विमला जी हिरण, योजना प्रभारी चंदा जी कोठारी, कन्यामण्डल प्रभारी मीना जी कच्छारा, सह प्रभारी प्रीति जी बोथरा, कन्यामण्डल संयोजिका मानसी जी बागरेचा, ध्रुवी जी मादरेचा, दीपांशी जी धोका व उनकी पूरी टीम, ज्ञानशाला आंचलिक संयोजिका सुमन जी चपलोत आदि की विशेष उपस्थिति रही । दक्षिण मुम्बई महिला मंडल से लतिका जी डागलिया, भावना जी बागरेचा, वंदना जी वागरेचा, जयश्री जी धाकड़, गुँजन जी सुराणा, कंचन जी कर्णावट, आशा जी कच्छारा, पुष्पा जी कच्छारा, शर्मिला जी धाकड़, मीना जी धींग व राखी जी सालेचा का भी पूर्ण सहयोग रहा । नितेश जी धाकड़, कुलदीप जी बैद व पंकज जी सुराणा के साथ उनकी पूरी टीम का भी सम्मेलन के सफल आयोजन में योगदान रहा । सम्मेलन को सफल बनाने में मुम्बई की सभी शाखा की संयोजिका - सहसंयोजिका बहिनों की भी विशेष भूमिका रही ।

Sadhvi Anima Shree

Manila Mandal

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