Chobisi ►13 ►Stavan for Bhagwan Vimalanatha

Posted: 07.04.2016
Updated on: 09.04.2016

Chobisi is a set of 24 devotional songs dedicated to the 24 Jain Tirthankaras.


Composed by:

Dedicated to:

Acharya Shree Jeetmalji
Acharya Jeetmal
 

Language: Rajasthani:
 

13~~ तीर्थंकर विमल प्रभु

साहिब! शरण तिहारै हो,
शरण तिहारै,शरण तिहारै,शरण तिहारै हो ।
विमल प्रभु! सेवक नीं अरदास,आयो शरण तिहारै हो।

विमल करण प्रभु विमलनाथजी,विमल आप वर रीत।
विमल ध्यान धरतां हुवै निर्मल,तन मन लागी प्रीत।।१।।

विमल ध्यान प्रभु आप ध्याया,तिण सूं हुवा विमल जगदीश।
विमल ध्यान बलि जे कोई ध्यासी,होसी विमल सरीस ।।२।।

विमल गृहवासे द्रव्य जिनेंद्र था,दीख्या लीधां भावे साथ।
केवल उपनां भावे जिनेश्वर,भावे विमल आराध।।३।।

नाम स्थापना द्रव्य विमल थी,कारज न सरै कोय ।
भाव विमल थी कारज सुधरै,भाव जप्यां शिव होय।।४।।

गुण गिरवो गंभीर धीर तूं,तूं मेटण जम-त्रास।
मैं तुम वयण आगम शिर धार्या,तूं मुझ पूरण आश।।५।।

तूं ही कृपाल दयाल साहिब! शिव -दायक तूं जगनाथ।
निश्चल ध्यान धरै तुझ ओलख,ते मिलै तुझ संघात।।६।।

अंतरजामी आप उजागर,मैं तुम शरणाे लीध।
संवत उगणीसै भाद्रवी पूनम,बंछित कारज सीध ।।७।।

 

Lord Vimalnath
Bhagwan Vimalanatha

Pig
Symbol - Pig


 

 

 

 

13

Stavan for Bhagwan Vimalanatha

 

Acharya Tulsi

7:21

http://www.herenow4u.net/fileadmin/v3media/pics/persons/Babita_Gunecha/Babita_Gunecha_560.jpg

Babita Gunecha

5:55

Language: Hindi
Author: Acharya Tulsi

अर्थ~~13~~तीर्थकर विमल प्रभू

विमल प्रभो! मेरी प्रार्थना सुनो! मैं तुम्हारी शरण में हूँ।

विमल बनाने वाले विमल प्रभो! तुम सचमुच! विमल हो ।विमल का ध्यान करने वाला निर्मल बन जाता है ।तुम्हारे प्रति मेरा शरीर और मन दोनों प्रीति से सराबोर हो गये।

प्रभो! तुमने विमल ध्यान किया,इसलिए हे जगदीश! तुम विमल बन गये ।जो कोई तुम्हारा (विमल) ध्यान करेगा,वह तुम्हारे (विमली) जैसा हो जायेगा।

प्रभो! गृहवास में तुम द्रव्य-जिन थे,दीक्षा स्वीकार कर तुम भाव -मुनि बने और केवलज्ञान उत्पन्न होने पर भाव - जिन बन गये ।हम भाव विमल की आराधना करें।

नाम,स्थापना और द्रव्य विमल (गुण शून्य) से कार्य नहीं सधता ।भाव विमल (गुणयुक्त)के जप से कार्य सिद्ध होता है और शिवपद उपलब्ध होता है।

प्रभो! तुम गुणों से गुरू,गंभीर और धीर हो ।यम का संत्रास मिटाने वाले हो ।मैंने तुम्हारे आगम -रूप वचनों को शिरोधार्य किया।तुम्हीं मेरी आशा पूरी करने वाले हो ।

प्रभो! तुम दयालु,कृपालु,शिवदायक और जगत् के नाथ हो।जो तुम्हे पहचान कर स्थिर चित्त से तुम्हारा ध्यान करते हैं,वे तुम्हारे पास पहुंच जाते है ।

अन्तर्यामी! तुम प्रकाशशील हो,में तुम्हारी शरण में आया हूँ। मेरे वांछित कार्य सिद्ध हो गये है।

रचनाकाल -वि.सं.१९००,भाद्रवी पूर्णिमा ।

 

English Translation:

13th Tirthankara Vumalnatha

Lord Vimal! Please hear my prayer. I am in your patronage.

Lord Vimalnatha! You are the one who makes the people vestal. You are vestal, indeed! One who cherish Vimalnatha becomes vestal. My mind and body both get brimful in your fondness.

Lord! You did Vimal (Without sin) meditation, thus, you became pure. People who purely cherish you can also be pure like you.

Lord! You were like a Dravya Spirit when living as the householder, you became Bhava Muni after accepting the path of Monkhood and you became Bhava spirit after occurance of Kevalgyana. We should worship Bhav Vimal.

No work is accomplished with only meritless Nama, Sthapna and Dravya Vimal. The work can be succeeded with chanting of Bhava Vimal (meritorious) and this act can avail the Moksha state.

Lord! You are supreme, profound and sedate by virtues, You take us away from the fear of Yama. I have accepted your aspect of words as the Agama. You are the only one who can fulfill my hopes.

Lord! You are merciful, kindhearted, Moksha Dayak (one who shows the path of Moksha) and Lord of the universe. People who recognize you and meditate you with stable Chitta (psyche), can reach to you.

Immanent! You are enlightened. I have come in your protection, now all my prepense causes have been accomplished.

Time of Composing - V.S. 1900, Purnima (15th day) Bhadrava.

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