17.04.2012 ►Ladnun ►Acharya Mahaprajna was Great Personality and Tension Free Person► Muni Dhananjay Kumar

Posted: 17.04.2012
Updated on: 16.05.2012

ShortNews in English

Ladnun: 17.04.2012

Acharya Mahaprajna was fit example of alertness. He was far away from anger or tension. Muni Dhananjay Kumar express above view on his Mahaprayan day. Muni Dhananjay Kumar further told that life of Acharya Mahaprajna was unique. His dedication and duty towards humanity was inspiring. He was great Yogi.

Sadhvi Ratan Shree described him shining sun. Samani Malli Pragya expressed her view on contribution of Acharya Mahaprajna for development of Saman category.

Chairman of Municipality Bachhraj Nahata expressed his views. Samani Mridu Pragya presented starting song as Mangalacharan.

Muni Akshay Prakash, Muni Malayaj Kumar, Sadhvi Mridula Kumari, Sadhvi Chand Kumari, Sadhvi Him Shree, Samani Ramaniya Pragya also expressed their views on life of Acharya Mahaprajna. Function compeered by Sunita Baid.

News in Hindi

17 April 2012 जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो समृधि नाहर

आवेश और तनाव से मुक्त थे आचार्य
आचार्य महाप्रज्ञ का जीवन जागरूकता और अप्रमाद का अतुलनीय उदाहरण है। वे सदा आवेश और तनाव से मुक्त रहे। ये विचार तेरापंथ धर्म संघ के दसवें अधिशास्ता आचार्य महाप्रज्ञ के महाप्रयाण दिवस पर हुए कार्यक्रम में शासन गौरव मुनि धनंजय कुमार ने व्यक्त किए।
पहली पट्टी स्थित ऋषभद्वार सभागार में हुए इस कार्यक्रम में मुनि कुमार ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ का जीवन अपने आप में एक धरोहर है। उनके समर्पण, पुरुषार्थ और आत्म कर्तव्य की गाथा प्रेरणादायी है। मुनिश्री ने कहा कि वे एक विशिष्ट महायोगी थे। साध्वी रतनश्री ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ एक ऐसे चमत्कारी महासूर्य है जिनके नाम का स्मरण करने से भी चमत्कार घटित हो जाए। समणी मल्लिप्रज्ञा ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ समण श्रेणी के सर्वांगीण विकास के स्वपन दृष्टा थे।
नगर पालिकाध्यक्ष बच्छराज नाहटा ने भी महाप्रज्ञ पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ समणी मृदुप्रज्ञा के मंगलाचरण से हुआ। साध्वी प्रमोदश्री ने महाप्रज्ञ के अवदानों पर प्रकाश डाला। मुनि अक्षय प्रकाश, मुनि मलयज कुमार साध्वी मृदुला कुमारी, साध्वी सूरजकुमारी, साध्वी चांद कुमारी, साध्वी हिमश्री, तेरापंथी सभा के मंत्री राजेश खटेड़ व समणी रमणीय प्रज्ञा ने भी विचार व्यक्त किए। ओसवाल सभा के मंत्री लक्ष्मीपत बैंगाणी व राजूदेवी चौरडिय़ा ने गीतिका प्रस्तुत की। संचालन सुनीता बैद ने किया।

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