13.01.2018 ►TSS ►Terapanth Sangh Samvad News

Posted: 13.01.2018
Updated on: 16.01.2018

Update

👉 राजसमंद- नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा पर वकील सम्मेलन
👉 मुम्बई - निर्माण एक नन्हा कदम स्वच्छता की ओर
👉 राउरकेला - निर्माण एक नन्हा सा कदम स्वच्छता की ओर कार्यक्रम
👉 अहमदाबाद - अणुव्रत समिति द्वारा सेवा कार्य

प्रस्तुति -🌻 तेरापंथ *संघ संवाद* 🌻

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*14/01/18* दक्षिण भारत मे मुनि वृन्द, साध्वी वृन्द का सम्भावित विहार/ प्रवास
दर्शन सेवा का लाभ लें
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री धर्मरूचि जी ठाणा 4* का प्रवास
*विजयनगरम*
☎8890269128,9884901680
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी* *के आज्ञानुवर्ति मुनिश्री सुव्रत कुमार जी ठाणा* 2 का प्रवास *Shree Jain Swetamber Terapanth sabha*
No 5 Thakayattam Bazzar
Near police station *Gudiyattam* Tamilnadu
☎9003789485,9150179971
9488921371
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री रणजीत कुमार जी ठाणा २* का प्रवास
*Bansilal ji Pitaliya* के निवास स्थान पर
BPL SHOW ROOM
K.R Nager (कर्नाटक)
☎9901135937,9448385582
9886872447,9886872448
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य*
*मुनि श्री ज्ञानेन्द्र कुमार जी ठाणा 3* का प्रवास
*महावीर जैन भवन*
*चिदम्बरम* (तमीलनाडु)
☎8107033307,9043660081
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य डॉ *मुनि श्री अमृत कुमार जी ठाणा २ का प्रवास*
*रमेश जी ऑचलिया के निवास स्थान पर*
*तिन्डीवनम* (तमिलनाडु)
☎9786805285,9566296874
9344656645,
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री प्रशान्त कुमार जी ठाणा २* का प्रवास
*Hotel Cochin gate*
N.H.Road.
Opp.Telephone Exchange,*karukutty*
(केरला) ☎9672039432,9246998909
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या 'शासन श्री' साध्वी श्री विद्यावती जी 'द्वितिय' ठाणा ५* का प्रवास
*तेरापंथ भवन*
*KGF* (कर्नाटक)
☎8890788495
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या "शासन श्री" साध्वी श्री यशोमती जी ठाणा 4* का प्रवास
सुबह का प्रवास
*Vigneswara Granite Sesanam से 12 km का विहार करके अन्नपूर्णा होस्टल कुतुर पधारेगे*
शाम का प्रवास
*3km का विहार करके तरलीपेटा पधारेगे*
Bhubaneswar se Visakhapatnam highway
☎7297958479,9025434777
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या 'शासन श्री' साध्वी श्री कंचनप्रभा जी ठाणा ५* का प्रवास
*मीठालाल जी, केतन जी, रौनक जी छाजेड़*,
- #83 sri rishabhdev basera, 1st floor, 7th cross, 2nd main road, Near eid ka maidan, *Chamrajpet - Bangalore*
☎080-26609423 9886377662,9845166858 9964202582
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री काव्यलता जी ठाणा 4* का प्रवास
*North Town Apartment*
Binny Mill Villa No 10
*Chennai*
☎9962649649,9380361000
9841036201
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री प्रज्ञाश्री जी ठाणा 4* का प्रवास
*जैन भवन*
114/48, Big Street (Periya Teru),
*Vadivishwaram,Nagercoil*
(तमिलनाडु)
☎9629840537
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री सुदर्शना श्री जी ठाणा 4* का प्रवास
*तेरापंथ भवन*
*बल्लारी* (कर्नाटक)
☎7230910977,8830043723
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री लब्धि श्री जी ठाणा 3 का प्रवास*
सुबह का प्रवास
*संदीप जी सुराणा के निवास स्थान पर* *
*के आर पुरम्* *हासन*
शाम का प्रवास
*तेरापंथ सभा भवन हासन*
☎9601420513,
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*आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री मघुस्मिता जी ठाणा 7* का प्रवास
*तेरापंथ सभा भवन*
*Rajajinagar* *बैगलौर* (कर्नाटक)
☎7798028703,9900252718
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प्रस्तुति:- 🌻 *तेरापंथ संघ संवाद* 🌻

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👉 बोरला (महाराष्ट्र): तेरापंथ भवन का लोकार्पण
👉 मदुरै - Power Up Yourself In New Era- Parenting seminar
👉 पीलीबंगा - “निर्माण” एक कदम स्वच्छता की ओर का आयोजन
👉 बेंगलुरु: अणुव्रत समिति द्वारा 155 वीं स्वामी विवेकानंद जन्म जयंती पर नैतिकता, नशामुक्ति व साम्प्रदायिक सौहार्द पर कार्यक्रम का आयोजन
👉 राजाराजेश्वरी नगर (बेंगलोर) - “निर्माण” एक कदम स्वच्छता की ओर का आयोजन
👉 राजाराजेश्वरी नगर: बेंगलोर -जैन संस्कार विधि से सामूहिक जन्मोत्सव
👉 कोप्पल - स्वच्छ भारत अभियान
👉 अहमदाबाद: अणुव्रत समिति द्वारा "विधार्थी जीवन और चरित्र निर्माण" में अणुव्रत की भुमीका पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन..
प्रस्तुति: 🌻तेरापंथ *संघ संवाद*🌻

News in Hindi

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जैनधर्म की श्वेतांबर और दिगंबर परंपरा के आचार्यों का जीवन वृत्त शासन श्री साध्वी श्री संघमित्रा जी की कृति।

📙 *जैन धर्म के प्रभावक आचार्य'* 📙

📝 *श्रंखला -- 236* 📝

*संस्कृत-सरोज-सरोवर आचार्य समन्तभद्र*

*साहित्य*

आचार्य समन्तभद्र में प्रखर प्रतिभा का विकास था। उनकी कवित्व-शक्ति विलक्षण थी। वे आद्य स्तुतिकार थे। जैन स्तोत्रों की रचना पहले प्राकृत में हुई, उसके बाद संस्कृत स्तोत्रों का विकास हुआ। संस्कृत में सबसे प्राचीन स्तोत्र आचार्य समन्तभद्र के हैं।

देवागम स्तोत्र, स्वयंभू स्तोत्र, युक्त्यनुशासन, जिन-स्तुति-शतक ये स्तोत्र आचार्य समन्तभद्र के उच्चकोटि के काव्य ग्रंथ हैं। प्रत्येक स्तोत्र में आचार्य समन्तभद्र की अपूर्व जिनभक्ति एवं विलक्षण दार्शनिक प्रतिभा के दर्शन होते हैं।

आचार्य समंतभद्र बौद्ध, नैयायिक, सांख्य, वेदांत आदि विभिन्न दर्शनों के ज्ञाता थे। सभी दर्शनों की समीक्षा करते हुए उन्होंने उत्तम कोटि के साहित्य का सर्जन किया। उनके ग्रंथों का परिचय इस प्रकार है।

*आप्त-मीमांसा (देवागम स्तोत्र)* आचार्य समन्तभद्र कि यह प्रथम रचना है। कृति का प्रारंभ देवागम शब्द से हुआ है। इस कृति के 10 परिच्छेद और 114 कारिकाएं हैं। एकान्तवादी दृष्टिकोणों का समुचित निरसन और आप्त पुरुषों के आप्तत्व की सम्यक् मीमांसा की है, अतः इस कृति का दूसरा नाम आप्त-मीमांसा है। आचार्य समन्तभद्र पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने आप्त पुरुषों के आप्तत्व को भी तर्क के निष्कर्ष पर परख कर उसे मान्य किया है। यह ग्रंथ जैन दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। स्याद्वाद संबंधी विस्तृत विवेचन सर्वप्रथम इस ग्रंथ में हुआ है।

विद्वानों ने देवागम स्तोत्र को उच्चकोटि का ग्रंथ माना है। पांडव पुराण रचनाकार लिखते हैं भारत भूषण आचार्य समन्तभद्र ने देवागम स्तोत्र के द्वारा जिनेश्वर देव के सिद्धांतों को व्यक्त किया है।

आचार्य अकलंक ने इस ग्रंथ पर अष्टशती नामक भाष्य लिखा है। अष्टशती नाम से स्पष्ट है कि इस भाष्य में 800 पद्य हैं। अष्टशती भाष्य पर आचार्य विद्यानंद ने आठ हजार पद्यों में 'अष्ट सहस्री' नामक विशाल टीका लिखी है। इस टीका को 'आप्त मीमांसालंकृति' एवं 'देवागमालंकृति' संज्ञा से भी पहचाना गया है। यह टीका अतीव महत्त्वपूर्ण है। इस टीका में अष्टशती भाष्य पूर्णतः समाहित हो गया है। अष्टसहस्री टीका के माध्यम से ही अष्टशती भाष्य के गंभीर रहस्यों को सम्यक् प्रकार से समझा जा सकता है।

उपाध्याय यशोविजयजी ने अष्ट सहस्री पर संस्कृत टीका और वसुनंदी ने संक्षिप्त देवागम कृति की रचना की है। पंडित जयचंदजी छाबड़ा (जयपुर) की एक हिंदी टीका भी प्रकाशित है।

*आचार्य समन्तभद्र की रचना स्वयंभू स्तोत्र* के बारे में जानेंगे... हमारी अगली पोस्ट में... क्रमशः...

प्रस्तुति --🌻तेरापंथ *संघ संवाद*🌻
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त्याग, बलिदान, सेवा और समर्पण भाव के उत्तम उदाहरण तेरापंथ धर्मसंघ के श्रावकों का जीवनवृत्त शासन गौरव मुनि श्री बुद्धमलजी की कृति।

📙 *'नींव के पत्थर'* 📙

📝 *श्रंखला -- 60* 📝

*मायाचंदजी तलेसरा*

मायाचंदजी तलेसरा नाथद्वारा के निवासी थे। श्रद्धा में बड़े पक्के थे। उनकी कपड़े की दुकान काफी अच्छी चलती थी। अतः वे अर्थ की दृष्टि से अच्छे संपन्न व्यक्ति थे। पात्र-दान की भावना बहुत तीव्र रहा करती थी। शासन के हित को ही अपना हित समझ कर चलने वाले व्यक्तियों में वे अग्रणी थे। वे आचार्य भारमलजी तथा ऋषिराय के शासन काल के श्रावक थे।

एक बार आचार्य भारमलजी 'सेलानला' के गांवों में विहार कर रहे थे। वे रावलिया और गोगुंदा की तरफ पधारे तब तक काफी संत, सतियां दर्शनार्थ एकत्रित हो गए थे। मुनि हेमराजजी दर्शन करने के निमित्त उधर ही जा रहे थे। नाथद्वारा उनके मार्ग में पड़ता था। मायाचंदजी ने पहले से ही एक योजना अपने मन में बना रखी थी। परंतु उसकी पूर्ति तभी संभव थी जब कोई सिंघाड़ा नाथद्वारा के मार्ग से आचार्यश्री के दर्शन करने को जाए। मुनि हेमराजजी जब वहां पहुंचे तो मायाचंदजी को अपनी योजना को कार्य रूप देने का अवसर प्राप्त हुआ।

उन्होंने मुनिश्री को प्रार्थना करते हुए कहा— 'आप इस समय आचार्यश्री के पास जा रहे हैं। वहां साधु-साध्वियों के काफी ठाणे एकत्रित हैं। अतः कपड़े की खपत सहज ही हो जाएगी। इस समय मेरी दुकान पर काफी कपड़ा आया हुआ है। यदि आप थोड़ी सी कृपा कर दें तो मेरी भावना सफल हो जाए।'

मुनि हेमराजजी ने कुछ सोचते हुए कहा— 'तुम्हारा कथन तो ठीक है। कपड़ा वहां खप सकता है और तुम्हें दान का अवसर मिल सकता है, परंतु इसमें एक कठिनाई है। तुम जानते हो कि आजकल मार्ग में लूटपाट का कितना भय रहता है। हम यहां से नया कपड़ा लेकर जाएं और मार्ग में कहीं लुटेरे मिल जाएं तो कपड़ा तो जाए ही साथ में पुस्तकों के जाने का भी संकट उत्पन्न हो जाए। हम यह खतरा उठाना नहीं चाहते।'

मायाचंदजी ने दृढ़तापूर्वक कहा— 'आप कपड़ा लीजिए तो सही। मैं मार्ग में प्रारंभ से अंत तक आपकी सेवा में रहूंगा। यदि आपका एक तार भी डाकू ले जाए तो मुझे घर में रहकर चारों आहार भोगने का त्याग है।'

मुनि हेमराजजी ने उनकी भावना को देखा और दृढ़ता को भी। वे आश्चर्यान्वित भी हुए और प्रसन्न ने भी। उन्होंने यथावसर उनके वहां से कपड़ा लिया और अगले ही दिन आचार्यश्री की ओर विहार कर दिया।

मायाचंदजी खतरे के विरुद्ध पूरी व्यवस्था करके सेवा में साथ-साथ गए। आचार्यश्री गोगुंदा में विराजमान थे। वहां मायाचंदजी के संबंधियों के घर थे। कुछ दिन पूर्व वे वहां जा भी चुके थे। इतना शीघ्र वहां दोबारा जाना संबंधों की दृष्टि से यद्यपि ठीक नहीं समझा जाता था, परंतु सेवा के निमित्त वहां जाने में उन्होंने कोई संकोच नहीं किया।

मुनि हेमराजजी ने आचार्य भारमलजी के दर्शन किए और याचित वस्त्र उनके चरणों में समर्पित करते हुए मायाचंदजी की सारी बात भी निवेदित की। आचार्यश्री उनकी इस सेवावृत्ति पर तथा साधुओं के प्रति विनय भावना पर बहुत प्रसन्न हुए।

*मालव (मध्यप्रदेश) के प्रथम तेरापंथी श्रावक विजयरामजी अग्रवाल के प्रेरणादायी जीवन-वृत्त* के बारे में जानेंगे और प्रेरणा पाएंगे... हमारी अगली पोस्ट में... क्रमशः...

प्रस्तुति --🌻तेरापंथ *संघ संवाद*🌻
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Video

*आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी* द्वारा प्रदत प्रवचन का विडियो:

👉 *खुद सुने व अन्यों को सुनायें*

*- Preksha Foundation*
Helpline No. 8233344482

संप्रेषक: 🌻 तेरापंथ *संघ संवाद* 🌻

👉 प्रेक्षा ध्यान के रहस्य - आचार्य महाप्रज्ञ

प्रकाशक - प्रेक्षा फाउंडेसन

📝 धर्म संघ की तटस्थ एवं सटीक जानकारी आप तक पहुंचाए
🌻 तेरापंथ *संघ संवाद* 🌻

👉 *"अहिंसा यात्रा"* के बढ़ते कदम

👉 पूज्यप्रवर अपनी धवल सेना के साथ विहार करके "भुवनेश्वर" पधारेंगे

प्रस्तुति - तेरापंथ *संघ संवाद*

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