02.10.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 02.10.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
विश्वशांति के लिए शांतिदूत ने दिया अहिंसा की साधना का संदेश

 

  • -आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में आयोजित हुए विभिन्न कार्य
  • -आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को दिखाया मुक्ति का मार्ग
  • -अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस, अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का समापन, ज्ञानशाला रजत जयंती वर्ष का समापन समारोह जैसे कार्यक्रम आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में हुए समायोजित
  • -आचार्यश्री ने भावी पीढ़ी की निर्माण में सहायक ज्ञानशाला को अपने आशीर्वचनों से किया आच्छादित

02.10.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

जन-जन में अहिंसा की चेतना को जागृत करने और विश्वकल्याण के उद्देश्यों को लेकर अहिंसा यात्रा के साथ निरंतर गतिमान अहिंसा के साधक, मानवता के मसीहा, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने सोमवार को अध्यात्म समवसरण से अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर विश्वशांति के लिए अहिंसा का पथ अपनाने का प्रयास करने की पावन प्रेरणा के साथ अहिंसा की साधना का मार्ग प्रशस्त किया और इसके माध्यम से लोगों को मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ने की भी पावन प्रेरणा प्रदान की। साथ ही आचार्यश्री ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतिम दिवस अहिंसा दिवस, ज्ञानशाला रजत जयंती समापन समारोह पर भी आचार्यश्री ने अपनी पावन प्रेरणा प्रदान की और सभी को अपने मंगल आशीर्वचनों से अभिसिंचत किया।

    सोमवार को सर्वप्रथम आचार्यश्री ने अपनी मंगल सन्निधि में उपस्थित श्रद्धालुओं को आगमाधारित वाणी के आधार पर पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए लोगों को क्षांति, मुक्ति, आर्जव व मार्दव की साधना कर मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने कहा कि इनमें से यदि किसी एक की साधना भी आदमी कर सकता है तो मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।

    इसके उपरान्त आचार्यश्री ने अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस और अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतिम दिवस ‘अहिंसा दिवस’ पर लोगों को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अहिंसा सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारी होती है। आदमी अहिंसा के मार्ग पर चलने का प्रयास करे और क्षांति, मुक्ति, आर्जव-मार्दव आदि के द्वारा भी शांति की प्राप्ति कर सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि प्रत्येक आदमी में हृदय में अहिंसा की चेतना जागृत हो जाए, तो विश्व में शांति आ सकती है। आचार्यश्री ने कहा कि यह महात्मा गांधी से जुड़ा हुआ दिवस है। परिवार, समाज, राष्ट्र में भी शांति रहे तो यह अच्छा हो सकता है। एक देश का दूसरे देश के साथ मैत्री का भाव, शांति का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। अणुव्रत अच्छी चीज है, इसका प्रत्येक जगह आयोजन हो और अहिंसा की ज्योति को प्रज्जवलित करने का प्रयास करना चाहिए।

    जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के तत्त्वावधान में विगत वर्ष से ज्ञानशाला रजत जयंती वर्ष मनाने के बाद आज पूज्य सन्निधि में समापन के अवसर पर आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ज्ञानशाला महासभा की एक सुन्दरतम गतिविधि है और बहुत उपयोगी है। एक नई पौध को सिंचन देने वाली प्रवृत्ति है। एक समाज के लिए और आगे आने वाली युवा पीढ़ी के मूल को अभिसिंचन के प्रयास किया जा रहा है। बच्चों में संस्कार है तो युवक भी संस्कारवान बन सकें और समाज भी संस्कारवान बन सकता है अन्यथा समाज, युवा सभी संस्कारहीन हो सकते हैं। आचार्यश्री ने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि जहां ज्ञानशालाएं नहीं खुली हैं और आवश्यकता हो तो वहां ज्ञानशाला की स्थापना करने, जहां हो, वहां बच्चों की संख्या वृद्धि करने का भी प्रयास करना चाहिए। संख्या के साथ गुणवत्ता भी बने तो एक भावी सुसंस्कारी पीढ़ी तैयार की जा सकती है। यह रजत जयंती वर्ष एक अच्छी प्रेरणा देने वाला बने, यह अभिलषणीय है। इसके उपरान्त कोलकाता ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं ने गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के राष्ट्रीय संयोजक श्री सोहनलाल चोपड़ा ने ज्ञानशाला की पूरी रिपोर्ट की प्रस्तुति दी तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री किशनलाल डागलिया ने भी अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। इस अवसर पर ‘ज्ञानशाला संदीपन’ नाम एक पुस्तक को भी महासभा अध्यक्ष, ज्ञानशाला के राष्ट्रीय संयोजक व पुस्तक की संपादिका श्रीमती सरोज छाजेड़ आदि ने आचार्यश्री के समक्ष अर्पित किया।

English [Google Translate]

Non-violence travel press release
Message of sadhana of nonviolence given by the pacifist for world peace

  • Various works organized by Acharyashri's Mangal Sannidhi
  • Acharyashree showed pilgrims the path of salvation
  • International Nonviolence Day, concluding the Annual Enlightenment Week, concluding ceremony of the Gyanshala Silver Jubilee year, such as Adarshree's Mangal Sannidhi Adjusted
  • Acharyashree undertook auxiliary workshop in the formation of future generations with their blessings

02.10.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

To awaken the consciousness of non-violence in the masses and to promote the mission of the cause of worldly welfare, non-violence non-violence seekers, humanity's messiah, peacemaker Acharyashri Mahasramanji on Monday adopted the path of non-violence for world peace on International Nonviolence Day With the strong motivation to try, the path of sadhana of non-violence has led to the people through it He also gave inspiration to move forward in the direction of enlightenment. At the same time Acharyashri gave his inspiration on the last day of Non-Vocal Enlightenment Week, Gyanshala Silver Jubilee celebration ceremony, and conveyed it to all of its Mars blessings.

On Monday, Acharyashree gave inspiration to the devotees present in their mangal sannidhi on the basis of an amplified voice, by encouraging people to do sadhana, liberation, indignation and destiny, and try to move forward in the direction of liberation. Acharyashree said that if one of them can do the sadhana of any of these, then the person can move on the path of liberation.

After this, Acharyashree gave inspiration to the people on the last day of 'Non-Violence Day' and 'Non-violence Day' on the Non-Vocal Enlightenment Week, saying that non-violence is beneficial for all creatures. The man can strive to follow the path of non-violence and achieve peace by means of time, liberation, compassion, etc. Acharyashree said that in every person the consciousness of non-violence awakens in the heart, then peace in the world can come. Acharyashree said that this is a day associated with Mahatma Gandhi. It can be good if there is peace in the family, society and nation too. A country should try to keep a sense of friendship, a feeling of peace with another country. Anabrata is good thing, it should be organized everywhere and try to shine the light of non-violence.

After commemorating Gyanshala Silver Jubilee Year from the last year under the auspices of Jain Shvetambar teerapanthi Mahasabha, the acharyashree gave holy inspiration on the occasion of completion of Pujya Sananidhi, said that the GyanShala is a beautiful activity of the General Assembly and is very useful. There is a tendency to irrigate a new plant. Attempts are being made for a society and for the next generation of the younger generation. If there is a ritual in the children then the youth can become sanskaran and society can also become sanskaran, otherwise the society, the youth can all be devoid of devotion. Acharyashree gave inspiration and said that wherever there is no open school of knowledge and should be required, there should be efforts to increase the number of children in the establishment of GyanShala wherever it is, wherever there is a need. If the quality becomes even with numbers then a future cultured generation can be prepared. This Silver Jubilee year became a good inspiration, it is worth mentioning. Subsequently, the teachers of Kolkata GyanShala composed the song. The National Convenor of GyanShala, Mr. Sohanlal Chopra presented the full report of GyanShala and Mr. Kishanlal Daglia, President of Jain Shvetambar Thrapanthi Mahasabha also gave expression to his views. On this occasion, a book titled 'Gyanoshala Sandeepan' was also presented to Aacharyashree by the General Secretary, National Convenor of GyanShala and editor of the book, Mrs. Saroj Chhejed, etc..

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