18.09.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 18.09.2017
Updated on: 15.11.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
जहां ऋजुता वहां संपदा, जहां माया वहां विपदा: आचार्यश्री महाश्रमण
-आचार्यश्री ने ‘तेरापंथ प्रबोध’ का भी सरसशैली में किया वाचन, आचार्य भिक्षु के मोक्ष तैयारी का किया वर्णन
-कीर्तिधर पुरुष आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में बालयोगी ने 15 की तपस्या कर रचा नव कीर्तिमान
-अल्पायु में ऐसी कठोर तपस्या करने वाले प्रथम संत, आचार्यश्री ने शुभाशीष के साथ कराया प्रत्याख्यान
-अभातेयुप के वार्षिक अधिवेशन का अंतिम दिन, 18वें अध्यक्ष बने विमल कटारिया
-निवर्तमान अध्यक्ष ने दिलाया शपथ, वर्तमान अध्यक्ष ने आशीष प्राप्त कर अपनी नई टीम की घोषित
-आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में प्रदान किए गए विभिन्न सम्मान व पुरस्कार

18.09.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

मानवता का कल्याण करने, और जन-जन को मानवीय मूल्यों के सजग करने को निकले भगवान महावीर के प्रतिनिधि अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने सोमवार को अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं व युवकों को कटुता, वक्रा को छोड़ अपने आपको ऋजु बनाने की पावन प्रेरणा प्रदान की। वहीं महातपस्वी की मंगल सन्निधि में उनके एक बालयोगी संत मुनि प्रिंस कुमारजी ने तेरापंथ धर्मसंघ में नव इतिहास का सृजन करते हुए अल्पायु में 15 की तपस्या करने वाले प्रथम संत के रूप में स्थापित हुए। स्वयं कीर्तिधर पुरुष बन चुके आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य ने जब अपने आराध्य से अपनी तपस्या का प्रत्याख्यान किया तो पूरा परिसर बुलंद जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री ने शुभाशीषों व मंगल मंत्रोच्चार से नवीन ऊर्जा प्रदान कर बालयोगी को तपस्या का प्रत्याख्यान कराया। वहीं दूसरी अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के त्रिदिवसीय 51वें वार्षिक अधिवेशन का समापन का भी क्रम रहा। जिसमें इस संगठन के सत्र 2017-19 तक के लिए नवनिर्वाचित अध्यक्ष के रूप में श्री विमल कटारिया को घोषित किया गया। उन्हें निवर्तमान अध्यक्ष श्री बी.सी. भलावत ने शपथ दिलाई। इस मौके पर दोनों ने अपने हृदयोद्गार भी व्यक्त किए। साथ ही नए अध्यक्ष ने अपनी पूरी नई टीम के सदस्यों के नामों की घोषणा की व विभिन्न संस्थाओं व सभाओं को आचार्यश्री के समक्ष सम्मानित और पुरस्कृत किया गया।

    सोमवार को आचार्यश्री ने अध्यात्म समवसरण से लोगों को ऋजु बनने की पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि कुछ लोग ऋजु लगते हैं और होते भी हैं। कुछ लोग देखने में वक्र किन्तु भीतर से ऋजु होते हैं। कुछ लोग देखने में ऋजु, किन्तु भीतर से वक्र होते हैं और कुछ देखने में भी वक्र तथा भीतर से भी वक्र होते हैं। आदमी को वक्रता को छोड़ ऋजु बनने का प्रयास करना चाहिए। सच्चाई व ईमानदारी की साधना ऋजुता के बिना पूर्ण नहीं हो सकती। जहां ऋजुता होती है वहां संपदा और जहां वक्रता, कुटिलता वहां विपदा होती है। इसलिए आदमी अपने जीवन में ऋजु बनने का प्रयास कर अपनी आत्मा के कल्याण का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त ‘तेरापंथ प्रबोध’ का भी सरसशैली में वाचन कर आचार्य भिक्षु के अंतिम पलों का सजीव वर्णन किया।

    नित नए कीर्तिमानों की स्थापना करने वाले आचार्यश्री की मंगल सन्निधि और निश्रा प्राप्त बालयोगी मुनि प्रिंसकुमारजी ने अपने आराध्य के समक्ष जब लगभग तेरह वर्ष की अल्पायु में 15 की तपस्या का प्रत्याख्यान लेने पहुंचे तो यह भी तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास के रूप में जुड़ गया। क्योंकि आज से पहले इस अल्पायु में इतना कठोर तप करने वाले कोई भी आचार्य या संत नहीं हैं। आचार्यश्री ने अपने बालयोगी को अभिमंत्रों और आशीष से आच्छादित करते हुए तपस्या का प्रत्याख्यान कराया।

    वहीं आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अभातेयुप के 51वें वार्षिक अधिवेशन के अंतिम दिन आचार्यश्री ने नए अध्यक्ष श्री विमल कटारिया व उनकी पूरी टीम को मंगलपाठ सुनाते हुए अच्छे कार्य करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। अभातेयुप के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेशकुमारजी ने भी आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

English [Google Translate]

Non-violence travel press release
Where Rijuta is an estate, where Maya is suffering there: Acharyashree Mahasaman

  • Acharyashree also read 'Terapanth Prabodh' in Sarasashail, reading of Acharya Bhikshu's salvation preparation
  • Byayogi made a 15-year-old new record in the proximity of Acharyashree Mahasramanji
  • Akaryaree, the first saint to perform such harsh austerities in Alpayu, has made reproach with Shubhishish
  • The last day of the Annual Convention of the Annual Conference, became the 18th President, Vimal Kataria
  • The current chairman sworn in, the current chairman announced his new team by receiving the blessing
  • Various honors and awards conferred in Acharya Shri's Mangal Sananidhi


18.09.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

Acharyashri Mahasraman, the master of God Mahavir, who came to seek the welfare of humanity, and to alert the masses to human values, Acharyashree Mahasramanji, on the eve of spiritual inspiration of devotion and devotion to the devotees and youth present in spirituality, gave. On the other hand, Munshi Prince Kumarji, one of his childhood saints in Mangal Sananidhi, was established as the first saint who performed austerity of 15 in the short life while creating a new history in the Teerapanth Dharma Sangh. When the well-wisher of Acharyashri Mahasramanji became a self-proclaimed man, when he rejected his penance from his adoration, then the entire campus became resonant with glorious acclamations. Acharyashri made a declaration of Balasayogya of penance by providing new energy from Shubhishishas and Mangal Mantras. At the same time, there was also a closing ceremony of the 51st Annual Convention of the Third All India Trophy Youth Council. In which Mr. Vimal Kataria was announced as the newly elected President for this organization's session 2017-19. He was elected outgoing President Mr. B.C. Bhalawat swore. On this occasion both of them expressed their heartbeat too. At the same time the new chairman announced the names of the members of his whole new team and various institutions and meetings were honored and rewarded before the Acharyashree.

    On Monday, Acharyashri gave inspiration to people to become a Riju with spirituality, saying that some people seem to be sedentary and are also present. Some people see the curve but the ridge is from within. Some people see Riju, but they are curved from within and curves are also seen in the curve, and also curve from within. The man should try to become curdled and become a ridge. Sadhana of truth and honesty can not be fulfilled without rigidity. Where there is a rigidity, there is wealth and where there is curvature, mischief there. Therefore, one should try to welfare the soul by trying to become a Riju in his life. Acharyashri also after reading the Mangal discourse, also read 'Terapanth Prabodh' in Sarasashaly and gave a detailed description of the last moments of Acharya Bhikshu.

    Mangal Sannidhi of Acharyashri, who founded the new records, and the Balayogi Muni Prinskumarji received Nishra, when he came to take the rejection of asceticism of 15th in the short life of thirteen years, it was also added to the history of the Tharpanth Dharma Sangh. Because before today, there is no teacher or saint who has done such a harsh penance in this short life. Acharyashri made repetition of penance while covering his childhood with instruments and blessings.

    On the last day of the 51st Annual Convention of Acharyashree in Mangal Sananidhi, Acharyashri gave a new inspiration to the new president, Mr. Vimal Kataria and his entire team as well as to give good inspiration for doing good work while reciting Mangal Tath. Muni Yogeshkumarji, spiritual observer of non-Acharyayupa also gave his brother-in-law to Acharyashree.

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