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19.01.2022: Acharya Mahashraman

Published: 19.01.2022

Posted on 19.01.2022 15:38

🌸 दो दर्जन से अधिक संस्थाओं ने किया महातपस्वी महाश्रमण का महाभिनन्दन 🌸

-नगरपालिका मण्डल की ओर से आयोजित हुआ शांतिदूत का अभिनन्दन समारोह

-लाडनूं विधायक सहित विभिन्न संगठन व जनप्रतिनिधि श्रीचरणों में हुए उपस्थित

-लाडनूं में सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की चेतना का हो जागरण: आचार्य महाश्रमण

19.01.2022, बुधवार, लाडनूं, नागौर (राजस्थान)
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की राजधानी लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती के नवनिर्मित भवन ‘महाश्रमण विहार’ में प्रवास कर रहे तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी का लाडनूं नगरपालिका मण्डल की ओर से आयोजित नागरिक अभिनन्दन समारोह में नगरपालिका मण्डल सहित लाडनूं की दर्जन भर से अधिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा अभिनन्दन समारोह समायोजित किया गया। जिसमें सभी संगठनों व संस्थाओं के उपस्थित पदाधिकारियों द्वारा पूज्यचरणों में अपने-अपने अभिनंदन पत्र समर्पित कर महातपस्वी महाश्रमण का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इतने संगठनों व संस्थाओं द्वारा एक साथ अभिनन्दन पत्र श्रीचरणों में समर्पण का नवीन उपक्रम श्रद्धालुओं को अभिभूत कर रहा था। इस दौरान लाडनूं के वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक भी पूज्य सन्निधि में उपस्थित होकर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री ने लाडनूं नगर की जनता में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की चेतना पुष्ट होने तथा अध्यात्मिकता और धार्मिकता का विकास करने का मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। आचार्यश्री के श्रीमुख से आशीष प्राप्त कर जन-जन का मन उल्लसित, उत्साहित और उत्फुल्ल बना हुआ था।

बुधवार को नित्य की भांति ऑनलाइन रूप से आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आदमी यदि सोचे कि वह कौन है तो उत्तर होगा कि वह आत्मा है। यह शरीर तो अजीव है। आत्मा को न देखा जा सकता है, नही स्पर्श किया जा सकता है, न ही उसे चखा जा सकता है। आत्मा को छेदा नहीं जा सकता, काटा भी नहीं जा सकता, न ही गीला किया जा सकता है और न ही सुखाया जा सकता है। आत्मा अमूर्त है। आत्मा और शरीर का संयोग कराने वाला तत्त्व बंध कहलाता है। बंध पाप कर्मों का होता है और पुण्य कर्मों का भी होता है। आश्रव के द्वारा कर्मों का बंध होता है, जिसके कारण आत्मा और शरीर का संयोग होता है। आश्रव से छुटकारा पाने के लिए आदमी को संवर की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। संवर की साधना होने से पाप अथवा पुण्य कर्मों का बंध नहीं होगा तथा पूर्व बंधे हुए कर्मों को तोड़ने के लिए निर्जरा का प्रयोग तो आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। कर्ममुक्त आत्मा मोक्ष का वरण करती है। इस प्रकार जीव, अजीव, पुण्य-पाप, आश्रव, संवर, निर्जरा, बंध और मोक्ष इन नौ तत्त्वों का वर्णन जैनागमों में किया गया है। इनके माध्यम से आदमी को सम्यक्त्व की प्राप्ति हो सकती है। सम्यक्त्व से बड़ा कोई रत्न नहीं, मित्र, भाई और बंधु नहीं होता। इस प्रकार आदमी को सम्यक्त्व की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

साध्वी सुप्रभाजी, साध्वी प्रशमरतिजी, साध्वी विशदप्रज्ञाजी, साध्वी संघप्रभाजी द्वारा गीत का संगान कर अपने आराध्य की अभिवंदना की गई। साध्वी पुण्ययशाजी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। इसके उपरान्त आरम्भ हुआ लाडनूं नगरपालिका मण्डल द्वारा आयोजित महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी के नागरिक अभिनन्दन समारोह का कार्यक्रम। इसमें सर्व प्रथम प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री शांतिलाल बरमेचा, उपाध्यक्ष श्री राजेश दुगड़, श्रीमती सुशीला बोकड़िया, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री शांतिलाल बैद, तेयुप के कोषाध्यक्ष श्री सुमित मोदी, टीपीएफ के पूर्व ट्रस्टी श्री मन्नालाल बैद, दिगम्बर जैन समाज के श्री चांदकपूर सेठी, श्री ओसवाल पंचायत के सरपंच श्री नरेन्द्रसिंह भूतोड़िया, श्री राजेश विद्रोही तथा शहर काजी मोहम्मद मदनी ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। नगरपालिका लाडनूं के उपाध्यक्ष श्री मुकेश खिंची ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया।

लाडनूं के वर्तमान विधायक श्री मुकेश भाकर ने आचार्यश्री की अभिवंदना करते हुए कहा कि मैं परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी का अपने क्षेत्र में हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं आपश्री के दर्शन का सुअवसर प्राप्त कर अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं। आज से मैं रोज आपश्री के दर्शन के लिए उपस्थित हो जाऊंगा। तत्पश्चात् अभिनन्दन पत्र सौंपने का क्रम प्रारम्भ हुआ। इस क्रम में श्री ओसवाल पंचायत, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, युवक परिषद, सकल दिगम्बर जैन समाज, भारत विकास परिषद, लाडनूं चेम्बर ऑफ कॉमर्स, श्रीरामानंद गोशाला, महाराणा प्रताप फाउण्डेशन, जाट महासभा, सैनिक क्षत्रिय सभा संस्थान, मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज सेवा समिति, राजस्थान शिक्षक संघ, विप्र फाउण्डेशन, आवामी इत्तेहाद मजलिश, नूर फाउण्डेशन, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिषद, अग्रवाल सभा, बार संघ, प्रजापति समाज सेवा समिति, विश्व हिन्दू परिषद, सरपंच संघ, माहेश्वरी समाज, जांगिड़ विकास समिति, दुर्गा दल आदि संगठनों के पदाधिकारियों ने पृथक्-पृथक् अभिनन्दन पत्र पूज्यचरणों में समर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन श्री वीरेन्द्र भाटी ने किया। इस दौरान लाडनूं के पूर्व विधायक श्री मनोहर सिंह भी उपस्थित थे। इस प्रकार पूज्यचरणों अनेक संस्थाओं द्वारा अभिनंदन पत्र समर्पित करने का क्रम मानों महातपस्वी महाश्रमण के महाभिनंदन का द्योतक बन गया।

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