01.06.2020: STGJG Udaipur - Shraman Sagh Sadhvi Hemvati Left for Heavenly Abode

Published: 02.06.2021

Udaipur 1st June 2021. Sadhvi Hemvati, a 78-year-old disciple of Shramana federal saint Upadhyaya Pushkar Muni, merged with the five elements. She was cremated at Mokshadham in Ashoknagar. Sadhvi Hemvati died on Monday, 31/05/2021 night at 11 pm. On May 25, when she was infected with Corona, she had taken Sagari Santhara.

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Life Introduction

Born on 20 March 1943 in Nandeshma village of Udaipur district to Oswal family mother Virju Bai and father Hansraj Singhvi, Rukmani Bai (born name) took Jain initiation from Sadhvi Ratna Sajjankunwar on 11 June 1967 and became disciple of Sadhvi Pravatini Kaushalya Mansanki.

Sadhvi Hemvati had knowledge of Hindi, Marwari, Mewari languages. she also compiled the book Bhavna Anupurviye Bhaktamar Hindi.

Summarised and translated by Ratna Jain

News in Hindi

श्रमण संघीय साध्वी हेमवती की देह पंचतत्व में विलीन,  बिती रात्रि हुआ था निधन
कोरोना संक्रमित होने पर हॉस्पिटल में चल रहा था इलाज

उदयपुर 1 जून 2021। श्रमण संघीय संत उपाध्याय पुष्कर मुनि की 78 वर्षीय शिष्या साध्वी हेमवती  का आज अशोकनगर स्थित मोक्षधाम में अन्त्येष्टि की गई। साध्वी हेमवती का सोमवार रात्रि 11 बजे निधन हो गया था। कोरोना संक्रमित होने पर गत 25 मई को उन्होंने सागारी संथाराग्रहण किया था।
देवलोकगमन की सूचना मिलने पर उदयपुर सहित राजस्थान गंुजरात के सूरत सहित विभिन्न शहरों में निवासरत जैन समाज के अनुयायियों में शोक की लहर फैल गई। साध्वीश्री हेमवती विगत 30 वर्षों से शास्त्री सर्कल गुरु पुष्कर मार्ग स्थित श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय में में स्थिरवास थी।
ग्रन्थालय के उपाध्यक्ष गणेशलाल गोखरू ने बताया कि अन्त्येष्टि से पूर्व पार्थिव देह को कोरोना प्रोटोकॉल की पालना करते हुए शास्त्री सर्कल स्थित श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिसर लाया गयाए जहां मौजूद समाज सदस्यों और साध्वी के सांसारिक परिवार के सदस्य ने अंतिम दर्शन किए।
साध्वी के सांसारिक भाई भगवतीलाल सिंघवीए भतीजा महावीर कोठारीए ग्रंथालय के मंत्री वीरेंद्र डांगीए उपाध्यक्ष गणेशलाल गोखरूए एडवोकेट रोशनलाल जैनए दिनेश चोरडियाए लक्ष्मीलाल वीरवालए अनिल सिंयालए राजेंद्र खोखावत श्रीमती सूरजदेवी वीरवाल सहित समाजजन उपस्थित थे।
ज्ञातव्य हो कि साध्वी हेमवती पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थी। विगत 22 मई को कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर उन्हें उदयपुर शहर के ष्महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालयष् के कोरोना वार्ड में भर्ती करवाया गया था। श्री पुष्कर देवेन्द्र परिवार के संतों व ग्रंथालय के पदाधिकारियों तथा उनके सांसारिक परिजनों की सहमति पर 25 मई को दोपहर सवा 12बजे  पंजाब के मलोट में प्रवासरत राजस्थान प्रवर्तक डॉण् राजेंद्र मुनि जी मण्साण् ने दूरभाष पर सागारी संथारा का प्रत्याख्यान करवाया थाए जो कि अंतिम समय तक गतिमान था।
जीवन परिचय.
उदयपुर जिले के नांदेशमा गांव में 20 मार्च 1943 में ओसवाल परिवार माता विरजु बाई और पिता हंसराज सिंघवी के घर जन्मी रुक्मणी बाई ;जन्म नामद्ध ने 11 जून 1967 को साध्वी रत्न सज्जनकुंवर से जैन दीक्षा ग्रहण कर साध्वी उपप्रवतिनि कौशल्या मण्साण्की शिष्या बनी।
साध्वी हेमवती को हिन्दीए मारवाड़ीए मेवाड़ीए भाषाओं का ज्ञान था। भावना आनुपूर्वीए भक्तामर हिंदी पुस्तक का संकलन भी किया।
वर्चुअल हुई श्रद्धांजलि सभा.
उपाध्याय रमेश मुनिए महाश्रमण काव्यतीर्थ जिनेंद्र मुनिए राजस्थान प्रवर्तक डॉण् राजेंद्र मुनिए श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनिए तपस्वी उपप्रवर्तक नरेश मुनिए उपप्रवर्तिनी साध्वी चंदनबालाए महासाध्वी प्रियदर्शनाए उपप्रवर्तिनी साध्वी चारित्रप्रभाए साध्वी सत्यप्रभाए उपप्रवर्तिनी साध्वी डॉण् दिव्यप्रभाए साध्वी संयमप्रभाए साध्वी मंगलज्योतिए साध्वी डॉण् दर्शनप्रभाए साध्वी डॉण् हर्षप्रभाए साध्वी डॉण् सुलक्षनप्रभाए साध्वी शुभजीए साध्वी डॉण् प्रतिभा . रुचिका . आभाश्री . सुप्रभा सहित अनेक साधु.साध्वियो वर्चुअल ऑनलाइन के माध्यम से श्रद्धांजलि सभा कर सभी ने साध्वी हेमवती को  स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ. उदयपुरए श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालयए देवेन्द्र धामए श्री अमर जैन साहित्य संस्थानए गुरु पुष्कर ध्यान केंद्रए श्री महावीर अमर स्वाध्याय भवनए गुरु पुष्कर साधना केन्द्रए श्री गुरु पुष्कर नवकार तीर्थ भवनए साध्वी कुसुमवती चेरीटेबल ट्रस्टए श्री तारक गुरु जैन मित्र मंडलए महासती सोहनकुंवर महिला मंडलए जैनाचार्य श्री देवेन्द्र महिला संस्थानए जैन काफेंस राजस्थान शाखा के सदस्यों ने भी साध्वी को श्रद्धांजलि दी।
Sources
Shri Tarak Guru Jain Granthalaya Udaipur
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