01.02.2013 ►Asadha ►Knowledge and Faith are Necessary in Shrawak◄ Acharya Mahashraman

Published: 01.02.2013
Updated: 08.09.2015

ShortNews in English

Asadha: 01.02.2013

Acharya Mahashraman inspired Shrawak to gain knowledge and keep deep faith as both are necessary. Nine Tatva are good concept of Jainism. Shrawak should pay attention for regular Sadhana.

News in Hindi

श्रावक में श्रद्धा व ज्ञान जरूरी'





बालोतरा 01 फरवरी 2013 जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
आचार्य महाश्रमण ने असाडा में धर्मसभा के दौरान उपस्थित श्रावक-श्रावकों को दायित्व विषय पर प्रेरणा देते हुए बताया कि श्रावक का पहला दायित्व यह है कि वह अपनी साधना का विकास करे व साधना के प्रति जागरूक रहे। उन्होंने कहा कि श्रावक को तत्व का ज्ञान होना चाहिए। नौ तत्व जैन का बहुत महत्वपूर्ण कंसेप्ट है। नव तत्व में सारा सार आ जाता है। श्रावक में श्रद्धा व ज्ञान होना चाहिए। श्रद्धा ज्ञान से जुड़े रहना चाहिए व साथ में विवेक भी होना चाहिए। श्रावक में त्याग-प्रत्याख्यान की क्रिया होनी चाहिए। इससे साधना का क्रम ठीक रहता है। साधना जीवन की बड़ी संपदा है। साधना से यहां भी फायदा है और आगे भी फायदा। उन्होंने श्रावक के दूसरे दायित्व के बारे में बताया कि वह साधु-साध्वियों की सेवा करें। श्रावक श्रमणोपासक बनें। साधु-साध्वी गांव में है तो गोचरी की उपलब्धता का ध्यान रखें। श्रावक का तीसरा व अंतिम कर्तव्य है कि वह सधार्मिक वत्सलता रखे। एक गुरु को मानने वाले को श्रद्धा व साधना की प्रेरणा दें। संसार में लौकिक संदर्भों में ध्यान दिया जा सकता है, अध्यात्म में सहयोग करें। पूज्यवर ने कहा कि श्रावक अपनी साधना का विकास करें। देव, गुरू व धर्म के प्रति श्रद्धा व समर्पण रखे। उनके निर्देश के प्रति समर्पण का भाव रखना भी साधना का एक बिंदु है।

असाडा में धर्मसभा को संबोधित करते आचार्य।

Sources

ShortNews in English:
Sushil Bafana

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