Paryushan and Samvatsari Festival

Published: 16.09.2021
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Jalgaon 12.09.2021:

Upasak Suryaprakash Samsukha guided layperson of Jalgaon for Paryushan and Samvatsari Sadhana.

*पर्युषण महापर्वाराधना उत्साह से  संपन्न*  

जलगांव- जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले पर्युषण पर्व की आराधना उपासक श्रेणी के मुख्य  संयोजक श्री सूर्यप्रकाश सामसुखा व सहयोगी उपासक श्री पंकज गुलगुलिया की उपस्थिति में अणुव्रत भवन प्रांगण में संपन्न हुई। 

मुख्यसंयोजक उपासक जी ने पर्यूषण पर्व के धर्माराधना में भगवान महावीर की जीवन गाथा का विवेचन कर आठ दिवसीय कार्यक्रम में खाद्य संयम दिवस पर  खाने-पीने का संयम कर कर्म निर्जरा का मर्म समझाया।  

स्वाध्याय दिवस पर ज्ञान की ज्योति को  समयानियोजन करके  वाचना, प्रतिप्रश्ना, परिवर्तना, अनुप्रेक्षा व धर्मचर्चा कर निरंतर प्रज्वलित रखने की प्रेरणा दी ।

सामायिक दिवस पर समायिक का अर्थ सहित व्याख्या देकर संवर-निर्जरा के लाभ के साथ साथ मनुष्य को हर परिस्थिति में सम रहकर समता की साधना के विकास की प्रेरणा दी।

वाणी संयम पर वाणी के विवेक का मूल्य समझाया। अणुव्रत चेतना दिवस पर अणुव्रत आचार संहिता के नियमों का वाचन किया। गणाधिपति पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी द्वारा दिये गये  *अणुव्रत* अवदान का जीवन जीने की शैली में उपयोगिता को और साथ ही श्रावक के बारह व्रतों को सरलता  से समझाकर  बारह व्रती श्रावक बनने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया । जप दिवस पर व्याख्या दी कि प्रत्येक अक्षर मे मंत्र बनने की क्षमता और अक्षरों का सम्यक संयोजन ही मंत्र है, और साथ ही इस विशेष मंत्र का  जप होने से होने वाले आध्यात्मिक लाभ के बारे में समझाया ।  

ध्यान दिवस पर विकेंद्रित विचारो को केंद्रित कर निर्विचार अंतर्यात्रा ही ध्यान है । आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा दिये गये अवदान *प्रेक्षा-ध्यान* का निरंतर प्रयोग करके मनुष्य अपने जीवन में शांति का विकास कैसे कर सकता है इसकी प्रेरणा दी। अंतिम दिवस संवत्सरी महापर्व पर सभी को चौविहार उपवास सहित अष्टप्रहरी पौषध करने के लिए जागरूक किया। क्षमायाचना दिवस पर विगत वर्ष में मन वचन काया द्वारा, जाने-अनजाने हुई भूलों की  शुद्ध अंत:करण से  प्राणी मात्र से क्षमायाचना का मुल्य समझा कर आत्मशुदि के महत्व को बताया । नन्हें नन्हें बालको ने भी उपवास व प्रवचन श्रवण का लाभ लिया । साथ ही इन नॊ दिनो में तेरापंथ के शिल्पकार आचार्य भिक्षु के साथ साथ अन्य आचार्यों की धर्मक्रांति का ऒर आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित श्रावक संबोध का अर्थ सहित वाचन भी किया । धर्म जागरणा करके जलगांव के संपूर्ण तेरापंथी श्रावक श्राविकाओ के लिए  पर्युषण पर्वाराधना को अविस्मर्णीय बना दिया । सात दिन अखंड नवकार महामंत्र का जप भी उल्लेखनीय रहा। क्षमायाचना दिवस पर परमश्रद्धेय गुरुदेव एवं समस्त चरित्र आत्माओं से क्षमा याचना कर सभी श्रावक-श्राविका समाज ने भी एक दूसरे से खमत खावना किया, साथ ही साथ तेरापंथी सभा के अध्यक्ष माणकचंदजी बैद, तेयुप अध्यक्ष रितेश छाजेड, महिला मंडल अध्यक्षा नम्रता सेठिया ने अपने भाव व्यक्त किए ।  उपासक जी का कृतज्ञता भाव के साथ साहित्य देकर सम्मान किया गया ।  सूत्र संचालन नोरतमल चॊरडिया ने किया। 

समाचार प्रदाता-शशि कला सुराणा, जलगांव

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From: Sushil Bafana
Provided by: Sushil Bafana
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