27.09.2018 ►STGJG Udaipur ►News

Published: 27.09.2018
Updated: 28.09.2018

Update

भावभरा आमंत्रण
#गुरु #पुष्कर_जन्मोत्सव_समारोह
#नाशिक_रोड - 14/10/2018

Source: © Facebook

News in Hindi

जैन धर्म की गणित एक बार जरूर पढ़िए ।

1- आत्मा 1 होती है

2 - जीव -2

3 - योग

4 - गतियां

5 - पाप

6 - द्रव्य

7 - तत्त्व

8 - कर्म

9 - पदार्थ

10 - धर्म

11 - प्रतिमा

12 - भावना

13 - चारित्र

14 - गुणस्थान

15 - प्रमाद

16 - कषाय

17 - मरण

18 - दोष

19 - जीव समास

20 - प्ररूपना

21 - ओदायिकभाव

22 - परिषह

23 - वर्गना

24 - तीर्थकर

25 - क्रियाए

26 - प्रथव्या

27 - पंचेंद्रियोंके विषय

28 - साधू के मूलगुण

29 - मनुष्योंकी संख्या

29 अंक प्रमाण

30 - णमोकारमंत्र में 30 व्यंजन होते है

31 - प्रथम पटल में 31 पटल है

32 - अन्तराय

33 - सर्वार्थसिद्धि में 33सागर आयु

34 - अतिशय

35 - णमोकारमंत्र में 35 अक्षर होते है

36- आचार्यों के मूलगुण

37 - पाँचवे गुणस्थान में आश्रवद्वार 37 होते है

38 - भगवान् पार्श्वनाथ के समोवशरं में 38 हजार आर्यिकाए थी

39 - तत्वार्थसूत्र के तीसरे अध्याय के सूत्र

40 - भवनवासी

41 - चार आराधनाओ के 41 प्रभेद

42 - तत्वार्थसूत्र के चौथे अध्याय के सूत्र

43 - तीसरे गुणस्थान में आस्रवद्वार 43

44 - कल्याणमंदिर के श्लोक

45 - मनुष्य लोक का विस्तार 45 लाख योजन

46 - अरिहंतों के मुलगुण

47 - घाति या कर्म

48 - भक्तामर में 48 श्लोक है

49 - नरक पटल

50 - सम्यक्त्व के 50 मल

51 - इष्टोपदेश के श्लोक 51 होते हे

52 - नंदीश्वरद्वीप के चैताल्य 52 होते हे

53 - जीव के भाव 53 होते हे

54 - बडे समाधिमरण के छंद 54 होते है

55 - सोलहवे स्वर्ग की देवियो की आयु 55 पल्य होती है

56 - जम्बूद्वीप में नक्षत्र 56 होते है

57 - आस्रव के कुल भेद 57 होते है

58 - द्रव्यसंग्रह मे गाथा 58 होती है

59 - सातवे गुणस्थान मे बंधने वाले कर्म 59 होते है

60 - श्रावकव्रतो के अतिचार 60 होते है

61 - आचार्य, उपाध्याय के कुल मूलगुण 61 होते है

62 - पुद्गल विपाकी कर्म 62 होते है

63 - शलाका पुरुष 63 होते है

64 - ऋद्धियाँ 64 होती है

65 - दारहवे गुणस्थान मे अनुदय कर्म 65 होते है

66 - भगवान महावीर की वाणी नहि खिरने के दिन 66 थे

67 - पाँचवे गुणस्थान मे बंधने वाले कर्म 67 होते है

68 - पुण्यकर्म 68 होते है

69 - सम्मूर्च्छन तिर्यंचों के 69 भेद होते है

70 - ढाई द्वीप की मुख्य नदियाँ 70 होती है

71 - अरिहंत, उपाध्याय परमेष्ठी के मूलगुण 71 होते है

72 - भगवान महावीर की आयु 72 वर्ष थी

73 - कषायमार्गणा मे सातवे गुणस्थान मे उदयकर्म 73 होते है

74 - तत्वसार ग्रन्थ की गाथा 74 होती है

75 - गुण संक्रमण के कर्म 75 होते है

76 - द्वीपकुमार के भवन 76 होते है

77 - भगवान श्रेयांसनाथ के गणधर 77 थे

78 - जीव विपाकी कर्म 78 होते है

79 - अरिहंत, उपाध्याय, सिद्धपरमेष्ठी के कुल मूलगुण 79 होते है

80 - पंचमेरू के चैत्यालय 80 होते है

81 - भगवान शान्तिनाथ जी, कुन्थुनाथ जी और पार्श्वनाथ जी के गणधरो की संख्या मिलाकर 81 हो जाति है

82 - अरिहंत और आचार्य परमेष्ठी के कुल मूलगुण 82 होते है

83 - तत्वार्थसूत्र के आठवे, नवें और दसवें अध्याय के सूत्रो की संख्या मिलाकर 83 हो जाति है

84 - णमोकारमन्त्र से 84 लाख मन्त्र निकलते है

85 - चौदह गुणस्थान मे सत्वकर्म 85 होते है

86 - भगवान सुपार्श्वनाथ जी के समवशरण मे वादी मुनीराज 86 सो थे

87 - भगवान शीतलनाथ जी के गणधर 87 थे

88 - भगवान पुष्पदन्त जी के गणधर 88 थे

89 - आचार्य, उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के मूलगुण 89 होते है

90 - जम्बूद्वीप की कुल नदियाँ 90 है

91 - अधोग्रैवेयक के चैताल्य 91 है

92 - सामान्य मनुष्य के चौथे गुणस्थान मे कर्म उदय 92 होते है

93 - नामकर्म के भेद 93 होते है

94 - भगवान चन्द्रप्रभ जी के एक कम 94 गणधर थे

95 - भगवान सुपार्श्वनाथ जी के 95 गणधर थे

96 - चक्रवर्ती की 96 हजार रानीयाँ होती है

97 - कुभोगभुमियाँ एक कम 97 होती है

98 - जीव समास के 98 भेद है

99 - सुमेरू पर्वत पृथ्वी से 99 हजार योजन ऊँचा-

100-इंद्रो की कुल संख्या 100 होती है।

ये है जैन धर्म की गिनती।।।।

*आगम विरुद्ध लिखा हो तो मिच्छामि दुक्कड़म*

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Sources

Source: © FacebookPushkarWani

Shri Tarak Guru Jain Granthalaya Udaipur
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