21.07.2012 ►Jasol ►Tapsya is Necessary to Purify Soul ► Acharya Mahashraman

Posted: 21.07.2012
Updated on: 21.07.2015

ShortNews in English

Jasol: 21.07.2012

Acharya Mahashraman said that Tapasya is necessary for purification of soul. Our soul is bonded with karma. Month of Savan and Bhadva is good for Tapasya. Muni Rajneesh Kumar accepted fast of 12 days from Acharya Mahashraman. Muni Rajneesh Kumar also expressed his views on occasion.

News in Hindi

आत्मकल्याण के लिए तपस्या जरूरी: आचार्य
जसोल (बालोतरा) २१ जुलाई २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो

जैन तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण ने तपस्या को आत्मशुद्धि का उपाय बताते हुए कहा कि अनादि काल से हमारी आत्मा पर कर्मों का मैल लगा हुआ है। यह मैल उतरता व चढ़ता रहता है। आत्मा को पूर्णतया कर्मों से मुक्त बनाने के लिए चरित्र की आराधना व तपस्या की साधना आवश्यक है। उन्होंने अनाहार तप के बारे में कहा कि कई दिनों तक न खाना सबके लिए आसान काम नहीं है। कुछ लोग ही बड़े क्षयोपशम वाले होते हैं कि अनाहार की तपस्या में उनका चलना-फिरना जारी रहता है। आचार्य शुक्रवार को चातुर्मास प्रवचन के दौरान धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि चातुर्मास के समय और उसमें भी श्रावण-भादवे के महीने में जैन शासन में तपस्याएं बहुत होती है। उन्होंने कहा कि तपस्या में आदमी का कायाबल के साथ मनोबल भी जरूरी है। मनोबल के बिना तपस्या का होना कठिन है। आचार्य ने प्रेरणा देते हुए कहा कि तपस्या के साथ स्वाध्याय, जप, कायोत्सर्ग भी हो तो तपस्या और भी ज्यादा बलवंती बन जाती है। अनाहार तपस्या के साथ स्वाध्याय होने पर तपस्या का एक अच्छा अनुष्ठान हो सकता है। कर्म निर्जरा भी तपस्या से होती है। कई जन्मों के पाप कर्मों का विनाश तपस्या से हो जाता है। तपस्वी को तपस्या में विवेक भी रखना चाहिए। तपस्या के साथ व्यक्ति अपने दायित्व को भी अवश्य देखें। व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को देखकर तपस्या के बारे में चिंतन करें। मंत्री मुनि सुमेरमल ने कहा कि व्यक्ति के भीतर के कर्मों को तोडऩे के लिए तपस्या आवश्यक है। तपस्या से जन्म-जन्मांतरों के दुष्कर्म होम स्वाध हो जाते हैं। तपस्या भीतर का यज्ञ ही नहीं, बाहर का भी यज्ञ है। तप को स्वीकार करने वाला व्यक्ति हर विघ्न-बाधा से दूर होकर निर्विघ्न बन जाता है। कार्यक्रम के प्रारंभ में कन्या मंडल की बहनों की ओर से चौबीसी का संगान किया गया। कार्यक्रम का संचालन मुनि हिमांशु कुमार ने किया।

तपस्या से आत्मोत्थान

मुनि रजनीश कुमार जो गुरु की सेवा के साथ संघ की अन्य गतिविधियों से भी जुड़े हुए हैं। मुनि ने 12 की तपस्या का आचार्य से प्रत्याख्यान किया। मुनि रजनीशकुमार की 11 की तपस्या के अवसर पर आचार्य ने उनके प्रति अनुमोदन स्वर में कहा कि मुनि रजनीशकुमार सेवा, स्वाध्याय के साथ अनाहार की तपस्या कर रहे हैं। ये सेवा भावी संत है। मंत्री मुनि ने रजनीशकुमार के बारे में कहा कि मुनि ने बड़ी भावना के साथ तपस्या का प्रत्याख्यान किया है। ये तप के द्वारा स्वयं का शोधन कर रहे हैं। मुनि रजनीशकुमार ने विचारों की अभिव्यक्ति दी। मुनि की बहन साध्वी धवलयशा व साध्वी मार्दवयशा ने गीत से मुनि की अनुमोदना की।

आत्मोत्थान के लिए प्रवेश: बालोतरा की बहन सुश्री इंद्रा भंसाली ने आचार्य की आज्ञा से पारमार्थिक शिक्षण संस्थान में प्रवेश किया। इस अवसर पर इनके परिवार वालों ने आचार्य के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए जल्द से जल्द दीक्षा का निवेदन किया। प्रमोद भंसाली ने कविता से भाव व्यक्त किए।

तपस्या की भेंट महातपस्वी को

महातपस्वी को तप की भेंट करने के लिए हर मानस तत्पर है। इसी क्रम में संतोष देवी चौपड़ा ने 19, कमला देवी संकलेचा ने 20, हीरादेवी सालेचा ने 12, जयश्री सालेचा ने 8, हेमलता छाजेड़ ने 8, संतोष देवी डोसी ने 20, रामी देवी गोगड़ ने 10, सुनीता देवी गांधी मेहता ने 9, प्रेमलता संकलेचा ने 7 की तपस्या का आचार्य से प्रत्याख्यान किया। मुंबई के हितेश कुमार ने 'चैतन्य रूपम' गीतों की सीडी का आचार्य की सन्निधि में लोकार्पण करते हुए 'बड़े भाग्य से मिले हैं हमको ऐसे कृपा निधान है' गीत प्रस्तुत किया।

कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला आज:.आचार्य की सन्निधि में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने के लिए शनिवार को दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की जाएगी।

अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय खटेड़ व महामंत्री प्रफुल्ल बेताला सहित संपूर्ण टीम पहुंच चुकी है। कार्यशाला को सफल बनाने में तेयुप अध्यक्ष रमेश भंसाली, मंत्री जितेन्द्र सालेचा, किशोर मंडल के मुदित चौपड़ा, तरुण भंसाली व किशोर मंडल संयोजक ढेलडिय़ा सहित सभी कार्यकर्ता जुटे हुए हैं।

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