29.06.2011 ►Acharya Mahashraman Reached Sambodhi

Posted: 29.06.2011
Updated on: 21.07.2015

News in English:

Location:

Samb.odhi

Headline:

Acharya Mahashraman Reached Samb.odhi

News:

Acharya Mahashraman told people that Sanyam is important in life. Attachment is reason for misery. Anyone who is free from attachment is happy and live in peace. Muni Subhkaran express his happiness and requested to do one chaturmas at Samb.odhi in coming years. Muni Bhavbhuti also welcomed Acharya Mahashraman.

News in Hindi:

महाश्रमण ने साथिया से विहार कर संबोधि उपवन पहुंचे, धानीन चौराहे पर की अगवानी

"जहां संयम, वहां सुख ही सुख" 

 संबोधि उपवन 29 JUNE 2011 (जैन तेरापंथ समाचार न्यूज ब्योरो)

तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण का चतुर्विध संघ के साथ मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर धानीन के समीप स्थित सम्बोधि उपवन में पदार्पण हुआ। उपस्थित जनमेदिनी को सम्बोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में संयम होना चाहिए। जहां संयम है वहा सुख ही सुख है। जीवन को सुख में बनाने के लिए व्यक्ति में संयम की चेतना का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिनका चित संयम से ओतप्रोत हो जाता है। उनका साधुपर्याय देवलोक में रमण करने लायक होता है। व्यक्ति दुख से घबराये नहीं, अपितु समभाव स्वीकार करें। मृत्यु से डरे नहीं, बुढ़ापे में दुखी नहीं होवे। समाधिवरण करें तो मृत्यु भी महोत्सव बन जाता है। आचार्य प्रवर ने दुखों के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहॉ आसक्ति है, मोह है वहॉ दुखों का सागर है जबकि अनासक्त व्यक्ति का जीवन सदैव सुखमय एवं शांत रहता है। 

मुनि शुभकरण ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज सम्बोधि तीर्थ के रूप में आपके सामने है लोगो की भावना है कि आपका एक चातुर्मास यहा अवश्य हो। इस स्थान पर आध्यात्मिक उद्ेश्य है कि हम अपनी प्रज्ञा को केसे जगाए। मुनि भवभूति ने भी अपनी भावनाए प्रकट करते हुए आचार्य प्रवर का अभिवादन किया। 

मुनि भवभूति ने भी अपनी भावनाएं प्रकट करते हुए आचार्य का अभिवादन किया। 

कन्या मंडल की बालिकाओं द्वारा स्वागत गीत से प्रांरभ समारोह की अध्यक्षता भारत जैन महा मण्डल अध्यक्ष सुमतिलाल कर्णावट ने की। स्वागताध्यक्ष श्रीमती प्रकाश मदनलाल तातेड़ थी। विशिष्ट अतिथि के रूप में कृपाशंकर दवे, रोकडिय़ा हनुमान के महन्त नारायणदास, सम्बोधि ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष खमाणचन्द डागरा, मेवाड़ कॉन्फे्रन्स अध्यक्ष डॉ. बसन्ती लाल बाबेल, नगरपालिका अध्यक्षा श्रीमती आशा पालीवाल आदि उपस्थित थे। प्रांरभ में श्रीमती मोहनी देवी बैद ने सम्बोधि उपवन की विविध गतिविधियों पर प्रकाश डाला। प्रकाश तातेड़, महन्त बजरंगदास ने भावनाएं व्यक्त की। संयोजन श्रीमती सुनीता जैन ने किया जबकि आभार कार्याध्यक्ष धर्मचन्द खाब्या ने व्यक्त किया। 

मंगल प्रवेश गमन में भावभीना अभिनन्दन

आचार्य महाश्रमण के साथिया से विहार कर धानीन चौराहे पर पहुंचने पर श्रावक-श्राविकाओं ने अगवानी कर रैली के रूप में सम्बोधि उपवन के लिए प्रस्थान किया। शिक्षाविद् चतुर कोठारी के नेतृत्व में जनमैदिनी अहिंसा यात्रा सफल हो, अणुव्रतों का यह संदेश-देखो अपना-अपना दोष, कन्या भ्रूण हत्या घोर अपराध है, नशा मुक्त जीवन बनाए आदि उद्घोष करते चल रही थी। पूरा मार्ग का वातावरण आध्यात्म मय हो गया। मुख्य मार्ग पर ध्यानयोगी मुनि शुभकरण ने आचार्य महाश्रमण की भावभीनी वन्दना की एवं आध्यात्मिक मिलन हुआ।उपवन ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष खमाणचन्द डागरा, फतहलाल मेहता सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अगवानी की।

सम्बोधि उपवन के मुख्य मार्ग पर ध्यान योगी मुनि शुभकरण ने आचार्य महाश्रमण की भावभीनी वन्दना की एवं आध्यात्मिक मिलन किया

उपवन ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष खमाणचन्द डागरा, फतहलाल मेहता, पूर्णचन्द्र बड़ाला, राजकुमार दक, सोहनलाल चौरडिय़ा, हनुमानमल बरडिय़ा, विमल बोथरा, अशोक डूंगरवाल, भंवरलाल कोठारी, जगजीवन चौरडिय़ा, गणेश कच्छारा, राजेश जैन, महेश उपाध्याय, राजेश बांठिया, सुन्दरलाल लोढ़ा, ज्ञानेश्वर मेहता, निर्मल हिरण, घनश्याम तलेसरा, बसन्तीलाल सरूपरिया, मुकेश बाबेल, कमलेश तलेसरा सहित सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने अगवानी की। सारा वातावरण वन्दे गुरूवरम उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। 

तीन परामर्श: 

आचार्य महाश्रमण ने धनवान व्यक्ति के लिए तीन परार्मश दिए। उन्होंने कहा कि धन है तो हम घमंड नहीं करें, धन का अहंकार नहीं करे। धन के प्रति ज्यादा आसक्ति, मोह नहीं रखें। उन्होंने कहा कि कई बार लोग सामाजिक कार्यो के लिए दान की घोषणा तो कर देते है लेकिन बाद में या तो मुकर जाते है अथवा पदाधिकारियों को बार-बार चक्कर कटवाते है यह अच्छी बात नहीं है। 

बारह  व्रत: 

श्रावक के बारह व्रतों का उल्लेख करते हुए आचार्य प्रवर ने कहा कि आत्मकल्याण के लिए व्रत-दीक्षा स्वीकार करनी चाहिए। व्रत दीक्षा का अर्थ असंयम से संयम की ओर प्रस्थान है। अणुव्रत, गुणव्रत और शिक्षा व्रत रूप बारह व्रत है। उन्होंने श्रावक सम्बोध पढ़कर जीवन सफल बनाने हेतु प्रेरणा दी। 

संबोधि उपवन 29 JUNE 2011 (जैन तेरापंथ समाचार न्यूज ब्योरो)


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