05.09.2019 ►Mumbai ►Samvatsari Day and Universal Forgiveness Day Celebrated

Published: 07.09.2019
Updated: 07.09.2019

Mumbai: 05.09.2019

Universal forgiveness day was celebrated in presence of Sadhvi Kailashvati. Heart of Samvatsari festival is forgiveness.

आत्मदृष्टा और क्षमाशील का गुर *सिखाता है संवत्सरी
दक्षिण मुंबई कालबादेवी में शासन श्री साध्वी कैलाशवती जी के सानिध्य में संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया गया। शादी सृजन में पर्यूषण पर्व पर प्रकाश डालते हुए संवत्सरी पर्व के सुदेश्य बताया कि प्रयुषण पर्व आध्यात्मिकता का स्रोत है यह पर्व हमारे भीतर के अंधकार को मिटाकर आलोक बिखरता है संवत्सरी महापर्व को मनाने से पूर्व 8 दिन त्याग, तपस्या, व जप से आत्मा रूपी धरा को पवित्र शुध्द बनाया जाता है उसके पश्चात स्वच्छ मंदिर में संवत्सरी रूपी वीतराग देव को स्थापित किया जाता है। संवत्सरी महापर्व का हृदय है क्षमा। यह क्षमा का दीपक हर दहलीज पर चलना चाहिए तभी व्यक्ति प्रसन्न रह सकता है। भगवान महावीर से गौतम ने पूछा भन्ते क्षमा से जीव क्या प्राप्त करता है भगवान ने कहा प्राणी मन की प्रसन्नता प्राप्त होती है। अपेक्षा है हर व्यक्ति के भीतर करुणा वह क्षमा की सुरभि फुटनी चाहिए जिससे वह प्रसन्नता का अनुभव कर सकें। भगवान महावीर के पूर्व भवो का विस्तार से वर्णन किया। साध्वी पंकज श्री जी ने कहा आज का खाद सजन इंद्रियों की मांग को शांत करता है रसन्द्रिय का संयम ही खाद्य संयम दिवस आराधना करना है। साध्वी श्री जी ने स्वाध्याय दिवस का विस्तार से वर्णन किया। जो व्यक्ति स्वयं को जान लेता है वह आंतरिक तप से लाइट ऑन करता है स्वाध्याय के पांच प्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा जो व्यक्ति अपना अनुप्रेक्षा अनूचिंतन करता है वह अपने स्वरूप का दर्शन करता है। जब सा माइक दिवस पर विस्तार से अपने विचार रखते हुए साध्वी पंकज श्री जी ने कहा सामायिक का अर्थ है क्षमता में रमण करना स्वभाव में स्थित रहना मोन,जप से व्यक्ति आत्मा के प्रगति के द्वार खोल सकता है। आत्म दर्शन करने का यह अनूठा पर्व वर्ष में एक ही बार आता है जप के द्वारा अनेक शक्तियों को प्राप्त कर जीवन की समस्याओं से शांति पाई जा सकती है। साध्वी ललिता श्री जी ने अणुव्रत दिवस पर अपने सारभीत विचार रखते हुए कहा जीवन की को सुखी बनाने की चाबी है अणुव्रत। साध्वी सम्यक्त्वयशा जी ने ध्यान दिवस पर विचार रखते हुए ध्यान के प्रकारों मे रौद्रध्यान,धर्मध्यान शुक्लध्यान,धर्मध्यान पर प्रकाश डाला। साध्वी शारदाप्नभा जी ने ज्ञाता धर्म कथा सूत्र वाचन करते हुए दुर्गति से बचने के कारणों का उल्लेख किया और सम्यक ज्ञान, दर्शन चरित्र की आराधना के लिए प्रेरित किया। कालबादेवी के महाप्रज्ञ प्रांगण में महामंत्र का अखंड जप चला इस मंत्र महायज्ञ में सैकड़ों भाई बहनों ने अपने समय वह श्रद्धा की आहुति दी। दादर एलफिंस्टन भाई कला सायन कोलीवाड़ा धारावी वडाला आदि अनेक क्षेत्रों के श्रावक श्राविकाओ ने अपनी अहम भूमिका निभाई। पर्वों का महापर्व पर्युषण पर्व के इस 8 दिनों में तपस्या की झड़ी लगी 17,16, 15, 14,10,11,9,8 के तप में 53 भाई बहनों ने अपनी आत्मा को कुंदन बनाया। पूर्व संचित कर्मों को चेक करने का यथार्थ मार्ग अपनाया। इस महापर्व की आराधना हेतु 70 भाई बहनों ने उपासिका शिविर की दिनचर्या का लाभ उठाया। रात दिन यहां रहकर ध्यान,स्वाध्याय,आसन प्राणायाम,प्रवचन, एवं दोपहर को आगम स्वाध्याय कर्मों की संज्झाय एवं 12 वर्तो की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मुंबई महिला मंडल ने पर्यूषण पर्व से पूर्व बहुत ही शानदार एवं प्रेरणादाई अंजना महासती का परिसंवाद प्रस्तुत किया। और ज्ञानशाला की परशिक्षिकाओं ने प्रयुषण ट्रेन के द्वारा मोक्ष धाम पर पहुंचाने की आकर्षक प्रस्तुति दी। ज्ञानशाला के छोटे-छोटे बच्चों ने उपवास के साथ पोषध की धर्म आराधना की और आराधना पत्र के द्वारा सैकड़ों भाई बहनों ने त्याग पच्ख्यान और सामायिक जप व पोषध कर लाभ उठाया। चंदनबाला के लगभग 250 तेलो ने जमकर धूम मचाई। लगभग 1200 भाई बहनों ने उपवास किया। और लगभग 400 पोषध हुए जिसमें अष्टप्रहरी पोषध 108 हुए। बहुत से भाई बहनों ने संवत्सरी पर्व को बेले तेले की तपस्या के साथ 24 प्रहरी पोषण किया। महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष किशन जी डागलिया एवं मंत्री सुमेर जी सुराणा के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पवन जी बोलिया मंत्री राहुल जी की टीम ने व्यवस्था की कमान संभाली और सुव्यवस्था के द्वारा इस पर्व को सफल बनाया। दक्षिण मुंबई महिला मंडल की संयोजिका उर्मिला कच्छारा एवं रेणु डागलिया की टीम ने एवं मीना सुराणा का व्यवस्था में सहयोग अनुकरणीय है।
*नितेश धाकड़*

Sources
Sushil Bafana
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