21.11.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 21.11.2017

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2017.11.21 Ahimsa Yatra 11

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति

श्री अमृत आश्रम से आचार्यश्री महाश्रमणजी ने की अमृतवाणी की बरसात

  • अमृतवाणी का श्रवण कर कृतार्थ हुए रानीगंजवासी, मानों प्राप्त कर लिया जीवन की अमूल्य निधि
  • काजोरा स्थित आर्ट आॅफ लिविंग आश्रम से दस किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री पहुंचे रानीगंज
  • प्रवर्धमान आचार्यश्री महाश्रमण अहिंसा यात्रा के साथ आसनसोल जिले की सीमा में किया पावन प्रवेश
  • रानीगंज के अमृत आश्रम में आचार्यश्री का हुआ पावन प्रवास
  • रानीगंजवासियों ने अपने आराध्य के समक्ष दी अपनी हर्षित भावाभिव्यक्ति

21.11.2017 रानीगंज, आसनसोल (पश्चिम बंगाल)ः

कोलकाता चतुर्मास की सुसम्पन्नता के उपरान्त पश्चिम बंगाल के हुगली, पूर्वी वर्धमान तथा पश्चिमी वर्धमान को पावन अपने चरणरज से पावन करते जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ मंगलवार को पश्चिम बंगाल राज्य के आसनसोल जिले की सीमा में पावन प्रवेश किया। आचार्यश्री अहिंसा यात्रा संग आसनसोल के रानीगंज स्थित अमृत आश्रम में पधारे। जहां आश्रम से जुड़े लोग और रानीगंज के श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन किया। आचार्यश्री ने आश्रम के भूतल पर बने हाॅल से पावन पाथेय प्रदान किया तो हर्षित श्रद्धालुओं और आश्रम से संबद्ध लोगों ने अपनी श्रद्धासिक्त भावाभिव्यक्ति दी।

मंगलवार को श्री श्री रविशंकरजी से जुड़े काजोरा स्थित आर्ट आॅफ लिविंग आश्रम से आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगल प्रस्थान किया तो सामने से सूर्य मानों अपनी रश्मियों संग कई दिनों की अनुपस्थिति के बाद श्रीचरणों की वंदना कर गतिमान होने को तत्पर था। आसमान बिल्कुल साफ था, किन्तु बरसात के बाद खुले मौसम में सुबह से ही चल रही तेज हवाएं लोगों को सर्दी का अहसास करा रही थीं। ये हवाएं उस दिशा से आ रही रही थीं, जिस दिशा की ओर आचार्यश्री को प्रस्थान करना था। अखंड परिव्राजक और दृढ़ संकल्पी आचार्यश्री के ज्योतिचरण सर्द हवाओं को चीरते हुए गतिमान हो चले। कुछ किलोमीटर की यात्रा के साथ ही पश्चिम वर्धमान जिले की सीमा ने आचार्यश्री के चरणों की वंदना कर विदा हुई तो आचार्यश्री के चरणरज को प्राप्त कर हर्षित आसनसोल जिले की सीमा ने मानवता के मसीहा आचार्यश्री महाश्रमणजी के चरणवंदना कर अपने सीमा क्षेत्र में मंगल स्वागत किया। लगभग दस किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री रानीगंज स्थित श्री अमृत आश्रम में पधारे।

आचार्यश्री ने श्री अमृत आश्रम के भूतल पर बने हाॅल में उपस्थित श्रद्धालुओं पर अमृतवाणी की बरसात करते हुए कहा कि आदमी को अपने जीवन में एक महत्त्वपूर्ण बात यह रखने का प्रयास करना चाहिए कि उसका दृष्टिकोण सम्यक् हो जाए। आदमी को यथार्थ का बोध करने का प्रयास करना चाहिए। यथार्थ दृष्टि सम्यक् दर्शन है और यथार्थ बोध सम्यक् ज्ञान होता है। जैन धर्म में नौ तत्वों के माध्यम से यथार्थ को जाना जा सकता है। आदमी को पहले स्वयं को जानने का प्रयास करना चाहिए। आदमी स्वयं में जीव है। शरीर तो हमारी निर्जीव है। पुण्य-पाप के कारण शरीर और आत्मा का साहचर्य हो जाता है। आदमी के द्वारा होने वाले अच्छे और बुरे कर्म के कारण पुण्य और पाप का बंध हो जाता है। आदमी को संवर और निर्जरा के माध्यम से अपने कर्मों का क्षय कर मोक्ष प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। आदमी को रूढ़ी को छोड़ सच्चाई को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। सच्चाई जहां से भी प्राप्त हो उसे ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि गौरवकुमारजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आश्रमी की ओर से श्री मुरारीलालजी ने आचार्यश्री का स्वागत करते हुए कहा कि आपश्री के आगमन से हम सभी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। आपके आगमन से हम धन्य हो गए। श्री नवरतनमल बैद ने अपनी हर्षाभिव्यक्ति दी। कोठारी परिवार की महिलाओं तथा इस आश्रम से संबद्ध महिलाओं के आचार्यश्री के स्वागत में गीत का संगान कर अपने भावसुमन श्रीचरणों में अर्पित किए तथा आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।

English [Google Translate]

Non-violence travel press release

Amacharishri Mahasramanji's blessings from Shri Amrit Ashram

  • Raniganjhas, who have been benefited by listening to Amarnavani, received valuable invaluable funds for life
  • Raniganj reached Acharyashree by walking ten kilometers from the Art of Living Ashram in Kajora
  • Advaniyashree Mahasaman with non-violence pilgrimage entered the border of Asansol district
  • Aacharyaree's holy visit to Rani Ganga's Amrit Ashram
  • Ranigans have given their joyful feelings to their admiration

21.11.2017 Raniganj, Asansol (West Bengal):

After the prosperity of Kolkata Chaturmas, the Acharyashree Mahasraman, the leader of the Mahatma Gandhi Mahasabha, a great disciple of Jain Shvetambar Terapanth Dharmasangan, sanctifying the Hooghly, Eastern Vardhaman and Western Vardhaman of West Bengal, with its chowk, Acharyashree Mahasramanji, along with his Dhaval army, on Tuesday In the border of the Asansol District of Bengal state, they entered holy places. Acharyashree walks in the Amrit Ashram located in Raniganj of Asansol with Ahimsa tour. Where the people associated with the Ashram and the devotees of Raniganj greeted the Acharyashree with great warm welcome. Acharyashree provided the holy path on the ground floor of the ashram, and the people associated with the blessed devotees and the ashram gave their reverential expressions.

On Tuesday, Acharyashree Maha Swamiji left the Mangal from the Art of Living Ashram, located in Kajora, situated on Sri Sri Ravi Shankarji, in front of the Sun, from the front, the Sun was ready to move with the sun for many days after the absence of Shreecharan. The sky was clear, but after the rains, the strong winds blowing from the morning in the open season were making people feel cold. These winds were coming from that direction, the direction towards which Acharyashree had to depart. Continuous Parivrajak and determinant Acharyashree's Jyoticharan churned the winds and started moving in motion. With the passing of a few kilometers, the border of the western Vardhaman district was felicitated by the stages of Acharyashree, and after receiving Acharyashri's Phase-Rangar, the boundary of the thrilling Asansol district welcomed the mausoleum in the border area by doing the Phadavand of the humanity of the Acharya Shri Mahishmanji. Approximately ten kilometers away, the Acharyashri ran into Shri Amrit Ashram located in Raniganj.

Acharyashri, while showering the Amritwani on the devotees present in the building on the grounds of Shri Amrit Ashram, said that the man should try to keep an important point in his life that his attitude becomes normal. Man should try to understand the reality. Real vision is a present vision, and real understanding is right knowledge. Reality can be known through the nine elements in Jainism. The man must first try to know himself. Man is the creature in itself. The body is our lifeless body. Due to virtue, sin becomes the companionship of the body and soul. Due to the good and bad deeds performed by man, bondage of virtue and sin becomes bound. By man decaying his deeds through Sanwar and Nirjara, one can move forward towards achieving salvation. The man should try to adopt the truth beyond the stereotype. Wherever the truth is received from, it should try to get it.

Muni Gauravkumarji gave his brother-in-law after the Acharya's Mangal discourse. On behalf of the Ashram, Shri Murarilalji welcomed Acharyashree and said that we are all proud of the arrival of Shree Shree. We were blessed by your arrival. Shri Navaratnam Baid gave his heartfelt expression. In the welcome of Acharyashree of Kothari family and the women associated with this ashram, the song is performed by offering songs in their bhasamasan shricharan and receiving holy blessings from Acharyashree.

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