13.11.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Muni Kishanlal

Posted: 14.11.2017

http://www.herenow4u.net/fileadmin/v3media/pics/organisations/Jeevan_Vigyan_Academy/Jeevan_Vigyan_Logo__New_.jpg

Jeevan Vigyan Academy


http://www.herenow4u.net/fileadmin/_files2017/Fotos/Jeevan_Vigyan/Mahavir-Bhagawan.jpg

News in Hindi

भगवान महावीर का दीक्षा कल्याण दिवस

भगवान महावीर इस युग के महान सत्य द्रष्टा थे: मुनि किषनलाल

हांसी, 13 नवम्बर 2017।

‘‘भगवान महावीर इस युग के चैबीसवें तीर्थंकर थे। दीक्षा लेकर साधना में प्रवृत्त हो गए। पहले दिन जंगल में भगवान ध्यान में खड़े थे। एक किसान अपने बैलों के साथ आया। बाबा मेरे बैलों का ध्यान रखना। मैं किसी काम के लिए जा रहा हूं, वह चला गया। बैल भी घास चरने जंगल में चल पड़े, भगवान किसके बैल संभालने हैं। किसान लौटा बोला मेरे बैल कहां गए चारों तरफ घूमा बैल नहीं मिले, निराष ही वापिस लौटा, बैल तो बाबा के पास बैठे हैं। वह गुस्से में आया और बाबा को चाबुक से मारने दौड़ा।

इधर इन्द्र ने देखा यह क्या अनर्थ कर रहा है। इन्द्र ने उसके हाथ को स्तंभित कर दिया। अरे! न समझ ये राजा सिद्धार्थ के राजकुमार संत महावीर हैं। भगवान को निवेदन किया। भंते! साधना में बहुत बाधाएं आएगी। मैं सुरक्षा के लिए आपकी साधना के साथ चलूं। भगवान ने कहा - ऐसा कभी नहीं हुआ।

तीर्थंकर स्वयं साधना करते हैं। किसी का सहयोग नहीं लेते।’’ ये विचार आचार्यश्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी ने हांसी के तेरापंथ सभा भवन में भगवान महावीर के दीक्षा कल्याण के अवसर पर व्यक्त किए।

उन्होंने आगे कहा कि भगवान कष्ट सहिष्णु, उग्र तपस्वी इस युग के महान सत्य द्रष्टा थे। उन्होंने अहिंसा अनेकान्त समता का सिद्धान्त प्रतिपादित किए। विष्व में आज भी शांति, प्रेम और सर्व धर्म सद्भाव की विजय पताका फैला रहे हैं। मुनि निकुंजकुमार ने प्राग् वक्तव्य दिया।

- अषोक सियोल


 

 

English by Google Translate:

Lord Mahavir's initiation welfare day

Lord Mahavir was the great truth seer of this era: Muni Kishan Lal

November 13, 2017.

'' Lord Mahavir was the twenty-third Tirthankara of this era. Initiation took place in sadhana. On the first day in the forest Lord stood in meditation. A farmer came with his oxen and came up with his oxen. Baba, take care of my bulls. I am going for some work, he went away. The bull also grazes the grass in the jungle, whom God has to take care of. The farmer returned and said, 'Where did my oxen go, I did not get roasted bulls all around, I returned the despair only, the ox is sitting near Baba.' He got angry and ran to beat Baba with a whip.

Here Indra saw what was doing wrong. Indra stirred his hand. Hey! Do not understand that Raja Siddhartha is the Prince Saint Mahavira. Requested to God. Bhante! There will be many obstacles in meditation. Let's go with your sadhana for safety God said - It never happened.

Tirthankar does self practice. Do not take anybody's cooperation. "This idea was expressed by Acharyashri Mahasramanji's intuitive observer professor 'Shanshan Shree' Munishri Kishan Lalji on the occasion of the initiation welfare of Lord Mahavir at the Thirampanth Sabha hall of Laughter.

 He further said that the God-suffering tolerant, fiery ascetic was the great truth seer of this age. They define the principle of non-violence polytheism Even today in the world, peace, love and all religions are spreading the message of harmony. Muni Nikunjkumar gave the Prague Statement.

- Ashok Sion

Share this page on: