15.10.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 16.10.2017
Updated on: 15.11.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति

शुद्ध प्रत्याख्यान का आध्यात्म साधना में विशेष महत्त्व: आचार्यश्री महाश्रमण

  • आचार्यश्री ने प्रत्याख्यान को निर्मल और शुद्ध बनाए रखने के पांच आयामों को किया व्याख्यायित
  • चार्यश्री की मंगल सन्निधि में टीपीएफ द्वारा आयोजित हुआ काॅरपोरेट प्रोफेशनल्स अधिवेशन
  • आचार्यश्री ने दिया आशीष कहा, धार्मिक संस्थाओं सहित सभी अर्थार्जन में प्रमाणिकता का करें प्रयास
  • चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति ने 126 सहयोगियों को आचार्यश्री के समक्ष किया सम्मानित
  • पदाधिकारियों ने दी भावाभिव्यक्ति, आचार्यश्री से आशीषवृष्टि कर प्रदान की नवीन ऊर्जा

15.10.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

कोलकाता के राजरहाट स्थित महाश्रमण विहार में वर्ष 2017 का चतुर्मास काल परिसम्पन्न कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने रविवार को अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को नित्य की भांति पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए अध्यात्म की साधना में प्रत्याख्यान का महत्त्व बताया तो उसके साथ ही प्रत्याख्यान को शुद्ध रखने के पांच आयामों को आगम के आधार पर शुद्ध रखने का विस्तार से वर्णन किया। आज आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में दो कार्यक्रम भी आयोजित हुए। तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा कारपोरेट प्रोफेशनल्स के दूसरे अधिवेशन का आयोजन हुआ तो वहीं दूसरी ओर कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति और आचार्य महाप्रज्ञ महाश्रमण एजुकेशन एंड रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित हुआ। जिसमें इस चतुर्मास को सफल बनाने में सहयोग करने वाले कुल लगभग 126 सहयोगियों को सम्मानित किया गया।

रविवार की सुबह नित्य की भांति सर्वप्रथम आचार्यश्री ने अपने मंगल महामंत्रोच्चार के उपरान्त आगामाधारित अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आध्यात्मिक साधना में एक शब्द प्रत्याख्यान आता है। प्रत्याख्यान का अध्यात्म साधना के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। गृहस्थ भी प्रत्याख्यान अर्थात् कुछ परित्याग करते हैं। गृहस्थ कभी किसी वस्तु के प्रयोग का परित्याग करता है तो कभी उपवास आदि के प्रत्याख्यान करता है। प्रत्याख्यान के पांच आयाम बताए गए हैं। उनमें पहला आयाम है-श्रद्धानुशुद्ध। जो भी प्रत्याख्यान लिया जा रहा हो उसके प्रति श्रद्धा होनी चाहिए। दूसरा आयाम विनयसमाचारण।
प्रत्याख्यान का स्वीकरण करते वक्त विनय का भाव हो। तीसरा आयाम अनुभाषणा शुद्ध होता है।

प्रत्याख्यान के दौरान गुरुमुख से सुनने के बाद पाठ को शुद्ध रूप से दोहराने का प्रयास करना चाहिए। चैथा आयाम है कि प्रत्याख्यान की अनुपालना शुद्ध हो। पांच आयाम है कि प्रत्याख्यान में राग-द्वेष नहीं, पूर्ण भाव शुद्धि के साथ ग्रहण किया जाए। कठिनाइयों में प्रत्याख्यान की शुद्धता को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। सभी अपने संकल्पों को शुद्ध रखने का प्रयास करें तो आध्यात्मिक उत्थान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। आचार्यश्री ने अर्थार्जन में सभी को नैतिकता और प्रमाणिकता को बनाए रखने की प्रेरणा प्रदान करने के साथ ही धार्मिक संस्थाओं को भी अपने कार्यों में प्रमाणिकता को बनाए रखने का प्रयास करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री टीपीएफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रकाश मालू, इस अधिवेशन के संयोजक श्री विनोद कोठारी ने अपनी विचारभिव्यक्ति दी। इस अधिवेशन के मुख्य अतिथि समाजसेवी व श्री गु्रप के वाइस चेयरमेन श्री सुनील कानोड़िया ने आचार्यश्री के प्रति अपनी श्रद्धासिक्त भावाभिव्यक्ति दी।

इसके उपरान्त कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कमलकुमार दूगड़, आचार्य महाप्रज्ञ महाश्रमण एजुकेशन एंड रिसर्च फाउण्डेशन के अध्यक्ष सुरेन्द्र दूगड़, इस ट्रस्ट के प्रधान न्यासी श्री भिखमचंद पुगलिया व चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री विनोद बैद ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। इसके उपरान्त इस चातुर्मासिक व्यवस्था में सहयोग करने वाले कुल 126 सहयोगियों को स्मृति चिन्ह चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति और आचार्य महाप्रज्ञ महाश्रमण एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के पदाधिकारियों द्वारा प्रदान कर सम्मानित किया गया। आचार्यश्री ने सभी को अपने मंगल आशीष की वृष्टि से अभिसिंचन प्रदान कर उनके हृदय में नवीन ऊर्जा का संचार कर दिया।



English [Google Translate]

Non-violence travel press release

Special relevance in the spiritual practice of pure repetition: Acharyashree Mahasaman

  • Acharyashree explained the five dimensions of presupposition to keep pure and pure
  • Corporate Professionals' Conference organized by TPF at Mangal Sananidhi of Aacharyashree
  • Acharyashree gave Ashish, attempt to make credentials in all the economies including religious institutions
  • Tatmasas Migration Arrangement Committee honors 126 associates in front of Acharyashree
  • New energy provided by the officials, given by Bhavavyavyakti, Acharyashree

 

15.10.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

Jain Svitambara Terapanth Dharmasangha, a representative of Lord Mahavira, Principal of Ahimsa Yatra, Mahapatu Acharyashri Mahasramanji gave holy inspiration to the devotees present in spirituality as a daily sacrifice on Sunday in Mahasaman Vihar, Kolkata, in Rajarhat, Kolkata. While emphasizing the significance of repetition in the practice of spirituality Along with that, he described in detail the chances of keeping the denunciation pure by keeping the five dimensions pure on the basis of agam. Today, two programs were organized in Acharyashree's Mangal Sananidhi. The second session of Corporate Professionals was organized by the Terrapanth Professional Forum, on the other hand, organized by Kolkata Chaturmas migration arrangement committee and Acharya Mahapruti Mahasaman Education and Research Foundation. In which around 126 colleagues, who assisted in making this Chaturmas successful, were honored.

Like Sunday, on Sunday morning, Acharyashree said in his Mangal discourse after his Mangal Mahamantrachchar, that in the spiritual practice one word rejection comes. Spirituality of repetition is an important place in the field of spiritual practice. The householder also repudiates something reputable. The householder never abandons the use of an object, and sometimes denounces fast, etc. Five dimensions of repetition have been described. They have the first dimension - Shraddhanuk There should be reverence for anyone who is being reprimand. Second Dimension Modest Communication
When accepting repetition, there is a sense of modesty. The third dimension is pure speech.
 
After repetition, after listening to Gurmukh, we should try to repeat the text purely. Chaatha dimension is that the compliance with the hypothesis is pure. There is a five dimension that should be accepted with repetition purification in the prescriptive, not rage-hatred. In the difficulties should try to maintain the correctness of the denunciation. If you try to keep your resolutions pure, then you can move forward in the direction of spiritual uplift. Acharyashri gave inspiration to all in empowerment to keep morality and authenticity and to encourage religious institutions to try to maintain authenticity in their work. Mangal blessings were given to the program organized by Acharyashree TPF.

Mr. Prakash Malu, National President of Terapanth Professional Forum, Mr. Vinod Kothari, Convenor of this convention gave his thought. Mr. Sunil Kanodia, Vice Chairman, Social Worker and Mr. Grip, Chief Guest, of this convention gave his tribute to Acharyashri.

After this, Mr. Kamalkumar Dugar, Chairman of the Kolkata Chaturmas Migration Arrangement Committee, Surendra Dugad, Chairman of Acharya Mahaprayaan Education and Research Foundation, Mr. Bhikhamchand Puglia, Chief Trustee of this Trust and Mr. Vinod Baid, Senior Vice President of Chaturmas Migration System, gave his brother-in-law. Subsequently, 126 allies supporting the Chaturmasik system were honored by the Smritika Chaturmas migration arrangement committee and officials of Acharya Mahapragya Mahasaman Education and Research Foundation. Acharyashri gave all the transmissions from the rain of his Mars Ashish and transmitted new energy into his heart.

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2017.10.15 Kolkata Chaturmas 05

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