12.10.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 12.10.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति

पांच अविग्रह के द्वारा संघ हो सकता है स्वस्थ और दीर्घजीवी

  • आचार्यश्री के श्रीमुख से निरंतर बह रही आगमवाणी लोगों को प्रदान कर रही विशेष ज्ञान
  • आचार्यश्री ने विधेयात्मक और निषेधात्मक आज्ञा सहित पांच अविग्रह का किया वर्णन
  • संयम पथ पर आगे बढ़ रहे साधु, साध्वियों व समणश्रेणी के प्रति आचार्यश्री ने की आध्यात्मिक मंगलकामना
  • संयम पर्याय के 25 वर्ष पूर्ण करने वाले साधु, साध्वियों व समणियों ने दी श्रीचरणों में अर्पित की प्रणति


12.10.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के

एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गुरुवार को कोलकाता के राजरहाट स्थित चतुर्मास स्थल ‘महाश्रमण विहार’ में बने अध्यात्म समवसरण से लोगों को ‘ठाणं’ आगम के आधार पर संघ को स्वस्थ और दीर्घजीवी बनाने में सहायक पांच अविग्रहों का वर्णन किया। आचार्यश्री ने संयम पर्याय में 25 वर्ष पूर्ण करने वाले साधु, साध्वियों, समण-समणियों के साथ ही आज के दिन विभिन्न वर्षों में प्रवेश करने वाले सभी चारित्रात्माओं के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की और अपने महाव्रतों के पालन के प्रति सतत जागरूक रहने की पावन प्रेरणा प्रदान की। साथ ही महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने अपने सभी को अपने आशीर्वचनों से अभिसिंचन प्रदान किया।

    गुरुवार को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि ‘ठाणं’ आगम में आचार्य व उपाध्याय को संघ या समूह की एकता, अखंडता को बनाए रखने के पांच अविग्रहों का वर्णन किया गया है। वर्तमान में आचार्य ही उपाध्याय का दायित्व भी संभालते हैं। आचार्यश्री ने पांच अविग्रहों का वर्णन करते हुए कहा कि पहला अविग्रह होता है आज्ञा-धारणा का सम्यक् प्रयोग। आचार्य को विधेयात्मक और निषेधात्मक आदेश देना चाहिए। दूसरी बात होती है बड़े-छोटे के क्रम में वंदन-व्यवहार होना चाहिए। संघ की अखंडता के लिए वंदन-व्यवहार बहुत महत्त्वपूर्ण है। दिन में कम से कम एक बार बड़े संतों को वंदन करने का प्रयास करना चाहिए। इसके प्रति आचार्य को भी जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए।

    तीसरी बात होती है जो सूत्र आचार्य के पास है, उसकी समय-समय पर वाचना प्रदान कर उस सूत्रीय ज्ञान और आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान की आराधना से परंपराएं पुष्ट होती हैं। संस्कृति को सुरक्षित करने के लिए साहित्य का बहुत महत्त्व होता है। चैथी बात आचार्य की सेवा के प्रति चारित्रात्माओं को जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। पांचवी बात कि आचार्य को भी संघ का सम्मान करना चाहिए और विशेष यात्रा आदि संघ से समर्थन लेकर ही करने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने इन पांचों का वर्णन करते हुए कहा कि यह पांच सूत्र संघ और संगठन को दीर्घजीवी और अखंड बनाने वाले हो सकते हैं।

    आचार्यश्री ने अपने मंगल प्रवचन के उपरान्त कहा कि कार्तिक महीने में बहुत से चारित्रात्माओं के संयम पर्याय की बात आती है। आज भी अनेक चारित्रात्माएं 75, 50 अथवा 25 वर्षों तथा अनेक-अनेक वर्षों की सम्पन्नता कर रहे हैं। 25 वर्ष तक के संयम पर्याय करने वाले गुरुकुलवास में भी उपलब्ध हैं।

वैसे तो संयम पर्याय का हर वर्ष अच्छा है। चारित्रात्माओं को संयम को उज्जवल बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। उनका प्रतिक्रमण अच्छा हो, आगम बत्तीसी का परायण कर ज्ञानार्जन का प्रयास, दसवेंआलियं आदि ग्रंथों को जितना कंठस्थ करने का प्रयास हो, अपने कार्यों आदि का विहंगावलोकन करें तो संयम की निर्मलता बढ़ सकती है, परिपुष्ट हो सकती है। गोचरी करने आदि सभी नियमों के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करने का चाहिए। जागरूकता से ही संयम की निर्मलता बनी रह सकती है।

मैं सभी के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना करता हूं। इसके पूर्व साध्वीप्रमुखाजी ने भी संयम पर्याय के 25 वर्ष पूर्ण करने वाले साधु, साध्वियों और समणियों को अपने आशीर्वचनों से अभिसिंचन प्रदान किया।

    इससे पहले आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में अपने संयम पर्याय के 25 वर्ष संपन्न करने वाले चारित्रात्माओं में मुख्यनियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी, मुनि जयकुमारजी, साध्वी जयविभाजी, साध्वी कमलविभाजी, समणी परिमलप्रज्ञाजी, समणी रूचिप्रज्ञाजी, समणी कमलप्रज्ञाजी तथा समणी हंसप्रज्ञाजी ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी और संयम पथ पर निरंतर अग्रसर होने के लिए अपने आराध्य के समक्ष अपनी विनयांजलि अर्पित की।


English [Google Translate]

Non-violence travel press release

The union can be healthy and long-lived by five non-divisive

  • A special knowledge being provided to the people who are continuously flowing through Shrikrimati
  • Acharyashree describes the five non-divisiveness, including the prohibitive and prohibitive order
  • Spiritual congratulations of Acharyashri towards the ascetic, sadhya and equality
  • Sadhus, Sadhis and Samadhis, who completed 25 years of Siyam Adhyayan




12.10.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

Jain Svetambara Teerapanth Dharam Sangh

Acharyashree Mahasramanji, a teacher of Lord Mahavir, was present on the occasion of 'Mahasaman Vihar' in Chaturmas, Rajarhat, Kolkata, on Thursday, on the basis of spirituality, on the basis of 'Thanan' Agam, the people of five non-divisions Described. Acharyashree has given spiritual inspiration to all the charitraans who have entered the various years of today, along with the sadhus, sages, Saman-samanis, who completed 25 years in the Samyama Practices, and to provide constant inspiration to be constantly aware of the adherents of their great men Of Along with this Mahishmani Sadhvi Pramukhajji gave all his convictions to his blessings.

On Thursday, Acharyashree gave holy inspiration and said that in the 'Thanan' Agam, Acharya and Upadhyay have been described as five unbridled beings of maintaining unity and integrity of the Sangh or group. At present, Acharya also takes care of Upadhyaya's responsibility. Describing the five non-divisons, Acharyashri said that the first non-devotion is due to the use of the command-perception. The teacher should make a formal and prohibitive order. The second thing is that in the order of small and large, it should be venerated. Vandalism is very important for the union's integrity. At least once a day, we should try to salute the great saints. Teacher should also try to be aware of this.

The third thing that a teacher has with the teacher, should give him reading from time to time and try to pursue that point knowledge. Traditions are confirmed by the worship of knowledge. Literature is very important for securing culture. The charitraans should try to be aware of the fourth part of Acharya's service. Fifth thing is that Acharya should also respect the Sangh and should try to do it only with the support of the special travel etc.

Describing these five, Acharyashri said that these five Sutras can be the organization and the organization can be long-lived and unbroken.

Acharyashree said after his Mangal discourse that in the month of Kartik many talk about the restraint of the charitras. Even today, many charitatams are performing 75, 50 or 25 years and many-many years of prosperity. Up to 25 years of abstinence, there are also alternatives to Gurukulvas.

Well the restraint option is good every year. The charitraans should try to keep the restraint bright. Their pratikraman is good, attempts to acquire knowledge after coming out of Agam Battis, an attempt to memorize the texts etc., if they overview, their actions, etc., then the clarity of restraint can increase, can be favored. To be careful about all the rules, etc. should be tried. The awareness of abstinence can only be maintained by awareness.

I wish all the spiritual things towards everyone. Before this, Sadhvi Muktajji also gave the sadhu, sages and samanias who completed 25 years of Samyama Samayas, with their blessings.

Earlier, in the charity of Acharyashree's 25 years of self-restraint, Chief Engineer Sadhvi Vishootvibhaji, Muni Jayakumarji, Sadhvi Jayavibhai, Samini Parimal Pragya, Samani Ruchiprakrajji, Samne Kamal Paragya and Samani Hans Pradhanji also gave their brother-in-law and restraint path But to be continuously forwarded to his admiration, his Vinayanjal Paid.

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