11.10.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Muni Kishanlal

Posted: 11.10.2017

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Jeevan Vigyan Academy


017.10.11 Jeevan Vigyan Academy News 01

News in Hindi

भाषा व्यक्तित्व की पहचान: मुनि किषनलाल

हांसी, 11 अक्टूबर 2017।


भाषा किसी के लिए भी व्यक्तित्व का आईना है बोलना भी अच्छा है और मौन रहना भी अच्छा है। उससे भी अधिक आवष्यक है कि यह जानना कि कब बोलें व कब मौन करें। मौन करने से ऊर्जा का संचय होता है व शक्ति का अपव्यय बचता है भगवान महावीर के जीवन वृतांत से उल्ल्लेख करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती ‘प्रेक्षाप्राध्यापक’ शासनश्री मुनि किषनलाल ने कहा कि भगवान महावीर ने बारह वर्षों तक तपस्या की और तपस्या के साथ-साथ मौन रहने की साधना भी की। तपस्या उपरान्त पावापुरी (बिहार) में जब उन्होंने उपदेष दिया तो वे उपदेष आज तक मानव जाति का पथ अलौकित कर रहे हैं। अतः जहां मौन रहना आवष्यक है, वहीं बोलना भी अपने व्यक्तित्व की पहचान है और भावी पीढ़ी का पथ प्रषस्त करता है।

मुनिश्री ने अध्यात्म व इतिहास की घटनाओं का उल्लेख करते हुए भाषा पर संयम बरतने का उपदेष दिया। इस अवसर पर धर्मसभा में प्रेक्षा प्रषिक्षक लाजपतराय जैन, अणुव्रत समिति अध्यक्ष अषोक जैन, सरोज जैन, धनराज जैन आदि उपस्थित थे।

इस दौरान संजय जैन, मीनू जैन व राहुल जैन ने प्रवचन के पष्चात मुनिश्री की सेवा दर्षन का लाभ लिया।

- अषोक सियोल
9891752908
संलग्न: फोटो

English by Google Translate:

 

Identity of language personality: Muni Kishan Lal

October 11, 2017.

Language is also a mirror of personality, it is also good to speak and it is also good to be silent. It is more important to know when to speak and when to silence. Silence is the accumulation of energy and waste wastage of power. Referring to the life story of Lord Mahavira, Gaurshashree Muni Kishan Lal, the intuitive reader of Acharyashree Mahishram, said that Lord Mahavir had practiced penance for twelve years and along with penance Silence of being silent too. After the austerity, when he gave the remedies to Pavpuri (Bihar), the remnants of this are till date the path of mankind. So where there is a need to remain silent, speaking at the same time is also the recognition of your personality and the path of future generations.

Munishri gave the wisdom of restraint on language while mentioning the incidents of spirituality and history. On this occasion, Pracharak Lajpat Rai Jain, Nirvrat Committee Chairman Ashok Jain, Saroj Jain, Dhanraj Jain etc. were present in the meeting.

During this, Sanjay Jain, Meenu Jain and Rahul Jain took advantage of the service of Munishree's post before the discourse.

- Ashok Sion
9891752908

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