07.10.2017 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 07.10.2017
Updated on: 08.10.2017

Update

One of amazing short movie story.. वृषभदेव के दो पुत्र चक्रवर्ती भरत और बाहुबली के बीच हुए तीन युद्ध.. भरत कहते थे मैं चक्रवर्ती हूँ.. मेरी अधीनता मेरे भाई बाहुबली को भी स्वीकार करनी होगी.. बाहुबलि कहते मैं भी वृषभदेव का पुत्र हूँ मैं हार स्वीकार नहीं करूँगा.. Watch beautiful story.. #share please..

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News in Hindi

Appeal to 73000 members of @ Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt #SHARE when U agree?

Photographer बनकर रह गए हैं हम, आचार्य श्री की छवि.. Conduct.. मुस्कान.. वैराग्य.. को हम आँखों में बसाने के बजाये.. उन moment को जीने/feel के बजाय.. सिर्फ camera / mobile में Record कर लेते हैं! आचार्य श्री की हर समय सिर्फ हम फोटो फोटो और फोटो click करने में लगे रहते हैं और उनके व्यक्तिव को दर्शन करने का rare moment खो देते हैं! सबके पास mobile में whatsapp, camera हैं आप 1-2 picture click करले फिर अपना ध्यान सिर्फ आचार्य श्री पर लगाये इससे आपका वहा जाना भी sucesfull रहेगा आपको peace भी मिलेगी:) और फिर वही 1-2 फोटो सब यहाँ ग्रुप में शेयर करदे यहाँ से सब सेव करले #AcharyaVidyasagar

आचार्य श्री प्रदर्शन की वस्तु नहीं हैं, उनका lifestyle दर्शन के लिए हैं, वे जैन धर्मं का जीवंत रूप हैं.. उनकी life से निज दर्शन को हम प्राप्त कर सकते हैं, आचार्य श्री का सन्देश हैं आत्मानुशासन [ self-discipline ] उनकी sheer lifestyle से हम true Insight / samyak Darshan को पा सकते हैं! अभी तो रामटेक में आचार्य श्री ने भी कहा हैं आप सारथि बने.. स्वार्थी नहीं! आचार्य श्री फोटो को मना नहीं करते लेकिन हर समय फोटो लेने से उनको डिस्टर्ब होता हैं.. आपके भी भाव दर्शन के ना होकर बस फोटो क्लिक करने में लगे रहते हैं. आचार्य श्री ने कहा हम व्हात्सप्प/फेसबुक सबका सकारात्मक/constructive प्रयोग करे!!

यकीन मानिए एक बार आचार्य श्री के दर्शन के लिए जाकर देखिये Camera/ picture क्लिक करने का विचार छोड़ कर.. आप कहेंगे.. क्या बात ऐसा आनंद कभी नहीं आया, उनके दर्शन के लिए जाए और शांत खड़े कर कर उनको देखते रहे.. सिर्फ देखते रहे... आपकी आंखे चमक उठेगी, रोम रोम उनके Real दर्शन से महक उठेगा!:):) और आचार्य श्री का सन्देश 'चरण नहीं आचरण छुए' हम सब उनके प्रवचन और विचारो और जीवन को अपनी lifestyle में implement करने की कोशिश करे:)

इस message को spread करने की प्रेरणा miss Drashti Sanghvi से मिली -loads thank her!

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Ds Bhavana reflects the fact that nothing and nobody can protect U -काल सिंह ने मृग चेतन को घेरा भव वन में, नहीं बचावनहारा कोई, यो समझो जग में! #thoughtful 😍🤗 Martin Luther King, Jr. / Mother Teresa

Have you heard of Martin Luther King? He was a well known black civil rights activist in America. Despite the good causes he was fighting for and the number of followers he had; he was still assassinated. Nothing could protect him from death.

Do you remember Mother Teresa? She was an Albanian Roman Catholic nun who helped the sick, the poor, orphans, those who were terminally ill and many more. She was unwell for a few years and then had a heart attack in 1997. Despite the world’s prayers to make her well, she passed away. This reflects the fact that with even the best intentions and wishes, we cannot protect other and each being must endure their own karmas.

What’s the good in knowing and accepting this Bhavana? Well…once we endure the karmas that we have bound; as long as we take care to NOT acquire more, we will only need to shed what we have gathered already. Then, with the help of a self realised soul, we will be well on the way to attaining Moksha which is everlasting bliss. Explanation by Heena Modi - big thanks to her!

Under this reflection, one thinks that he is helpless against death, old age, and disease. The only way he can conquer death and disease is by destroying all his karma. The soul is his own savior, and to achieve total freedom and enlightenment, one takes refuge to the true path and to the five best personalities. They are Arihanta, Siddha, Acharya, Upadhyay and Sadhus. The refuge to others are due to delusion, and must be avoided. Complied by Pravin K. Shah, Jain Study Center of North.

अशरण का अर्थ है कहीं भी शरण नहीं है….चाहे सुरेन्द्र,असुरेन्द्र,नागेन्द्र हों,खगेंद्र..नरेन्द्र हों….वह भी काल रुपी सिंह के सामने हिरण के सामान हैं…और उनको भी शरीर को त्याग कर…नई योनियों में सारे महल राज पाट छोड़ के जाना पड़ता है…और कर्मों का फल भोगना पड़ता है…..चाहे कैसी भी मणि हो,मंत्र हो,तंत्र हो,बड़े से बड़ी शक्ति हो,माता,पिता,देवी,देवता,सेना,औषधि,पुत्र…या कैसा भी चेतन या अचेतन पदार्थ हो…मृत्यु से कोई नहीं बचा सकता है….तथा मृत्यु से कोई नहीं बच सका है…कहीं भी शरण नहीं है.यह अशरण भावना है इस अशरण भावना को भाने से समता भाव जागृत होता है..और इस भावना को भाने वाला जीव शरीर त्याग के समय शोक नहीं करता है..और न ही किसी अन्य के देह-अवसान में शोक करता है….और न ही संसार के भौतिक-सुखों में रति करता है!

Lord Bahubali aka Gomateshwara 60 feet monolith Idol @ Shravanabelagola dates from 978-993 AD [ On August 5, 2007, the statue was voted by Indians as the first of Seven Wonders of India.] Let's have a contemplation upon it!

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आचार्य विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य जिनवाणी पुत्र क्षुल्लक श्री ध्यान सागरजी महाराज द्वारा भक्तामर स्तोत्र पर प्रवचन
७-१०-१७
प्रवचन सुनने के लिए youtube के इस लिंक पर क्लिक करे -

https://youtu.be/E8LtiS71-6k