06.10.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Muni Kishanlal

Posted: 06.10.2017

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Jeevan Vigyan Academy


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News in Hindi

पूर्ण चन्द्रध्यान तथा प्रेक्षा षिविर प्रारम्भ

हांसी, 6 अक्टूबर 2017।

अष्विन पूर्णिमा महत्त्वपूर्ण दिवस है। यह ज्योतिषियों की दृष्टि में तथा आयुर्वेदाचार्य के अनुसार स्वास्थ्य और शक्ति के विकास का आधार है। चन्द्रमा मन का कारक है। मन की संस्थाओं का समाधान चन्द्रप्रभु के स्मरण से होता है। जो व्यक्ति अवसाद और मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हैं। उनके लिए ‘‘ऊँ ह्रीं श्रीं चन्द्र प्रभवे नमः मंत्र उपयोगी होता है। प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी ने रात्रि 8.30 से 10 बजे तक मंत्र का अनुष्ठान करवाया।

तेरापंथ भवन के विषाल प्रांगण में अनुष्ठान में भाग लेने वाले लोगों से खचा-खच भरा था। चन्द्रमा को एक टक देखते हुए मंत्र जाप का दीर्घ उच्चारण करते हुए बड़ी एकाग्रता से अभ्यास किया। मानसिक शान्ति का अनुभव किया। षिवर उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुनिश्री किषनलाल ने कहा कि आज प्रातः 5.30 बजे से ही तीन दिवसीय प्रेक्षाध्यान का अभ्यास षिविर (दिनांक 6-7-8 अक्टूबर) को प्रारम्भ हो गया। प्रेक्षाध्यान का तात्पर्य देखना। प्रियता अप्रियता के बिना केवल देखना प्रेक्षा है। मुनिश्री सबसे पहले ध्यान दीक्षा प्रदान करवाई उसकी चर्चा के सूत्रों का समझाया। पहला सूत्र है जागरूक रहना, प्रतिक्रिया रहित रहना। सबके साथ मैत्री तथा परिमित आहार सीमित भाषण, अधिक मौन का अभ्यास। यह षिविर शारीरिक, स्वास्थ्य, मानसिक शान्ति और भावनात्मक विकास का आधार बनता है। कायोत्सर्ग से तनाव मुक्ति और अनुप्रेक्षा से आदतों को बदला जाता है साथ ही चेतना को जागृत कर साधना के उच्च षिखरों का प्राप्त किया जाता हैंइस षिविर में प्रषिक्षक श्री राजकुमार जैन, मुनि निकुंजकुमार, षिविर संयोजक श्री सुभाष जैन (माढ़ा वाले) सभा अध्यक्ष श्री दर्षन कुमार जैन के अतिरिक्ति षिविरार्थी उपस्थित थे।

- राहुल जैन

English by Google Translate:

 

Full Moon and Exhibition Center

October 6, 2017


Ashwin full moon is an important day. It is the basis for the development of health and power in the eyes of astrologers and according to Ayurveda. Moon is the cause of the mind. The solutions of the minds of the mind happens with the memory of Chandraprabhu. People who are depressed and mentally unhealthy. For them, "O Hingh Shree Chandra Prabhwa Namah Mantra is useful. Observer 'Shishan Shree' Munishri Kishanlalji conducted a mantra ceremony from 8.30 am to 10 pm

In the Vishal Praghan of the Tharpanth Bhawan, there was a lot of expenditure on people who participated in rituals. Taking the moon a tick, he practiced with great concentration while uttering the chanting chant. Experienced mental peace.

While addressing the inauguration session, Munishree Kishan Lal said that from 3:30 in the morning, the practice of three-day auditorium was started on this day (dated 6-7-8 October). See the meaning of auditory observation. Preity is watching only without objection. Munishri first explained meditation initiation to the sources of his discussion. The first formula is to be aware, to remain unresponsive.

Mithai and finite diet with limited speech, practice of more silence with everyone. This scholar forms the basis of physical, health, mental peace and emotional development. By exerting stress from the eutrophication and changing the habit with intracranas, the higher heights of sadhana are obtained by awakening consciousness.

The participants were present on the occasion of the program Mr. Rajkumar Jain, Muni Nikunjkumar, Shivir Convenor Shri Subhash Jain (Ladies), Mr. Darshan Kumar Jain Additional Speaker of the Committee.

- Rahul Jain

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Source/Info

jeevan vigyan