04.10.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 04.10.2017
Updated on: 15.11.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
चार कारणों से मनुष्य को प्राप्त हो सकती है तिर्यंच गति: आचार्यश्री महाश्रमण

  • आगमाधारित पावन प्रवचन मंे आचार्यश्री तिर्यंच गति में जाने के कारणों का किया वर्णन
  • श्रद्धालुओं को माया-मृषा से बचने की दी पावन प्रेरणा
  • हाजरी का रहा क्रम, साधु-साध्वियों ने अपने संकल्पों को मजबूत बनाने को लेखपत्र का किया उच्चारण
  • राष्ट्रीय संस्कार निर्माण शिविर के समापन पर आचार्यश्री ने विद्यार्थियों को प्रदान किए आशीर्वाद
  • बच्चों ने आचार्यश्री के समक्ष दी अपनी भावाभिव्यक्ति


04.10.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः


जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को ‘ठाणं’ आगम में वर्णित तिर्यंच योनी में चार के चार कारणों का वर्णन करते हुए लोगों को माया और मृषा से बचकर अपनी आत्मा के साथ अपनी अगली गति को अच्छा बनाने की पावन प्रेरणा प्रदान की। वहीं हाजारी के क्रम में उपस्थित समस्त साधु-साध्वियों को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए हाजरी पत्र का वाचन किया तो साधु-साध्वियों ने सविनय बद्धांजलि हो अपने कृत संकल्पों को निष्ठा से पालन करने के संकल्पों को दोहाराया।

    बुधवार को कोलकाता के राजरहाट में स्थित महाश्रमण विहार के आध्यात्म समवसरण से महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने ‘ठाणं’ आगामाधारित अपने पावन में प्रवचन में कहा कि मनुष्य मरकर नरक गति में जा सकता है, तिर्यंच गति में जा सकता है, देव गति में जा सकता है और सिद्धावस्था को भी प्राप्त कर सकता है। अगर प्रश्न हो की कौन मनुष्य तिर्यंच गति में जा सकता है तो इसके आगम में चार कारण बताए गए हैं-पहला माया, दूसरा-निकृति, तीसरा-असत्य वचन और चैथा-कूट तोल-मान। इन चारों से आदमी तिर्यंच गति में जा सकता है।

    आचार्यश्री ने इन चारों का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि माया के कारण आदमी की मानसिकता में कुटिलता का समावेश हो सकता है। एक आदमी का मन साफ और निर्मल और दूसरे आदमी मन कपटी और कुटिल सो सकता है। आदमी के मन में कुटिलता भरी हो तो वह आदमी तिर्यंच गति में पैदा हो सकता है। जो आदमी जितना बुद्धिमान होता है वह कुटिलता भी उतनी बड़ी और उतनी चतुराई से कर सकता है। दूसरा कारण है निकृति अर्थात् ठगाई। आदमी दूसरों को धोखा दे देता है या कुछ लाभ के लिए दूसरे को ठग लेता है, वैसा आदमी भी तिर्यंच योनी में पैदा हाने का भागीदार हो जाता है। तीसरा कारण है-असत्य वचन। झूठ बोलने से आदमी तिर्यंच गति में पैदा हो सकता है। चैथा कारण है कूट तोल-मान यानी माप-तौल में गड़बड़ी करने वाला तिर्यंच गति मंे जा सकता है। इसलिए आदमी को सरल बनने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि माया-मृषा के कारण आदमी अवनति की ओर जा सकता है। आचार्यश्री ने हाजरी वाचन के क्रम में साधु-साध्वियों को पावन प्रेरणा प्रदान की। उसके उपरान्त समस्त साधु-साध्वियों ने लेख पत्र का उच्चारण करते हुए अपनी निष्ठा को दोहराया।

    आचार्यश्री ने राष्ट्रीय संस्कार निर्माण शिविर के समापन के अवसर पर विद्यार्थियों को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि सभी में संस्कार का निर्माण हो, उनके भीतर शुद्ध भाव पुष्ट हों तो उनका जीवन अच्छा बन सकता है। प्रतिभागी बालक-बालिकाओं ने गीत का संगान किया। संयोजक श्री रवि छाजेड़ ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्रेष्ठ शिविरार्थी बालक वैभव नाहटा और बालिका पूजा बोथरा, अनुशासित बालक संजोग पारख और अनुशासित बालिका नैना छाजेड़ के नामों की घोषणा की। बालक वैभव नाहटा ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। वहीं कोलकता शहर से लौटे मुनि योगेशकुमारजी ने आचार्यश्री के दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया और गुरु इंगितानुसार कार्य को पूर्ण करके वापस गुरुकुलवास में लौटने पर अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सभी प्रतिभागी बालक-बालिकाओं मंे पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र का वितरण भी किया गया। शिक्षक और प्रशिक्षकों भी स्मृति चिन्ह आदि देकर सम्मानित किया गया।

English [Google Translate]

Non-violence travel press release
Man can get triple speed for four reasons: Acharyaree MahaShraman

 

  • The description of the reasons for going to the speed of the Acharyashri triumphant
  • The impetus inspiration to save devotees from delusion
  • According to the order of the hajri, the monks used to pronounce their letters to strengthen their resolutions
  • Acharyishri blesses students on completion of National Sanskar Construction Camp
  • The children gave their spiritual powers to Acharyashree


04.10.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

Appreciating Acharyashri Mahasramanji, representative of Lord Mahavir of Jain Svitambar Terapanth Dharmasangha, on the occasion of 'Acharyashree Mahasramanji', a devotee of Lord Mahavir, describing the four reasons of four thirteen cows described in the 'Thanan' Agam to the devotees present in spirituality. By remaining alive with the soul, you have the power to make your next pace good. At the same time, the Acharyashree read the Hajrī letters while giving inspiration to all Sadhus and Sadhis in the order of humility, then the Sadhus and Sadhis recited their dedication to follow the resolutions of their respective resolutions.

In the discourse of 'Thanan' in his ascending prophecy in Thanh, Agamaparthi said that in the holy month of Mahasamam Vihar, situated in Rajarhat, Kolkata, on Wednesday, a person can go to hell, speed can go in motion, God can go in motion. And also can achieve sainthood. If there is a question of who can go in trials of motion, then there are four reasons for its advancement - first Maya, second, ascendant, third-untrue verse and Chaitha-koot-Tola-Mann. From these four people can go in trials of speed.

Acharyashri described in detail the four, that due to Maya, man's mentality can be included in the dexterity. The mind of a man is clean and pure and the other man can sleep deceitful and devious. If man is full of evil in the mind, then that person can be born in a trivial pace. The man who is as intelligent as possible can do the same tricks and tricks too much. The second reason is dedication. Man tries to deceive others or cheats others for some benefit, that person also becomes a participant in the triplet vagina. The third reason is- untrue promise. By lying, a man can be born in a trivial pace. Chaitha reason is that in the measurement of weights, we can measure it in a trivial speed. That's why a man should try to become simple. Acharyashree gave holy inspiration and said that due to maya and decease, man can lead to demotion. Acharyashree gave holy spirit to the sadhus and sages in the order of reading Hajri. After that, all Sadhus and Sadhis repeated their allegiance while pronouncing the letter of the letter.

Acharyashri gave holy inspiration to the students on the occasion of concluding the National Sanskar Construction Camp, that if all the samskaras are constructed, their purified qualities within them can become good, then their life can become good. The participant child-girls composed the song. Convenor Mr. Ravi Chhejed gave his brother-in-law. The names of the best scholarly child Vaibhav Nahata and Balika Pooja Bohra, disciplined child Sanjog Parakh and disciplined girl Naina Chhajed. Child Vaibhav Nahata also gave his brother-in-law At the same time, Muni Yogeshkumarji, who returned from the city of Kolkata, received a holy blessing after seeing Acharyashree and after completing the work as per the Guru, he gave his brother-in-law on returning to Gurukulvas. Awards and citations were also distributed among all the participating children and girls. Teachers and trainers were also honored with a memento and so on.

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