03.10.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 03.10.2017
Updated on: 15.11.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति

  • हिंसा और परिग्रह का आधिक्य आदमी को नरक गति में ले जाने का मुख्य कारण
  • साध्वीप्रमुखाजी ने अहिंसा को बताया शाश्वत, धु्रव और नित्य
  • आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे बाल गंगाधर महास्वामी मठ के पीठाध्यक्ष निर्मलानंद महास्वामी
  • आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त उन्होंने भी जीवन-विज्ञान और अहिंसा पर विचार किए व्यक्त
  • आचार्यश्री के बेंगलुरु चतुर्मास के दौरान अपने यहां पधारने का किया अनुरोध


03.10.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

मानवता के कल्याण के लिए अपनी श्वेत सेना के साथ अहिंसा यात्रा लेकर निकले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, मानवता के मसीहा, शांतिदूत, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगलवार को ‘अहिंसा परमो धम्मो’ को व्याख्यायित कर जन-जन को अहिंसक बनकर अपनी आत्मा और अपने जीवन का कल्याण करने का पावन संबोध प्रदान किया। तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने अहिंसा को शाश्वत, नित्य और धु्रव बताया। वहीं बेंगलुरु से चलकर बाल गंगाधर महास्वामी मठ के पट्टधर पीठाध्यक्ष स्वामी निर्मलानंदजी महास्वामी आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे। वे आचार्यश्री के साथ मंचासीन हुए। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन का श्रवण किया तदुपरान्त अपने विचार व्यक्त किए और जीवन-विज्ञान के विषय में चर्चा करने के साथ ही आचार्यश्री के वर्ष 2019 में बेंगलुरु चतुर्मास के दौरान अपने मठ आदि स्थानों में भी पधारने का अनुरोध किया तो मानों पूरा प्रवचन पंडाल जयघोष से गूंज उठा।

    मंगलवार को कोलकाता के राजरहाट स्थित महाश्रमण विहार परिसर में बने अध्यात्म समवसरण में आचार्यश्री के साथ महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी और बाल गंगाधर महास्वामी मठ के पीठाध्यक्ष निर्मलानंदजी महास्वामी भी विराजमान हुए। मंगल प्रवचन के मुख्य विषय ‘अहिंसा परमो धम्मो’ पर सर्वप्रथम असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने उद्बोध प्रदान करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में अहिंसा को परम धर्म माना गया है। क्योंकि अहिंसा ध्रुव है, नित्य है और शाश्वत है। भगवान महावीर ने कहा कि संसार का कोई भी प्राणी मारने योग्य नहीं है। इसलिए अहिंसा ही परम धर्म है।

    इसके उपरान्त अहिंसा यात्रा के प्रणेता और स्वयं अहिंसा के पुजारी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने ‘अहिंसा परमो धम्मो’ को व्याख्यायित करते हुए कहा कि नरक गति में जाने के चार कारण बताए गए हैं-अमर्यादादित हिंसा, अमर्यादित परिग्रह, पंचेन्द्रिय प्राणियों का वध और मांसाहार। इन चार कारणों में से प्रमुख दो हिंसा और परिग्रह नरक में ले जाने के मुख्य कारण है। हिंसा और परिग्रह का आधिक्य ही आदमी को नरक गति में ले जा सकता है। आदमी जब अपने जीवन में हिंसा और परिग्रह का आतिथ्य करता है तो वह स्वयं को नरक का भागी बना लेता है। इस कारण अपने लिए कितने दुःख उपार्जित कर लेता है। इसलिए अहिंसा ही परम धर्म है। नरक से बचने का साधन और आत्मोत्थान की ओर प्रगति कराने में अहिंसा की साधना ही साहयक बन सकती है। आदमी को ज्यादा गुस्सा नहीं, बल्कि प्रेम के भाव को जागृत करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी प्राणियों के प्रति मैत्री भाव, प्रेम रखने का प्रयास करे और अत्यधिक परिग्रह से बचने का प्रयास करे तो अहिंसा की साधना हो सकती है। आदमी के जीवनशैली में अहिंसा जुड़ जाए, व्यवहार में अहिंसा रहे तो आदमी की आत्मा का कल्याण हो सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि बहुत समय बाद आज निर्मलानंदजी महास्वामी का समागमन हुआ है, बहुत अच्छा है। जितना हो सके हम सभी संसार की आध्यात्मिक सेवा कर सकें और अहिंसा का प्रसार कर सके, अच्छा हो सकता है।

    श्री निर्मलानंदजी महास्वामी ने इस दौरान अपने मंगल विचार अभिव्यक्त किए। जीवन-विज्ञान और अहिंसा की चर्चा की और आचार्यश्री को बेंगलुरु में पदार्पण के उपरान्त अपने स्थलों में पधारने का अनुरोध किया।

    इसके उपरान्त बेंगलुरु चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मूलचंद नाहर, श्री दीपचंद नाहर, श्री ललित कुमार आच्छा ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष श्री सुरेन्द्र बोरड़ ने भी अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। विकास परिषद के सदस्य श्री बनेचंद मालू ने उपस्थित स्वामीजी को साहित्य प्रदान किया। महासभा के अध्यक्ष श्री किशनलाल डागलिया, अखिल भारतीय युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विमल कटारिया, बेंगलुरु चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मूलचंद नाहर आदि ने स्वामी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया।


English [Google Translate]

Non-violence travel press release
Ahimsa Yatra Pranata explained to 'Ahimsa Paramo Dhhamo'

  • The main reason for excesses of violence and propaganda to take man to hell
  • Sadhvi Pramukhjaji told nonviolence, eternal, Dhruv and continuous
  • Nirmalanand Mahaswamy, the President of Bal Gangadhar Mahaswami Math, who arrived in Mangal Sananidhi of Acharyashree
  • Acharyashree's after the Mangal discourse, he also expressed his thoughts on life science and non-violence
  • According to Aacharyaree's request for his visit to Bengaluru Chaturmas


03.10.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

Acharyashree Mahasramanji, the teacher of the Jain Shvetambar Teerapanth Dharmasangh, who came out of non-violence with the help of humanity for the welfare of humanity, represented the Ekadashmastashasta of Lord Sangrah, the representative of Lord Mahavira, the humanity of humanity, peace bearer, peace and non-violence, Acharyashree Mahishmanji on Tuesday declared 'Ahimsa Parmo Dhammo' -Being non-violent to the people, gave a warm address to the welfare of your soul and your life. Extraordinary Sadhvi Prabhu Mukhi of Terapanth Dharma Sangh called non-violence as eternal, ever and tactful. On the other hand, from Bangalore, the pilgrims of Baal Gangadhar Mahaswamy Math will reach the Mangal Sannidhi of Acharyashree, the Patthar Pitha president, Nirmalanandji Mahaswamy. He was a Manchasin with Acharyashree. After listening to the discussion of Acharyashri's mangal discourse, after expressing his thoughts and discussing about life science, in the year 2019, during the Bengali Chaturmas during Bengaluru Chaturmasa requested to go to the places of his Math as well as the complete discourse Pandal Jayabhosh Echo

On Tuesday, Nirmalanandji Mahaswami, the president of the Mahashwani Sadhvi Pramukhhushaji and Bal Gangadhar Mahaswami Math, along with Acharyashri, also took part in Spiritual Samarpan in Mahasamaran Vihar premises located at Rajarhat, Kolkata. The main theme of the discussion on 'Ahimsa Paramo Dhammo' was given by the extraordinary Sadhvi Pramukhajji, who said that non-violence is considered as the supreme religion in Indian culture. Because nonviolence is pole, it is eternal and eternal. Lord Mahavira said that no creature in the world is capable of killing. Therefore, non-violence is the ultimate religion.

After this, Acharyashree Mahasramanji, a progenitor of non-violence and non-violence, described himself as 'Ahimsa Parmo Dhammo' and said that four reasons for going hell to hell are mentioned- immense violence, unlimited surrender, killing of pancreatic creatures and non-vegetarians. Of the four reasons, the main reason for leading two violence and periphery is to hell. The excess of violence and periphery can lead man to hell. When a person makes a habit of violence and affinity in his life, he makes himself a part of hell. For this reason, how many grief is achieved for you. Therefore, non-violence is the ultimate religion. In the process of avoiding hell and making progress towards self-improvement, the practice of non-violence can only be helpful. Man should not try to awaken the sense of love, not more anger but rather the feeling of love. If man tries to love friendship, love, and to avoid excessive envy, then it can be a sadhana of non-violence. Non-violence can be added in the lifestyle of a man, non-violence in practice can be the welfare of a man's soul. Acharyashree said that after long time Nirmalanandji Mahaswamy has been joined, it is very good. As much as possible, we can serve the spiritual service of all the world and spread the non-violence, it can be good.

Shri Nirmalanandji Mahaswami expressed his thoughts in this regard during this time. Discussed life science and non-violence and requested Acharyashree to enter her place in Bengaluru after her debut.

Subsequently, the Chairman of the Bengaluru Chaturmas Migration Arrangement Committee, Mr. Mulchand Nahar, Mr. Deepchand Nahar and Mr. Lalit Kumar Achha gave their thoughts. Mr. Surendra Borard, Vice President, Calcutta Chaturmas Migration System, also gave his opinion. Shri Banchand Malu, Member of the Development Council, gave literature to Swamiji present. Mr. Kishanlal Daglia, President of Mahasabha, National President of All India Youth Council, Mr. Vimal Kataria, President of Bengaluru Chaturmas Migration System, Mr. Mulchand Nahar etc. gave a memento to Swami.

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