01.10.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 01.10.2017
Updated on: 15.11.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
कृतघ्न नहीं कृतज्ञ बनने का प्रयास करे मानव: महातपस्वी महाश्रमण

  • -आगमवाणी से आचार्यश्री नियमित करा रहे श्रद्धालुओं को लाभान्वित
  • -आचार्यश्री ने ‘निज पर शासन फिर अनुशासन’ को किया व्याख्यायित
  • -शासनश्री साध्वी चेतनाश्री जी स्मृति सभा भी गुरु सन्निधि में आयोजित


01.10.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

व्यक्ति के मानस परिवर्तन में आने वाली सूक्ष्म से सूक्ष्म बाधाओं का संपूर्ण विश्लेषण के साथ उन बाधाओं से आसान तरीके से बचकर अपने जीवन को निर्मल और शांतिमय बनाने की प्रेरणा प्रदान करने जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, अखंड परिव्राजक आचार्यश्री महाश्रमणजी ने रविवार को अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को कृतज्ञता को धारण करने, दुराग्रह से मुक्त होने के साथ ही अपने आप पर अनुशासन करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। वहीं आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में शासनश्री साध्वी चेतनाश्री की स्मृति सभा का आयोजन हुआ।

    रविवार को आचार्यश्री की ने अपनी आगमाधारित मंगल प्रवचन में लोगों को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अकृतज्ञता आदमी के अच्छी बात नहीं होती है। आदमी को कृतघ्न नहीं, बल्कि कृतज्ञ बनने का प्रयास करना चाहिए। जिसके द्वारा भी आदमी का उपकार हो, उसके प्रति सदैव आदमी को कृतज्ञ भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। दुराग्रह में आदमी किसी के गुणों को भी नकार देता है। आदमी को ऐसे व्यवहार से बचने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने ‘नीज पर शासन, फिर अनुशासन’ को व्याख्यायित करते हुए कहा कि आदमी को अपने खुद पर शासन करने का प्रयास करना चाहिए। अपने मन, वचन और इन्द्रियों पर संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने उपस्थित बच्चों को भी पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि बड़ों के अनुशासन में रहने वाले का जीवन में अच्छा विकास हो सकता है। जिद नहीं विनीत बनने का प्रयास करना चाहिए। अविनीत के जीवन का मार्ग ऊबड़-खाबड़ हो सकता है और विनीत का जीवन का मार्ग और सुन्दर और प्रशस्त बन सकता है। इसलिए सभी को अपने जीवन में विनीत, उपकारियों के प्रति कृतज्ञ भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त चतुर्मास की सम्पन्नता के उपरान्त पांच नवम्बर को लगभग 7.21 बजे महाश्रमण विहार से विहार करने तथा छह अक्टूबर को महाश्रमण विहार से बाहर साल्ट लेक में एक दिवसीय प्रवास की घोषणा की।

    आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में कालावली (हरियाणा) में गत दिनों देवलोक हुईं शासनश्री साध्वी चेतनाश्री की स्मृति सभा आयोजित हुई। आचार्यश्री ने उनके परिचय प्रस्तुत किया और उनकी स्मृति में चार लोगस्स का ध्यान करवाया। चतुर्विध धर्मसंघ ने चार लोगस्स का ध्यान अपने संघ की साध्वी को आध्यात्मिक भावांजलि अर्पित की। असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने उनके जीवन वृत्त को वर्णित किया। कालावली, हरियाणा से आचार्यश्री की सन्निधि में पहुंचे श्री दिनेश गर्ग ने भी साध्वीश्री के विषय में अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

    आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में गायक मनमोहन सिंह व पारसमल बच्छावत द्वारा ‘प्रज्ञा ज्योति’ सीडी को आचार्यश्री के चरणों मंे लोकार्पित किया गया। साथ ही उन्होंने सीडी के एक गीत को आचार्यश्री के समक्ष प्रस्तुति दी और आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद भी प्राप्त किया। अणुव्रत समिति कोलकाता की महिलाओं ने अणुव्रत का गीत का संगान किया।

    आचार्यश्री द्वारा भुवनेश्वर में वर्धमान महोत्सव की घोषणा के उपरान्त आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में भुवनेश्वर से श्रावक समाज उपस्थित था। सर्वप्रथम भुवनेश्वर के आचार्यश्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री प्रकाश बेताला ने अपनी श्रद्धासिक्त भावाभिव्यक्ति दी। उसके उपरान्त उपस्थित समस्त भुवनेश्वर श्रावक समाज ने आचार्यश्री के समक्ष गीत के माध्यम से अपनी कृतज्ञ भावों को अभिव्यक्त कर आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरान्त किडजोन के बच्चों ने भी मंच से सम-सामायिक विषयों पर नाट्य की प्रस्तुति देकर कर लोगों को सम-सामायिक बुराइयों से बचने के लिए उत्प्रेरित किया।

English [Google Translate]

Non-violence travel press release
Ungrateful attempts to be grateful to human: Mahatpu Mahasamana

  • Giving benefits to the devotees who are regularizing Acharyashree
  • Acharyashree has explained 'Nizar's rule then discipline'
  • Shastan Sadhvi Chetanashreeji Smriti Sabha also organized in Guru Sananidhi


01.10.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

With the complete analysis of the subtle and microcosmic obstacles in the mind change, with the help of those obstacles, to inspire them to make their life pure and peaceful, Jain Svetambara Teerapanth Dharam Sanggh's Ekadshamadhyasa, representative of Lord Mahavira, Acharyashree Mahasramanji, the unbroken Parivrajakshi, was present on Sunday in the worship of Spiritual devotee Not with to hold gratitude, be free of bias on my own to provide pure motivation to discipline. On this occasion, the memory gathering of Lord Sadhvi Chetanashree was organized at Acharyashree's Mangal Sananidhi.

On Sunday, Acharyashree gave inspiration to the people in his augmented Mangal discourse, saying that unskilledness is not a good thing for a man. The man should try to become thankless, but not to be thankful. Through which man should be thankful, always man should try to keep his gratitude. The man denies the virtues of someone in the abyss. The man should try to avoid such behavior. Acharyashree explained the principle of 'governance, then discipline' and said that man should try to rule himself on his own. You should try to keep your mind, your words and your senses on the senses. While giving the holy inspiration to the present children, Acharyashree said that living in the discipline of elders can have good development in life. Should not try to become insensitive to insistence. The path of the life of the ungrateful may be rugged and the path of the life of the unbeliever can become beautiful and spacious. Therefore, all should strive to be grateful towards the subordinates, in their lives, ungrateful. Acharyashree announced after the Mangal discourse, after commemoration of Chaturmas, on November 5, at around 7.21 pm, to commemorate Mahashmani Vihar, and on October 6, a one-day migration to Salt Lake outside Maha Shram Vihar.

A memorial assembly of Lord Shiva was organized in Mandalil (Haryana) in the morning of Acharyashree's mangal sannidhi. Acharyashri presented his introduction and remembered four logs in his memory. The Chattevidha Sangh Sangh offered the attention of the four logs to the Sadhvi of his Sangh to give spiritual Bhavanjali. Extraordinary Sadhvi Pramukhaji described his life story. Shri Dinesh Garg, who arrived in Sanchidhi of Acharyashree from Dinali, Haryana, also gave his brother-in-law about Sadhvi Shree.

The 'Pragya Jyoti' CD was inaugurated by the singer Manmohan Singh and Parasmal Bachhavati at the stage of Acharya Shri, in Acharya Shri's Mangal Sananidhi. At the same time he presented a song of CD to Acharyashree and received holy blessings from Acharyashree. The women of the atomic committee, Kolkata, composed the song of the atomic number.

After the declaration of Vardhaman festival in Bhubaneswar by Acharyashree, Shravak society was present in Bhachaneswar in Mangal Sananidhi of Acharyashree. Firstly, Shri Prakash Betla, President of the Board of Excellence, Mahabharam, Bhubaneswar, gave his devotional brother-in-law. After this, all the Bhuvaneshwar Shravak Samaj, present in the presence of Acharyashri, expressed their gratitude through the song and received blessings from Acharyashree. After this, Kidzone's children have also been motivated to perform stage plays on the subject from the stage and to save the people from common evils.

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