30.09.2017 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Published: 01.10.2017
Updated: 03.10.2017

News in Hindi

Impermanence of the world ~ राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असवार, मरना सबको एक दिन, अपनी अपनी बार ✿⊰ @ Lord Bahubali Svami aka Gommateshvara 45 feet statue @Karkala, Karnataka, India #foodforThought

Twelve Bhavnas (Reflections or Thoughts) Jain Religion puts a significant emphasis on the thought process of a human being. A person’s behavior and his actions are the reflection of his internal thoughts, day in and day out. It is not the action but intention behind the action results in the accumulation of Karma.One should be very careful about his thoughts, how he thinks, and the subject matter of his thought.

To make room for pure thoughts, and to drive out the evil ones, Jainism recommends to meditate twelve thoughts or Bhavnas. They enable people to attain mental peace and tranquility. If we lose our tranquility and equa imity on account of some events, no unhappy things will take place, if we can allow our minds to travel on the sublime waves of noble thoughts. The mind will remain calm and stable. These bhavanas are also called anupreksha.

Bhavana means the contemplations by means of which you impel your soul to carry out lofty reflections. The First bhavna is following.

Under this reflection, one thinks that in this world every thing such as life, youth, wealth, property, etc. are transient or subject to alteration. Nothing in the universe is permanent, even though the whole universe is constant. Spiritual values are therefore worth striving for as soul’s ultimate freedom and stability. This will help to break all earthly attachments. [Complied by Pravin K. Shah, Jain Study Center of North Carolina]

The word “Nitya” means Eternal, Permanent or Stable and “Anitya ” means Destructible.not Permanent,not stable. Anitya Bhavna means nothing is parmanent. Whatever you see or have today will not be there always. There is nothing is the world that will stay with you for ever, even your body. Take for example day. It starts with the sunrise and end with the sunset. Every day is followed by the night and every night is followed by a new morning. Night or day doesnt stay forever. Similarly the health, wealth, relations, cirsumstances, good times, bad times ………. nothing last forever.

You might be having close friendship with someone today but this might not remain the same in future. In young age most of us have a good health but as we become old, more and more diseases grips us and our health doesnt remain the same. Jainism believes transition is the way of life and nothing in the world can stop it. It can be explained better with the folllowing example:

In 1985 Robert Belfer, founder of Belco Patroleum, merged his oil outfit with Houston Natural Gas. The resulting company was renamed Enron. Belfer resigned after the merger to pursue his own investments, but kept his Enron stock, worth more than $700 million at the top. After the company filed for bankruptcy, Belfer’s oil fortune was a mere $110 million, money he’d pocketed in stock sales during the years before the company’s collapse. On the other hand we had Dhirubhai Ambani who was merely a small time broker in the beginning of his career and rose to become the richest man in the country.

The most important thing that comes out of this explaination is that just the way good times dont last for ever, the bad times also dont last forever. Bad times should be taken as challenges and not the end. They only help us becoming a better human being. So we should not lose hopes when the things are not going our way because it will not be like that always. A day will come that things will start going our way. Writtten by Ashish Jain @Jain Square - big thanks to him!

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जो अकेले चल कर मंजिल तक पहुचने का हौसला रखते है गैर भी उनके रास्ते मे हमसफ़र बन ही जाते है ऐसा इसलिये कहा गया है कि यदि आप किसी कार्य को करने का फेसला कर ले और संकल्प के साथ उस कार्य को करने के लिये दृढ़ता से आगे बढे तो आप को देखते हुये भीड़ भी आपके साथ साथ चल पड़ेगी #AcharyaVidyasagar #Jainism #JainDharma

आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी महाराज के मन मे भारत देश को समृद्ध शाली देश बनाने का जो सपना था उसे साकार करने के लिये उन्होंने मनुष्य को स्वावलंबी बनाने के लिये हथकरगा उद्योग को माध्यम बनाया और उनके इस मन्तव्य को जान कर कुछ उच्च शिक्षा प्राप्त नव युवकों ने अपनी नोकरी को छोड़ कर आचार्य भगवन के सपनो को साकार करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी परिणाम यह हुआ कि आचार्य भगवन के आशीर्वाद से आज वर्तमान में लग्वःग 400 हथकरगा यंत्र जिन पर वस्त्रों का निर्माण हो रहा है सभी जगहों पर चालू हो चुके हैं जिन में प्रति व्यक्ति को अपनी मेहनत के हिसाब से अधिक धन का उपार्जन हो रहा है

*वर्तमान में कई सारे केंद्र जो हथकरगा को चलाने का प्रशिक्षण तथा यंत्र को लगाने की विधि को विधिवत बताते है और उन उपकरणों से बने हुए उत्पादों को हम सभी तक पहुचाने का सुलभ माध्यम उतपन्न कराते है* इसी क्रम में *4 जून को श्री क्षेत्रपाल जी मंदिर ललितपुर* में *हथकरगा केंद्र मुंगावली* में बने कुछ उत्पाद बिक्री हेतु उपलब्ध रहेंगे जो आपको आसानी से पूरे दिन प्राप्त होंगे अतः आप सभी से निवेदन है कि आप *4जून की प्रातः से लेकर शाम* तक अपने अपने जरूरत की वस्तुओं को खरीद स्वावलंबन के इस आंदोलन को ओर भी गति प्रदान करे_
*आचार्य भगवन हिंदी भाषा, हथकरगा से स्वाबलंबी बनना, गौ पालन, उन्नत खेती जैसी योजनाओं से भारत को विकासशील देशों में अग्रणी देखना चाहते है ऐसे संत जिनकी विशाल सोच देश हित मे सर्वोपरि है आचार्य भगवंत के चरणों मे सादर नमन*

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शास्त्रोंमें में कहा ह अन्तर्मुहूर्त में केवलज्ञान हो सकता है।
भरत चक्रवर्ती को अन्तर्मुहूर्त में केवलज्ञान हो गया।
भगवन पार्श्वनाथ को 4 महिने में केवलज्ञान हो गया।
भगवन बाहुबली को 1 साल में केवलज्ञान हो गया।
भगवन महावीर 12 वर्ष और 15 दिन ध्यान करते रहे।

हम जब हात में जपमाल लेके जब जाप देते है तब दो तीन मणि के बाद भी मन एकाग्र नहीं हो पता । कहना बराबर है अगर हर १०८ मनियोंमे मन अगर एकाग्र हो गया तो माला और शरीर इधर ही रह जायेगा और हम सिद्धालय पहुँच जाएंगे, ध्यान करते समय योगिोंके मन भी निचे आते है। तब हम कौनसे महान तपस्वी है की हात में जपमाला लिए और ध्यान में एकाग्र हो गए। इसलिए पुरुषार्थ करते हुए संयम पूर्वक ध्यान करने की आदत डालने पड़ेगी। एक क्षण भी मन एकाग्र हो गया तो असंख्यात कर्मोंकी निर्जरा होती है। इसलिए हम सबको आत्म ध्यान करने की आदत डालने पड़ेगी। - परम पूज्य आचार्य श्री विद्यानंद मुनि महाराज #AcharyaVidyanand

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Happy Dassehra 😊 विजयदशमी/ दशहरा Celebrate करने के साथ ये समझलो! #भगवान्_राम #LordRama #VijayDashmi

राम जिन्होंने बरसो तपस्या करने के फल स्वरुप ये राम का पद पाया था...और अंत समय में दिगंबर दीक्षा लेकर मोक्ष चले गए.... जिन धर्म में आपको दिगम्बर मुद्राधारी वीतरागी राम का रूप मिलेगा... उनके जीवन में हर जगह मर्यादा से काम किया इसलिए उन्हें "मर्यादा पुरुषोतम श्री राम" [जो मर्यादा में रहे अपने को संयम में रखे, जो पुरुषो में उत्तम अर्थात महान जीवन है जिनका ] राजा दशरथ, श्री राम, लक्ष्मण ये सब रघुवंश के थे इनके वंश में बड़े बड़े राजा हुए और सब मर्यादा के धारक थे कहा भी गया है "रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाये पर वचन न जाये"

गुरु वशिष्ट से श्री राम योगवाशिष्ट "महारामायण" [महर्षि बाल्मीकि], वैराग्य प्रकरण में कहते है!!

नाहं रामो न में वांछा, भोगेश्वपीदमे मनः!
शान्तिमास्था तु मिछामी, स्वात्मन्नेव जिनो यथा!!

"जिन" शब्द का प्रयोग करते है श्री राम और कहते है हे गुरुवर... मैं वो राम नहीं हूँ जिसको प्रजा राम राम बुलाती है और अब मेरी वांछा भी नहीं, अब मैं मर्यादा पुरुषोतम के सत्कार को, अयोध्या नरेश के सम्मान को, और सारे वैभव को नहीं चाहता, और सांसारिक सुखो में भी मेरा मन नहीं लगता और अब मैं तो अपने ही स्वरुप में रम जाना चाहते हूँ..जिस राम में योगी रमण करते है उसी राम में मैं राम जाना चाहता हूँ...जिस प्रकार जिन अपने भीतर के राम में राम जाते है उसी प्रकार उस शुद्ध आत्मा राम में रम जाना चाहता हूँ [ये जिन शब्द को प्रयोग महर्षि बाल्मीकि ने अपनी रामायण में किया है ]

विजयदशमी पर्व इसलिए है की इस दिन से हमें अच्छे कर्म करने की शिक्षा मिलती है गर हम भी बेकार कर्म करेंगे तो हमें भी नरक जाना होगा! याद रखने ये वाक्य तीर्थंकर भगवान् के है और उनके वाक्य अटल है हमें बुरे छोड़ कर अच्छाई को लेना होगा! विजयदशमी पर्व जो की "बुराई पर अच्छाई की जीत" का प्रतिक है, गुण ग्रहण का भाव रहे नित, द्रष्टि न दोषों पर जावे!!
धर्मं में बताया गया है हमें किसी व्यक्ति की बुराई से बचना है तो उस व्यक्ति से नहीं "पाप से घ्रणा करो, पापी से नहीं " अगर हम किसी के बारे में कुछ गलत भी सोचते है तो अपने को पाप लगता है तो इस तरह रावण को जलते हुए देखने पर पाप लगता है, और रावण के पुतले में बहुत सारे पटाके होते है जिसके चलने पर बहुत सारे जीव मर जाते है और जहा तक धुआ जाता है जीव मरते जाते है और इन पटाको की आवाज से कितने ही जीव डर जाते है जब हमारे छोटे बच्चे ही डर जाते है तो!!

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