21.09.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 21.09.2017
Updated on: 15.11.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
सहन करने में आदमी बने शूर: आचार्यश्री महाश्रमण
-नवरात्र के प्रथम दिन आचार्यश्री ने कराया विशेष मंत्र का ध्यान
-आचार्यश्री ने क्षमा शूर, तपः शूर, दान शूर और युद्ध शूर को किया व्याख्यायित
-तेरापंथ प्रबोध आख्यान शृंखला को भी आचार्यश्री ने रखा जारी
-आचार्य चिन्मय मिशन के स्वामी चैतन्यानंदजी ने आचार्यश्री के समक्ष दी भावाभिव्यक्ति

21.09.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्र के प्रथम से लोगों जहां विशेष मंत्र जप का अभ्यास करना आरम्भ कराया तो वहीं अपने नियमित मंगल प्रवचन में आगम में वर्णित चार प्रकार के शूरों के वर्णन करते हुए आदमी सहन करने में शूर बनने की पावन प्रेरणा प्रदान की। वहीं आचार्यश्री के मंगल सन्निधि में पहुंचे आचार्य चिन्मय मिशन के स्वामी चैतन्यानंदजी ने आचार्यश्री के दर्शन किए, प्रवचन सुनने के बाद अपनी श्रद्धासिक्त अभिव्यक्ति दी।

गुरुवार को आचार्यश्री की सन्निधि में उपस्थित श्रद्धालुओं को उस समय विशेष अवसर प्राप्त हुआ जब आचार्यश्री लगभग पौने दस बजे के आसपास अध्यात्म समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को विशेष मंत्रों का प्रयोग प्रारम्भ कराया। लगभग पन्द्रह से बीस मिनट तक चले मंत्र प्रयोग से लाभान्वित हुए श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने नित्य की भांति अपने मंगल प्रवचन से लाभान्वित कराते हुए कहा कि ‘ठाणं’ आगम में चार प्रकार के शूरों का वर्णन किया गया है। पहला क्षांति शूर, दूसरा तपःशूर, तीसरा दान शूर और चैथा युद्ध शूर।

आदमी के जीवन में शक्ति का बहुत विशेष महत्त्व होता है। विशेष शक्ति संपन्न होना बहुत गौरव की बात है। आचार्यश्री ने चारों प्रकारों के शूरों का वर्णन करते हुए कहा कि क्षांतिशूर अर्हत् होते हैं। आचार्यश्री ने भगवान महावीर की क्षमाशीलता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने अपने साधनाकाल में अनेक कष्टों को सहा और उन्होंने क्षमा किया। तपस्या में शूर अनगार अर्थात् साधु को कहा गया है। साधु के समान तपस्या में शूर कोई नहीं होता। दान शूर कुबेर को कहा गया है और युद्ध शूर वासुदेव को बताया गया है। साथ ही जो युद्ध में शूर होता है वह मृत्यु के बाद नरक गति में ही जाता है।

आचार्यश्री ने लोगों को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को अपनी शक्ति का नियोजन को शांति प्रदान करने, किसी को सुरक्षा प्रदान करने, किसी की सहायता करने या किसी का भला करने में प्रयोग करना चाहिए। किसी का अहित करने, किसी को कष्ट पहुंचाने, किसी का विश्वंस करने में आदमी को अपनी शक्ति का प्रयोग करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि यदि शक्ति सज्जन के पास हो तो वह दूसरों को सुख प्रदान करने वाली और दुर्जनों की शक्ति दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाली होती है। आदमी को अपनी शक्ति दूसरों की सहायता करने में प्रयोग करने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही आदमी को क्षमा करने और सहन करने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त ‘तेरापंथ प्रबोध’ व्याख्यान शृंखला को भी अनवरत जारी रखा। वहीं आचार्यश्री की सन्निधि में पहुंचे आचार्य चिन्मय मिशन से जुड़े स्वामी चैतन्यानंदजी ने अपने हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरा परम सौभाग्य है जो आम जैसे महासंत के दर्शन हुए। आचार्यश्री के प्रवचनों से अभिभूत चैतन्यानंदजी ने एकाबार पुनः आचार्यश्री को श्रद्धासिक्त विनयांजलि अर्पित की और आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य तुलसी महाश्रमण एजुकेशन सेंटर एवं रिसर्च फाउण्डेशन के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र दुगड़ ने स्वामीजी को साहित्य प्रदान कर सम्मानित किया।

English [Google Translate]

Non-violence travel press release
Man made brave to bear: Acharyashree Mahasamani

  • Aacharyishri meditates special mantra on the first day of Navratri
  • Acharyashree explained forgiveness, bravery, bravery, charity and war hero to brave
  • According to the book, Prabodh Sakhan
  • Chaitanyanandji, the master of the Acharya Chinmoy Mission, gave the Bhavbhyavyakti before Acharyashree


21.09.2017 Rajarhat, Kolkata (West Bengal):

 Jain Shwetambar Teerapanth Dharmasangha Ekadashamadhasta, representative of Lord Mahavira, Principal of Ahimsa Yatra, peace bearer Acharyashri Mahasramanji started the practice of chanting the special mantra to the devotees present in the spiritual Samvandar, from the beginning of Shardhiya Navaratri. Describing the four types of heroes described in Provided Mr. sacred inspiration. At the same time, Acharya Chinmay Mission Swami Chetanyanandji, who arrived at Mangal Sananidhi, visited Acharyashree, after listening to the discourse, gave his reverential expression.

On Thursday, the devotees present at the sacrament of Acharyashri received special occasion when Acharyashree started using special mantras to devotees present in spiritual Samvandar around about ten in the morning. By benefiting from his mangal discourse, Acharyashree, benefited from the mantra experiment which lasted from about fifteen to twenty minutes, said that the four types of heroes have been described in 'Thanan' Agam. First Shanti Shunor, second Tasheshur, third donation Shur and Chatha war brave

Power has a very special significance in the life of a man. Due to special power, it is very honorable. Acharyashree described the four types of heroes as saying that the kshatishuras are qualified. Acharyashree described the apology of Lord Mahavira, saying that Lord Mahavira suffered many troubles during his sadhana and he pardoned. In the penance, the brave Anger is said to have been told. There is no one brave in austerity like a monk. Dan Shur Kubair has been told and war hero Vasudev has been told. Also, the warrior who is brave in war goes into hell after death.

Acharyashree gave inspiration to the people and said that man should use his power to give peace to peace, to provide protection, to help someone or to do good to someone. To harm someone, to harass anyone, man should try to avoid using his power to make someone trust in someone. Acharyashree said that if the power is with the gentleman then he is giving pleasure to others and the power of the wicked is to hurt others. Man should strive to use his power to help others. Also man should try to forgive and bear.

Acharyashree continued to follow the 'Teerapanth Prabodh' lecture series after the Mangal discourse. Swami Chetananandji, who was associated with Acharya Chinmay Mission, who came to the Sanchidhi of Acharyashree, expressed his heartbreak and said that today is my ultimate fortune which is visible to the Mahatmas like the mango. Chaitanyanandji, once overwhelmed by the teachings of Acharyashree, once again presented the devotional vinayanjali to Acharyashree and received a holy blessing from Acharyashree. The President of Acharya Tulsi Mahasamana Education Center and Research Foundation Mr. Surendra Dugad honored Swamiji by giving literature.

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