14.09.2017 ►TSS ►Terapanth Sangh Samvad News

Posted: 14.09.2017
Updated on: 10.01.2018

Update

15 सितम्बर का संकल्प

*तिथि:- आसोज कृष्णा दशमी*

शुद्ध भावों के साथ हो जब सुबह की शुरुआत।
मन रहता प्रफुल्लित दूर भागते सब झंझावात।।

📝 धर्म संघ की तटस्थ एवं सटीक जानकारी आप तक पहुंचाए
🌻 *तेरापंथ संघ संवाद* 🌻

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जैनधर्म की श्वेतांबर और दिगंबर परंपरा के आचार्यों का जीवन वृत्त शासन श्री साध्वी श्री संघमित्रा जी की कृति।

📙 *जैन धर्म के प्रभावक आचार्य'* 📙

📝 *श्रंखला -- 152* 📝

*विलक्षण वाग्मी आचार्य वज्रस्वामी*

*जीवन-वृत्त*

*गृहिणामन्न दारिद्र्यादल्प भोजन कारिणाम्।*
*बभूव नित्यमप्यूनोदर यातिनाभिव।।313।।*
*(परिशिष्ट पर्व, सर्ग 12, पत्रांक 251)*

भोजन पानी की गवेषणा में कठिन परिश्रम करने के बावजूद भी भिक्षा की अल्पता से निरंतर का ऊनोदरी तप सबके लिए सहज नहीं था। अनेक श्रुतधर, स्वाध्यायी, ध्यानी, सेवाभावी, व्याख्यानी, शासन प्रभावक, बाल, वृद्ध, युवा मुनि दुष्काल की चपेट में आहत होकर काल कलवित होने लगे। एक दिन प्रबुद्ध, विनयी, विचारशील शिष्यों ने मिलकर वज्रस्वामी से करुण स्वरों में निवेदन किया।

*सीदन् संघः प्रभो! पार्श्वमाययौ रक्ष रक्ष नः।*
*वदन्निति ततोः वज्रप्रभुस्तन्निदधे हृदि।।150।।*
*(प्रभावक चरित्र, पृष्ठ 7)*

करुणानिधे! आप लब्धिधर हैं। विशिष्ट शक्तियों से सम्पन्न हैं। सब प्रकार से सक्षम हैं। विरल विशेषताएं आपके व्यक्तित्व में विकासमान हैं। आप जैसे धीर, वीर, गंभीर, संघहितचिंतक, प्रज्ञाधर आचार्य के होते हुए भी धर्म संघ विकटातिविकट संकट से जूझ रहा है। धर्म संघ की सुरक्षा के लिए इस समय आपको अवश्य सोचना चाहिए, विशिष्ट लब्धि जन्य शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए।

*सङ्घप्रयोजने विद्योपयोगी ऽपि न दुष्यति*
*।।320।।*
*(परिशिष्ट पर्व, सर्ग 12, पत्रांक 252)*

संघीय प्रयोजन के लिए विद्या के उपयोग से संयम जीवन की प्रवृति दूषित नहीं होगी। यह धर्म संघ का चिंतन है। वीतराग शासन में लब्धिजन्य शक्तियों का प्रयोग सर्वथा वर्जित है। किसी भी स्थिति में लब्धि का प्रस्फोटन करना जिनाज्ञा सम्मत नहीं है। वज्रस्वामी इस बात को अच्छी तरह से जानते थे, फिर भी दुष्काल जनित भीषण संकट से धर्म संघ को बचाने के लिए उन्होंने गगनगामिनी विद्या का प्रयोग किया। वज्रस्वामी ने विशाल पट फैलाया। संघ को उस पर बैठा कर स्वयं सब के मध्य में आसीन हुए।

*वज्रर्षिणां भगवता विद्याशक्यता प्रयुक्तया।*
*उत्पुप्लुवे पटो व्योम्नि पवनोत्क्षिप्ततूलवत्*
*।।323।।*
*(परिशिष्ट पर्व, सर्ग 12, पृष्ठ 252)*

विद्याबल के प्रभाव से संघ सहित पट वायुयान की भांति आकाश की ओर ऊपर उठने लगा। वज्रस्वामी के जीवन के इस प्रसंग पर कई प्रश्न दिमाग को कुदेरते हैं।

*वे प्रश्न कौनसे हैं...?* जानेंगे... हमारी अगली पोस्ट में... क्रमशः...

प्रस्तुति --🌻तेरापंथ संघ संवाद🌻
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Update

आज की ebook है

*आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की कृति -*
*प्रेक्षा ध्यान: प्रेक्षा ध्यान आधार और स्वरूप*

प्रस्तुत पुस्तक में प्रेक्षा आधार, अर्थ, स्वरूप के विषय में विस्तृत चर्चा की गयी है । इसमें है:
💧प्रेक्षा ध्यान अर्थ व्यंजना ।
💧प्रेक्षा ध्यान के ध्येय के बारे में
💧प्रेक्षा ध्यान उपसंपदा की व्याख्या
💧इसमें है अप्रमाद व एकाग्रता के बारे में
💧कायोत्सर्ग़, अंतरयात्रा,श्वास प्रेक्षा,चैतन्य केंद्र प्रेक्षा,लेश्या ध्यान भावना और अनुप्रेक्षा का सूक्ष्म विवेचन ।
💧प्रेक्षा ध्यान उपयोगी आसान प्राणायाम मुद्रा व ध्वनि ।
💧क्यों महत्व की है वर्तमान क्षण की प्रेक्षा ।
💧विचार प्रेक्षा व आनिमेष प्रेक्षा क्या है ।

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*वर्ष में एक बार प्रेक्षा ध्यान शिविर में ज़रूर भाग लेकर देखे - जीवन बदल जाएगा । जीने का दृष्टिकोण बदल जाएगा ।*

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👉 प्रेक्षा ध्यान के रहस्य - आचार्य महाप्रज्ञ

प्रकाशक - प्रेक्षा फाउंडेसन

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