26.08.2016 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Published: 26.08.2016
Updated: 05.01.2017

Update

रावण ने एक पराई स्त्री सीता का अपहरण किया और उनको अपनी पटरानी बनाना चाहा,... #mangitunigi #Jainism #Ramayan #Ravan #Tirthankara

जब रावण बहुत सारी विद्या प्राप्त करके दिग्विजय करने के लिए निकलता है तो बहुत राजाओ को हराता हुआ चलता है और इस विजययात्रा में रावण नलकूबर की स्त्री का प्रेमप्रस्ताव को ठुकराकर अपने को ऊँचा उठाता है और केवली भगवान् का उपदेश सुनकर प्रतिज्ञा करता है की मैं उस परनारी का उपभोग नहीं करूँगा जो स्वयं मुझे नहीं चाहेगी और दूसरी बड़ी बात जब श्री राम हनुमान जी को लंका भेजते है की सीता का समाचार लाओ वो कैसी है तब हनुमान जाते है वहा पर बन्दर का रूप बनाकर और लंका में जो उत्पात मचाते है वो तो सबको पता है और रावण के राजमहल की छत को एक लात मरते है और वो छत समुद्र में जाकर गिरजाती है फिर लोट कर आते है और राम को बोलते है आपकी सीता पवित्र और निष्कलंक है तब राम बोलते है ऐसा कैसे संभव है वो रावण सीता को लगाया फिर भी सीता निष्कलंक तब हनुमान जी, सुघ्रीव, इत्यादि लोग थोडा सा हँसते है और बोलते है "रावण विधाधर है उसकी -आकाशगामिनी विद्या- नष्ट हो जाती अगर वो सीता को छुने की कोशिश भी करता"

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✿ जब रावण का अंत समय आगया था तो... #mangitungi #Jainism

श्री राम लक्ष्मण से बोलते है जाओ रावण के पास जाओ और उसने कुछ उपदेश ग्रहण करो तब लक्ष्मण जाते और रावण को बोलते है मेरे बड़े भैया ने बोला है की आपसे कोई उपदेश ले तो आप मुझे उपदेश दीजिये तो रावण कोई उत्तर नहीं देते तो लक्ष्मण वापस आजाते है और राम पूछते है कोई उपदेश नहीं लिया तब राम पूछते है तुम कहा खड़े थे..लक्षमण बोलते है रावण के सर की तरफ तो राम बोलते है जिससे शिक्षा लेनी होती है उनके चरणों में खड़ा होना पड़ता है....और जाओ उनसे उपदेश ग्रहण करो..फिर रावण राम से क्षमा याचना करते है और लक्ष्मण को जीवन के अनमोल सूत्र बताते है...

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जैन समाज का पावन पर्व पर्युषण के उपलक्ष्य में आगामी 29 अगस्त से 6 सितंबर तक सुरत के लिए "OFFICE TIMES " निर्धारित किया है जिसके तहत जैन समाज की सभी दुकानें सुबह 12 बजे खुलेगी और शाम 5 बजे बंद होगी । #Parushan #Jainism #Surat SHARE IT PLEASE

इसकी सूचना लोगों तक पहुंचाने हेतु दुकानों के बाहर सुचना चस्पा की गई है । लोगों को धर्म ध्यान से जोडने के लिए PL YE SMS ALL INDIA K JAIN SANGHO... JAIN TRADERS... MUNIMJI. KO SEND KARO PURE HINDUSTAN ME SAMAN MAHOL BANE

श्री जैन संघ को खुब खुब बधाई 👍👍

Update

Sad news:(Some people work amazing but never be in limelight so he was that kind of personality! A very kind, simple, humble & never want to be in limelight. Sri. Shantiraj Shastrigalu of Shravanabelagola passed away. #Shravanabolagola #Shantiraj #Jain

In the early morning 03:45 am of 26th Aug 2016 in Sharavanabelagola Sri Shantiraj Shastrigalu passed away. He was 94 years, Senior Sanskrit & Jain Scholar, Sanskrit Guru (Vidya guru) of many *Bhattarakaru including Sharavanabelagola *Bhattarakaru. He was the vidvaan of Shravanabelagola Matha/Monastery, highly respected person in Jain community.

*Bhattarkaru: Bhattarakaru is the head of Jain Matha/Monastery. There are more than 10 Jain Matha in south India, spread across Karnataka, Tamil Nadu & Mahabharata. Shravanabelagola Jain Matha & Humcha Jain Matha are the oldest.

Rest in peace! Om Shanti
Info shared by Mr. Naveen Sankighatta [ Oxford, UK ]

✿ राम कोन थे #mangitungi #Jainism #Ramayan

अंत समय में दिगंबर दीक्षा लेकर मोक्ष चले गए.... एक तरफ आपको राजा राम का रूप मिलेगा और जिनेन्द्र प्रणित धर्म में आपको दिगम्बर वीतरागी राम का रूप मिलेगा... उनके जीवन में हर जगह मर्यादा से काम किया इसलिए उन्हें "मर्यादा पुरुषोतम श्री राम" [जो मर्यादा में रहे अपने को संयम में रखे, जो पुरुषो में उत्तम अर्थात महान जीवन है जिनका और जो राम अर्थात भगवान आत्मा है...]

हनुमान, सुघ्रीव, नल, नील, महानील, गवा, गवाख्य ये कौन थे? - ये विद्याधर और बड़े बलशाली थे, सही में ये बन्दर [वानर] नहीं बल्कि विद्याधर थे जिसका अर्थ है की इनमे कोई भी रूप बनाने की शक्ति थी और इनके वंश का नाम वानरवंश था और इनके ध्वज का चिन्ह भी बन्दर थे, लेकिन समय के साथ लोग इनके सही रूप को न समझने के कारन इनको बन्दर मानने लगे, जीवन के अंत में इन्होने दिगंबर दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त किया!

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News in Hindi

Osam news:) कोटा के कैथून कस्बे के एक मकान में नींव की खुदाई के दौरान भगवान महावीर स्वामी की 750 साल प्राचीन प्रतिमा प्राप्त होने से जैन समाज में हर्ष... विश्व जैन संगठन #Jainism #Mahavira #Ancient #ASI #Tirthankara

श्रीनाथ सोनी जी के मकान की खुदाई में प्राप्त यह प्रतिमा काले पाषाण की है और भगवान इसमें पद्मासन लगाए हैं। प्रतिमा पर संवत 1309 खुदा है। प्रतिमा प्राप्त होने की खबर लगते ही दर्शन के लिए प्रदेशभर से जैन समाज के लोग पहुंचने शुरू हो गए। प्रतिमा को विधि-विधानपूर्वक प्रथम शुद्धि करके स्वर्णकार समाज के नोहरे में विराजमान किया गया। आज पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में प्रतिमा समाज के सुपुर्द की जाएगी। एएसपी पवन जैन ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से 4 सुरक्षा गार्ड तैनात किए हैं।

रावण, मेघनाथ, कुम्भकर्ण - ये कौन थे? #Jainism #Mangitungi #Ramayan

इनके वंश का नाम राक्षशवंश था वास्तव में ये राक्षश नहीं थे और राक्षश द्वीप पर रहते थे, जैन धर्मं को मानने वाले तीर्थंकर के भक्त थे, क्या रावण के दस मुख थे! नहीं! बचपन में जब रावण खेल रहा था तो इनके गले में पड़ी हुई नो रत्नों की माला में इनके नो मुख दिखाई दिए और इनका नाम दशनन होगया... रावण ने बहुत तपस्या की थी और और पूर्व कर्म का ऐसा उदय आया की उन्हें ऐसे युद्ध हुआ और उन्हें नरक जाना पड़ा और ये सब शाकाहारी थे, मांसाहार का तो सेवन सोच भी नहीं सकते थे, रावण शांतिनाथ भगवन के बहुत बड़े भक्त थे, एक बार भक्ति करते हुए वीणा [एक बैंड] बजाते हुए वीणा के तार टूट गए तो इन्होने अपने हाथ की नाडी निकाल ली और भक्ति करने लगे, अभी तो नरक में है रावण भविष्य में तीर्थंकर बनेंगे!! पर रावण का चरित्र अपने आप में एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व है. रावण सब कलाओं में पारंगत और ज्ञानी था. अंततः लक्ष्मण रावण को मारता है. अंत में, राम, जो एक ईमानदार जीवन जीते हैं, राज्य त्याग के बाद, एक जैन साधु बन जाते हैं और मोक्ष पा लेते है.. दूसरी ओर, लक्ष्मण और रावण नरक में जाते हैं. हालांकि यह भविष्यवाणी भी है कि अंततः वे दोनों ईमानदार व्यक्ति के रूप में पुनर्जन्म लेंगे और उनके भविष्य के जन्म में मुक्ति प्राप्त हो जाएंगी रामायण में भी भगवान राम किसी न किसी रूप में रावण की विद्वता के कायल हैं. राम ने ही लक्षमण को रावण से नीति की शिक्षा लेने की लिए भेजा. तो फिर किस कारण रावण राक्षसत्व ढो रहा है? क्यूँ हमारे इतिहासकारों ने रावण के गुणों को आम आदमी पर ज़ाहिर नहीं होने दिया? सामान्यतः कहा जाता है की पौराणिक राजा लेखकों से अपनी इच्छानुसार इतिहास लिखवाते थे. अगर यह सच है तो हों सकता है शायद इसी कारण सुग्रीव, अंगद और हनुमान जी भी आज तक वानरत्व ढो रहे हों. वाल्मीकि रामायण अनुसार रावण एक वीर, धर्मात्मा, ज्ञानी, नीति तथा राजनीति शास्त्र का ज्ञाता, वैज्ञानिक, ज्योतिषाचार्य, रणनीति में निपुण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्म ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं का जानकार था। एक पंचेन्द्रिय जीव के पुतले को जलता हुआ देख अनुमोदना करना, खुश होना ये पाप बांध का कारण है, वैसे रावण नरक गया, फिर रावण के जीवन में जो बुराई थी उससे बचो जिससे हमें नरक न जाना पड़े, फिर रावण ने बुरे कर्म किये और नरक जाना पड़ा, मेघनाथ, कुम्भकर्ण ये दोनों तो मोक्ष गए है!! ओह...मोक्ष और सिद्ध शिला पर विराजमान जीव के पुतले जलते हुए खुश होना!! ओह..क्या गति बंध होंगा, क्या पाप बंध होगा, जैसे पत्थर पर लकीर को मिटाया नहीं जा सकता ऐसे कर्मो का बंध होगा जिसको भोगना ही पड़ेगा...

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