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Published: 24.07.2016
Updated: 23.10.2017

Jeevan Vigyan Academy


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कृतिदेव यहां दिल्ली उत्तर मध्य सभा द्वारा तपस्वी अभिनन्दन मंत्र दीक्षा

माॅडल टाउन, नई दिल्ली, 24 जुलाई, 2016।

प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी व मुनिश्री विजयकुमारजी के सान्निध्य में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली उत्तर मध्य सभा की ओर से तपस्वी श्री पारसमल बोथरा का अभिनन्दन किया गया। ज्ञातव्य है कि श्री पारसमल बोथरा भीनासर (बीकानेर) प्रवासी मुनिश्री भव्यकुमारजी के संसार पक्षीय पिता हैं। तपस्वी श्री पारसमल बोथरा ने आज 54 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया, उनके 75 दिन की तपस्या का भाव है। इस दौरान जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा दिल्ली उत्तर मध्य के अध्यक्ष श्री विनोद भंसाली, मंत्री श्री दीपक जैन ने साहित्य व माल्यापर्ण द्वारा सम्मान किया।

‘शासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी ने कहा कि तपस्या के द्वारा व्यक्ति अपनी आत्मा को निर्मल बना सकता है, तपस्या के द्वारा पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा होती है। व्यक्ति को अपनी शक्ति को छिपाना नहीं चाहिए। संकल्प शक्ति के द्वारा कोई भी कार्य किया जा सकता है। जिस व्यक्ति के अंतर मन में यह बात बैठ जाती है कि वह चाय के बिना नहीं रह सकता है तो वह व्यक्ति नषे को भी छोड़ सकता, प्रयोग के द्वारा चाय अथवा नषे की बुरी आदत से भी छुटकारा पाया जा सकता है। प्रेक्षाध्यान के द्वारा व्यक्ति शान्त और श्रेष्ठ जीवन जी सकता है।

मुनि विजयकुमारजी ने कहा कि चातुर्मासकाल चल रहा है, इस समय कुछ न कुछ तपस्या चलनी चाहिए। त्याग, तपस्या जीवन में चलती रहे तो व्यक्ति अपने जीवन को परम से जोड़ सकता है। इस अवसर पर मुनिश्री ने ‘‘तपसी के तप ने करां प्रणाम’ गीत का संगान किया। मुनि निकुंजकुमारजी ने भी उद्बोधन में कहा माता-पिता स्वयं की सुरक्षा एवं सुखी जीवन के लिए अपनी संतानों को ज्ञानषाला में शामिल करें। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती भारती रांका ने किया।
मंत्र दीक्षा समारोह प्रमाण पत्र वितरण

मुनिवृन्द के सान्निध्य में राजेन्द्र नगर ज्ञानषाला व दिल्ली उत्तर मध्य के ज्ञानार्थियों ने मंत्र दीक्षा ग्रहण कि इस अवसर पर मुनिश्री किषनलालजी ने ज्ञानषाला के विद्यार्थीं को मंत्र दीक्षा प्रदान की। साथ कहा हम जिनदेव के अनुयायी हैं, इसलिए जैन हैं, जैन संस्कारों को जीवित रखने के लिए मैं जैन हूं जिसका आचार और विचार श्रेष्ठ होता है वह जैन कहलाता है वह शाकारी होता है, व्यसनों से दूर रहता है। मंत्र दीक्षा की किट तेरापंथ युवक परिषद, राजेन्द्र नगर दिल्ली के कोषाध्यक्ष श्री पुखराज लोढा, श्री अरिहंत सिंघी, श्री मनीष पुगलिया ने भेंट की। तेरापंथ युवक परिषद् के सदस्यों द्वारा विजय गीत व राजेन्द्र नगर ज्ञानषाला के बच्चों ने भिक्षु अष्टकम प्रस्तुत किया। श्री सुरेन्द्र सोनी ने गीत की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर ज्ञानषाला के ज्ञानार्थियों को दिल्ली उत्तर मध्य सभा अध्यक्ष श्री विनोद भंसाली ने जैन विद्या प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यक्रम का संचालन ज्ञानषाला प्रभारी दिल्ली के श्री विकास सुराणा ने किया।

- अषोक सियोल

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