04.02.2015 ►Leaving Fatehpur ►Acharya Mahashraman ►Ahimsa Yatra

Posted: 04.02.2015
Updated on: 21.07.2015

04.02.2015

His Holiness Acharya Mahashraman started off his journey this morning from Fatehpur. The Ahimsa Yatra that passed through the town became a matter of curiosity for the people. People came out of their houses and also looked out through their windows and terrace and beheld passing entourage of the pioneer of Ahimsa Yatra with inquisitiveness. Many people were benefitted by Gurudev's address and also accepted the vow to lead an addiction free life.

The green fields of banana,mustard, pigeon pea,wheat and the trees of eucalyptus and mangoes standing in a row on both the sides of the road provided beauty to eyes of the beholder. It is slightly cold when the journey starts but as it proceeds towards completion the shining sun replaces the chill with heat. The sun, which is directly facing Gurudev and his journey towards east, is unable to hinder his equanimity and tolerance.

After travelling for 10 kms Gurudev reached the primary school of Tilyani Bilinda and stayed there for the day.

In the morning program, Gurudev in his sermon, inspired the people to protect themselves from sins. This noon, the volunteers of Ahimsa Yatra, got a golden opportunity to be in Gurudev's presence and serve him. Gurudev addressed them as well with his holy words. Today, there was a continuous flow of villagers who came to meet Gurudev to seek his guidance and were benefitted from it.

🙏 विज्ञप्ति🙏

4 फरवरी। परम श्रद्धेय आचार्यवर प्रातः फतेहपुर से प्रस्थित हुए। शहर के बीच से गतिमान अहिंसा यात्रा लोगों की कुतूहल का विषय बनी हुई थी। लोग अपने घरों से बाहर निकलकर अथवा घर की छत, खिड़की आदि से अहिंसा यात्रा प्रणेता और उनके कारवां को उत्सुकता के साथ निहार थे। अनेक लोागें को पूज्यवर से पावन संबोध प्राप्त हुआ। कई लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प भी स्वीकार किया।

सड़क के दोनों ओर अवस्थित केला, सरसों, अरहर, गेहूं की लहलहाती फसल और कतारबद्ध खड़े नीलगिरि और आम के वृक्ष मार्ग को रमणीयता प्रदान किए हुए थे। विहार के प्रारंभ में रहने वाली हल्की सर्दी सूर्य की क्रमशः बढ़ती हुई प्रखरता के कारण विहार की प्रायः संपन्नता तक गर्मी का रूप ले लेती है, किन्तु सामने से आती हुई तेज धूप भी पूर्व दिशा की ओर गतिमान पूज्यवर के समताभाव को
बाधित करने में असमर्थ ही सिद्ध होती है। आचार्यवर 10 किमी का विहार कर तिलयाणी बीलिन्दा स्थित प्राथमिक विद्यालय में पधारे। आज का प्रयास यहीं हुआ।

प्रातःकालीन कार्यक्रम के अंतर्गत परमाराध्य आचार्यवर ने अपने प्रवचन के दौरान जनता को पापों से आत्मरक्षा करने की प्रेरणा प्रदान की। आज अपराह्न में अहिंसा यात्रा में साथ चल रहे कर्मचारियों को पूज्यवर के निकट से समुपासना का अवसर प्राप्त हुआ। पूज्यवर ने उन्हें पावन प्रेरणा प्रदान दी। आज दिन भर स्थानीय ग्रामीणों के आवागमन का तांता सा लगा रहा। लोग पूज्यवर के दर्शन और पावन पथदर्शन से लाभान्वित हो रहे थे।

 

Photos

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